असम विधानसभा ने हाल ही में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पारित किया है, जिससे यह उत्तराखंड और गुजरात के बाद ऐसा करने वाला भारत का तीसरा राज्य और उत्तर-पूर्व (North East) का पहला राज्य बन गया है|
असम UCC बिल की मुख्य विशेषताएं और बदलाव निम्नलिखित हैं-
समान नागरिक कानून: इसका अर्थ है कि सभी धर्मों (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि) के लिए विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, विरासत, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक ही समान कानून लागू होगा/
बहुविवाह (Polygamy) पर प्रतिबंध: बिल में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है/ अब एक व्यक्ति एक ही समय में कई पत्नियां या पति नहीं रख सकता; दूसरी शादी के लिए पहली पत्नी या पति से कानूनी तलाक लेना अनिवार्य होगा/
पंजीकरण (Registration) अनिवार्य: असम में सभी विवाहों का कानूनी रूप से पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है/इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी अनिवार्य है ताकि महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिल सके और शोषण से बचाया जा सके/अनुसूचित जनजातियों (ST) को छूट: उत्तर-पूर्व की एथनिक संवेदनशीलता और जनजातीय कस्टमरी कानूनों (सिक्स्थ शेड्यूल क्षेत्रों सहित) को देखते हुए, अनुसूचित जनजातियों को इस UCC कानून के दायरे से बाहर रखा गया है/संपत्ति के अधिकार: बिल बेटियों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार के अधिकार सुनिश्चित करने पर जोर देता है/संवैधानिक और कानूनी संदर्भ: यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (DPSP) से प्रेरित है, जो राज्य को पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करने का निर्देश देता है/चूंकि विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे विषय समवर्ती सूची (Concurrent List) में आते हैं, इसलिए राज्य सरकारों के पास इन पर कानून बनाने का कानूनी अधिकार है/
