UPSC Prelims 2026 Cut-Off: सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 खत्म होने के बाद अब देशभर के लाखों उम्मीदवारों की नजर संभावित कट-ऑफ और रिजल्ट पर टिकी हुई है। इस बार का पेपर अभ्यर्थियों के लिए कई मायनों में अलग और चुनौतीपूर्ण रहा। परीक्षा देकर बाहर निकले छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र सिर्फ कठिन ही नहीं था, बल्कि इतना लंबा थाकि तय समय में उसे ठीक से पढ़ पाना भी आसान नहीं था।
इस बार सामान्य अध्ययन (GS Paper-I) में कई सवाल बड़े पैराग्राफ और विश्लेषणात्मक तरीके से पूछे गए। यही वजह रही कि सालों से तैयारी कर रहे कई अभ्यर्थी भी परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते समय तनाव में दिखाई दिए।
इस बार क्या रहा सबसे अलग?
शिक्षाविदों और सिविल सेवा परीक्षा विशेषज्ञों के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, UPSC ने इस बार सीधे तथ्य आधारित प्रश्नों की बजाय Conceptual Understanding और Analytical Thinking पर ज्यादा जोर दिया। केवल रटकर तैयारी करने वाले छात्रों को पेपर में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पेपर का स्तर ऐसा था कि कई सवालों में उम्मीदवारों को विकल्पों के बीच बेहद बारीक अंतर समझना पड़ रहा था। कुछ प्रश्नों में Practical Situation और Case-based Approach भी देखने को मिली, जिसने परीक्षा को और चुनौतीपूर्ण बना दिया।
51 पेज का प्रश्नपत्र बना सबसे बड़ी चुनौती
इस बार परीक्षा का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला पहलू रहा प्रश्नपत्र की लंबाई। उम्मीदवारों के मुताबिक, पूरा पेपर करीब 51 पेज का था और कई सवाल आधे-आधे पेज तक फैले हुए थे।
ऐसे में समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया। कई छात्रों ने बताया कि उन्हें कई प्रश्न सिर्फ इसलिए छोड़ने पड़े क्योंकि पूरा सवाल पढ़ने और समझने में ही काफी समय निकल जा रहा था।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस बार जिन उम्मीदवारों की Reading Speed और Comprehension Skill बेहतर थी, उन्हें अपेक्षाकृत फायदा मिला
किन विषयों से आए ज्यादा सवाल?
इस बार के पेपर में History और Current Affairs का प्रभाव काफी ज्यादा देखने को मिला। खासकर प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास से जुड़े कुछ सवालों ने उम्मीदवारों को चौंकाया।
हालांकि कुछ प्रश्न सीधे और आसान थे, लेकिन कई सवाल गहरे अध्ययन और Standard Books की समझ मांग रहे थे।
वहीं Economy सेक्शन में Banking, Financial Inclusion, Digital Economy, Infrastructure और Government Schemes से जुड़े प्रश्न पूछे गए। कई प्रश्न हाल के आर्थिक और तकनीकी बदलावों से जुड़े थे, जिनमें UPI, CBDC, ONDC, Crowdfunding और Tokenization जैसे विषय शामिल रहे।
Current Affairs का स्वरूप भी इस बार पारंपरिक नहीं था। सामान्य खबरों की बजाय अपेाकृत कम चर्चित और तकनीकी विषयों से सवाल पूछे गए।
Negative Marking ने बढ़ाया दबाव
पेपर का स्तर कठिन होने की वजह से कई उम्मीदवारों ने Risk लेने से बचने की रणनीति अपनाई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार Guesswork करने वाले छात्रों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि कई प्रश्न बेहद confusing थे।
ऐसे में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने Negative Marking से बचने के लिए कुछ सवाल छोड़ना ज्यादा सुरक्षित समझा।
UPSC Prelims 2026 Expected Cut-Off
पेपर की कठिनाई, लंबाई और अप्रत्याशित सवालों को देखते हुए विशेषज्ञ इस बार Cut-Off अपेाकृत कम रहने का अनुमान लगा रहे हैं।
संभावित कट-ऑफ (200 अंकों में)
| श्रेणी | संभावित कट-ऑफ |
|---|
| सामान्य (General) | 70 – 75 |
| OBC | 69 – 74 |
| EWS | 63 – 68 |
| SC | 55 – 60 |
| ST | 45 – 50 |
| PwBD | 33 – 55 |
हालांकि यह केवल विशेषज्ञों के शुरुआती अनुमान हैं। वास्तविक कट-ऑफ उम्मीदवारों के Overall Performance, Vacancy और UPSC के Final Evaluation पर निर्भर करेगी।
Answer Key को लेकर बड़ा बदलाव
इस बार UPSC परीक्षा के बाद प्रोविजनल Answer Key जारी करने की तैयारी में भी बताया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो उम्मीदवार अपने संभावित अंकों का आकलन पहले ही कर सकेंगे। इसे अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
अब उम्मीदवार क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन उम्मीदवारों के अंक संभावित Cut-Off के आसपास बन रहे हैं, उन्हें बिना समय गंवाए Mains की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
वहीं जिन छात्रों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, उनके लिए यह परीक्षा आने वाले प्रयासों की तैयारी को बेहतर दिशा देने का मौका हो सकती है।
कुल मिलाकर, UPSC Prelims 2026 को हाल के वर्षों की सबसे कठिन और अप्रत्याशित परीक्षाओं में से एक माना जा रहा है।
