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Home»दुनिया»ईरान पर अगले हफ्ते दोबारा हमले की तैयारी में अमेरिका
दुनिया

ईरान पर अगले हफ्ते दोबारा हमले की तैयारी में अमेरिका

News DriftBy News DriftMay 16, 2026No Comments5 Mins Read
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ईरान पर अगले हफ्ते दोबारा हमले की तैयारी में अमेरिका
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अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पेंटागन ने अगले सप्ताह ईरान पर दोबारा बड़े सैन्य हमले के कई विकल्प तैयार कर लिए हैं। मध्य-पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक, दो एयरक्राफ्ट कैरियर, एक दर्जन से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों लड़ाकू विमान तैनात हैं — अब बस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अंतिम आदेश का इंतजार है।

50,000+अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व में तैनात / 2एयरक्राफ्ट कैरियर बैटल ग्रुप क्षेत्र में / 12+नेवी डेस्ट्रॉयर और युद्धपोत तैनात / $500Mरोजाना नुकसान ईरान को नौसेना नाकेबंदी से
पृष्ठभूमि: यह युद्ध कहाँ से शुरू हुआ? :

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जो 2026 के ईरान युद्ध की शुरुआत थी। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की हत्या सहित सैन्य ढांचे, परमाणु सुविधाओं और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।

पाकिस्तान की मध्यस्थता से 8 अप्रैल 2026 को दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ। इस्लामाबाद में बातचीत की गई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। ट्रम्प ने युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया, पर 13 अप्रैल से ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी है।

28 फरवरी 2026
अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले — ईरानी सर्वोच्च नेता खामेनेई समेत कई नेताओं की हत्या, परमाणु स्थलों पर प्रहार।
8 अप्रैल 2026
पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते का सशर्त युद्धविराम। इस्लामाबाद में ट्रम्प के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने ईरानी प्रतिनिधियों से बातचीत की।
13 अप्रैल 2026
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नौसेना नाकेबंदी (Naval Blockade) शुरू की। ईरान के हार्मुज जलडमरूमध्य से तेल और LNG की आवाजाही ठप।
7 मई 2026
अमेरिका-ईरान के बीच 14-सूत्री MOU प्रस्ताव: परमाणु संवर्धन पर रोक, प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज खोलने पर बातचीत। ट्रम्प ने कहा — “समझौता बहुत करीब है।”
11 मई 2026
ट्रम्प ने ईरान के प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” (TOTALLY UNACCEPTABLE) करार दिया। होर्मुज और परमाणु मुद्दों पर गतिरोध बरकरार।
16 मई 2026
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट — पेंटागन ने अगले हफ्ते दोबारा हमले के विकल्प तैयार किए। पाकिस्तानी गृह मंत्री तेहरान पहुंचे — बातचीत बहाल करने की कोशिश।
मैदान में क्या है? — अमेरिकी सैन्य ताकत :
थल सेना
50,000+ सैनिक मध्य-पूर्व में। 5,000 मरीन्स और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 2,000 पैराट्रूपर्स आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
नौसेना
दो एयरक्राफ्ट कैरियर बैटल ग्रुप, एक दर्जन से अधिक नेवी डेस्ट्रॉयर। USS Spruance ने पहले ही एक ईरानी जहाज जब्त किया।
वायु सेना
बड़ी संख्या में F-35, F-22 और B-2 स्टील्थ बॉम्बर तैनात। फोर्डो जैसी पहाड़ी परमाणु सुविधाओं पर हमले के लिए GBU-57 बंकर बस्टर बम।
नाकेबंदी
33 ईरानी जहाज रोके गए, 3 जब्त। अमेरिका का दावा — नाकेबंदी से ईरान को रोजाना $500 मिलियन का नुकसान।
ट्रम्प की चेतावनी: “अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो आपको ईरान से एक बड़ी रोशनी उठती दिखेगी।” — ट्रम्प ने मीडिया से कहा। उन्होंने यह भी कहा — “अगला हफ्ता बहुत बड़ा हो सकता है, शायद उससे भी पहले।”
बातचीत का मोर्चा: समझौते की उम्मीद अभी बाकी

इस तनाव के बीच राजनयिक प्रयास पूरी तरह ठंडे नहीं पड़े हैं। पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। 16 मई को पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी तेहरान पहुंचे — बातचीत बहाल करने की कोशिश के तहत।

MOU पर क्या सहमति बनी है?

  • ईरान परमाणु संवर्धन पर रोक — अवधि पर विवाद जारी (अमेरिका: 20 वर्ष, ईरान: 5 वर्ष)
  • अमेरिका प्रतिबंधों में राहत और फ्रोजन फंड जारी करेगा
  • होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाएगा
  • IAEA के निरीक्षकों को परमाणु स्थलों पर जाने की अनुमति
  • ईरान भूमिगत परमाणु सुविधाएं बंद करेगा

“समृद्ध सामग्री का विषय बहुत जटिल है। हम अमेरिकियों के साथ इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि चूंकि यह बहुत कठिन है — हम लगभग गतिरोध में हैं — तो इस विषय को बाद के चरण के लिए टाल दें।”

— ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची, 16 मई 2026 प्रेस कॉन्फ्रेंस
असल दांव: होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम

इस पूरे संकट की जड़ में दो बड़े मुद्दे हैं — होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान का परमाणु कार्यक्रम। युद्ध से पहले होर्मुज से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का 25% और 20% LNG गुज़रता था। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा हो गया है।

परमाणु मुद्दे पर ट्रम्प का रुख अडिग है — “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। परमाणु धूल को वे हमें सौंपेंगे।” ईरान कहता है — संवर्धन का अधिकार छोड़ना “अपमानजनक” है।

भारत पर असर: तेल, रुपया और रणनीतिक चिंता :
भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है — जिसमें बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते आता है। होर्मुज बंद रहने से ब्रेंट क्रूड $73 से उछलकर $107/बैरल पर पहुंच गया। इसी दबाव में PM मोदी ने देशवासियों से सोना न खरीदने की अपील की और आयात ड्यूटी 15% कर दी। डॉलर के मुकाबले रुपया ₹95 के करीब कमजोर हो चुका है। भारत ने युद्धविराम का स्वागत किया और होर्मुज के “निर्बाध व्यापार प्रवाह” की अपील की है।
आगे क्या? — तीन संभावित रास्ते:
रास्ता 1: समझौता
MOU पर हस्ताक्षर। होर्मुज खुले, प्रतिबंध हटें, परमाणु वार्ता शुरू। वैश्विक ऊर्जा संकट कम होगा।
रास्ता 2: गतिरोध
नाकेबंदी जारी, बातचीत ठंडी। युद्धविराम तो है पर शांति नहीं — ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी।
रास्ता 3: दोबारा हमला
पेंटागन के विकल्प सक्रिय। फोर्डो, नतांज और अन्य स्थलों पर हमला — वैश्विक युद्ध का खतरा।
ताज़ा उम्मीद: ट्रम्प ने PBS NewsHour को कहा — “इस युद्ध के खत्म होने की बहुत अच्छी संभावना है।” पाकिस्तानी मध्यस्थता जारी है। दोनों पक्ष एक-दूसरे को प्रस्ताव भेज रहे हैं — लेकिन परमाणु संवर्धन पर गतिरोध टूटना बाकी है।
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