लखनऊ l न्यूज़ डेस्क
मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन में सीज किए जाने वाले वाहनों को लेकर लखनऊ में एक बड़ी व्यवस्था बनकर तैयार हो गई है। अब ऐसे वाहन थानों के बाहर, परिसरों में या सड़क किनारे खड़े नज़र नहीं आएंगे, बल्कि इन्हें परिवहन विभाग के अपने डंपिंग ग्राउंड में रखा जाएगा। प्रदेश में परिवहन विभाग का यह पहला डंपिंग ग्राउंड राजधानी के अहिमामऊ इलाके में बनकर तैयार हो चुका है।
चार बीघा में बना, 500 वाहनों की क्षमता
करीब चार बीघा में फैला यह डंपिंग ग्राउंड एक साथ छोटे और बड़े मिलाकर करीब 500 वाहन खड़े करने की क्षमता रखता है। फिलहाल यहां बिजली का कनेक्शन नहीं है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार कनेक्शन के लिए आवेदन किया जा चुका है और उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक बिजली मिल जाएगी। कनेक्शन मिलते ही यहां वाहनों को खड़ा करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू करा दी जाएगी।
एआरटीओ प्रशासन प्रदीप कुमार सिंह के मुताबिक परिसर में एक कार्यालय और एक पुलिस पोस्ट भी बनाई गई है। कार्यालय में यहां खड़े किए जाने वाले वाहनों का पूरा लेखा-जोखा रखा जाएगा, जो पूरी तरह कंप्यूटरीकृत होगा।
चालकों के लिए भी सुविधाओं का ख्याल
सिर्फ वाहनों की पार्किंग ही नहीं, बल्कि सीज किए गए वाहनों के चालकों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। परिसर में उनके लिए शेड, शौचालय और स्नानागार बनाए गए हैं, जहां चालक अपना भोजन भी बना सकेंगे। हालांकि रात गुज़ारने के लिए फिलहाल उन्हें अपने वाहन का ही सहारा लेना होगा।
बड़े पैमाने पर चलेंगे प्रवर्तन अभियान
अब तक परिवहन विभाग की प्रवर्तन दस्ता टीम जब भी वाहनों की धरपकड़ का अभियान चलाती थी, तो सीज किए गए वाहनों को खड़ा करने के लिए जगह की कमी के चलते सीमित संख्या में ही कार्रवाई करनी पड़ती थी। डंपिंग ग्राउंड तैयार हो जाने के बाद विभाग के सामने यह मजबूरी नहीं रहेगी, जिससे अब बड़े पैमाने पर सघन जांच अभियान चलाए जा सकेंगे।
सड़क किनारे खड़े वाहन बनते थे जाम की वजह
अब तक परिवहन विभाग जांच के दौरान सीज किए गए वाहनों को संबंधित थानों को सौंप देता था। जगह की कमी के चलते बड़े वाहनों को थाने के बाहर सड़क पर ही खड़ा करना पड़ता था। ये वाहन अक्सर जाम और सड़क दुर्घटनाओं की वजह बनते थे। डंपिंग ग्राउंड के चालू होने के बाद वाहनों को थानों या सड़कों के बजाय सीधे यहीं खड़ा किया जाएगा, जिससे यह समस्या दूर होगी और आम लोगों को इससे काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
बिजली कनेक्शन मिलते ही यह व्यवस्था पूरी तरह अमल में आ जाएगी, और इसके बाद उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में भी इस मॉडल को दोहराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
