NEET री-एग्जाम: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा से ठीक पहले केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत भारत में टेलीग्राम ऐप की सेवाओं पर 22 जून 2026 तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही, टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर को 30 जून 2026 तक के लिए निष्क्रिय कर दिया गया है। यह फैसला 21 जून को होने वाली NEET-UG 2026 री-परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
NEET-UG 2026 की मूल परीक्षा 3 मई 2026 को 22.7 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए आयोजित की गई थी। लेकिन 12 मई को जांच में यह सामने आया कि एक पूर्व-प्रसारित ‘गेस पेपर’ और वास्तविक प्रश्नपत्र में असाधारण समानताएं थीं। इसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और 15 मई को NTA ने घोषणा की कि दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी।
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने जांच शुरू की और बिहार, गुजरात समेत कई राज्यों की पुलिस ने इस पेपर लीक मामले में संदिग्धों को गिरफ्तार किया। CBI ने भी इस मामले की जांच अपने हाथ में ली।
टेलीग्राम क्यों बना निशाना?
NTA की आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, री-परीक्षा से पहले के हफ्तों में टेलीग्राम पर ‘PAPER LEAKED NEET’, ‘Re-NEET 2026’, ‘Private Mafia’ और ‘REE NEET MAFIAA’ जैसे नामों वाले चैनल खुलेआम सक्रिय थे। ये चैनल अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को निशाना बनाकर हजारों से लाखों रुपये तक की मांग कर रहे थे।
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने कई टेलीग्राम चैनलों, ग्रुपों और बॉट्स को हटवाया। लेकिन नए चैनल तुरंत उभर आते थे। इसी को देखते हुए पूरे प्लेटफॉर्म पर ही रोक लगाने का फैसला लिया गया।
टेलीग्राम पर व्हाट्सएप की तुलना में बड़े ग्रुप, एन्क्रिप्शन, अनाम अकाउंट और बॉट्स की सुविधा होती है — जो धोखाधड़ी करने वालों का पसंदीदा हथियार बन जाती है।
कानूनी आधार: धारा 69A
MeitY ने यह कार्रवाई IT अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत की है। यह वही प्रावधान है जिसके तहत सरकार पहले भी TikTok सहित 200 से अधिक चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा चुकी है। इस धारा के तहत सरकार ‘सार्वजनिक व्यवस्था’, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ या ‘भारत की संप्रभुता’ के हित में किसी भी डिजिटल सेवा को अवरुद्ध कर सकती है।
NTA ने MeitY के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि यह अस्थायी प्रतिबंध लाखों अभ्यर्थियों के लिए ‘सुरक्षित और निष्पक्ष’ परीक्षा वातावरण सुनिश्चित करेगा।
प्रतिबंध की समय-सीमा
उपाय प्रभाव अंतिम तिथि
टेलीग्राम पूर्ण एक्सेस बंद भारत में ऐप पूरी तरह ब्लॉक 22 जून 2026
मैसेज एडिटिंग फीचर बंद भारतीय यूज़र्स एडिट नहीं कर पाएंगे 30 जून 2026
व्हाट्सएप पर बैन क्यों नहीं?
सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि जब धोखाधड़ी की समस्या दोनों मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर है, तो केवल टेलीग्राम पर ही बैन क्यों?
विशेषज्ञों का कहना है कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप की संरचना मौलिक रूप से भिन्न है। टेलीग्राम पर असीमित सदस्यों वाले सार्वजनिक चैनल, अनाम अकाउंट, और बॉट्स के जरिए फाइल शेयरिंग बेहद आसान है। इसके अलावा, व्हाट्सएप की तुलना में टेलीग्राम सरकारी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग को लेकर कम पारदर्शी रहा है।
आलोचना भी हुई
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक ‘अनुपातहीन’ कदम है। IFF के अनुसार, ‘एक दृढ़ पेपर लीक गिरोह VPN या मिरर के जरिए मिनटों में काम शुरू कर देता है, जबकि लाखों आम यूज़र्स एक हफ्ते तक सेवा से वंचित रहते हैं।’
IFF ने यह भी मांग की कि MeitY धारा 69A का आदेश और NTA की सिफारिश सार्वजनिक की जाए, ताकि इसके पीछे के तर्क को आम लोग समझ सकें।
‘राज्य उन लाखों लोगों की सेवा बंद नहीं कर सकता जो किसी गलती के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, और वह भी बिना कोई आदेश पढ़वाए।’ — इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन
अभ्यर्थियों पर क्या असर?
NEET-UG 2026 की री-परीक्षा में लाखों अभ्यर्थी शामिल होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में भरी गई फीस वापस की जाएगी और कोई नया पंजीकरण जरूरी नहीं होगा। परीक्षार्थियों के पुराने डेटा और परीक्षा केंद्र ही उपयोग में लाए जाएंगे।
टेलीग्राम बैन की वजह से जो छात्र पढ़ाई के लिए टेलीग्राम चैनलों का उपयोग करते थे, उन्हें अस्थायी असुविधा हो सकती है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह असुविधा परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की कीमत है।
न्यूज़ड्रिफ्ट का विश्लेषण
NEET विवाद लगातार दूसरे साल सामने आया है — 2024 में भी पेपर लीक के आरोप लगे थे। यह दिखाता है कि केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करना पर्याप्त नहीं है। जब तक परीक्षा प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधार नहीं होते — जैसे ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और मजबूत साइबर निगरानी — तब तक यह समस्या बार-बार सामने आती रहेगी।
टेलीग्राम बैन एक तात्कालिक राहत जरूर है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान नीतिगत बदलाव में ही निहित है।