राष्ट्रमंडल खेल: खेलों का परिचय और आयोजन स्थल
यह राष्ट्रमंडल खेलों का 23वां संस्करण है, जो स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक आयोजित हो रहा है। इसमें 74 राष्ट्रमंडल देशों और क्षेत्रों के लगभग 3,000 सर्वश्रेष्ठ एथलीट हिस्सा ले रहे हैं, जो कुल 2.5 बिलियन लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन और राजा चार्ल्स तृतीय के राष्ट्रमंडल प्रमुख बनने के बाद आयोजित होने वाला पहला राष्ट्रमंडल खेल है। स्कॉटलैंड 12 वर्षों के भीतर राष्ट्रमंडल खेलों के दो संस्करण आयोजित करने वाला दूसरा देश बन गया है।
इतिहास का सबसे छोटा संस्करण
इस बार के खेलों की सबसे बड़ी खासियत (और चर्चा का विषय) है इनका बेहद सीमित स्वरूप। यह पिछले 32 वर्षों के इतिहास में अब तक का सबसे छोटा खेल आयोजन है — 1994 के विक्टोरिया (कनाडा) खेलों के बाद यह पहला मौका है जब सिर्फ 10 स्पर्धाओं को ही जगह दी गई है। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ ने वित्त और आधारभूत संरचना जैसे कारणों का हवाला देते हुए 12 खेलों को इस आयोजन से हटा दिया, क्योंकि बर्मिंघम 2022 के 22 खेलों की तुलना में ग्लासगो 2026 को ज्यादा बजट-अनुकूल बनाने की जरूरत महसूस हुई।
शामिल किए गए 10 खेल:
आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स, बॉल्स और पैरा बॉल्स, मुक्केबाजी, ट्रैक साइक्लिंग और पैरा ट्रैक साइक्लिंग, नेटबॉल, जूडो, तैराकी और पैरा तैराकी, वेटलिफ्टिंग और पैरा पावरलिफ्टिंग, तथा 3×3 बास्केटबॉल और 3×3 व्हीलचेयर बास्केटबॉल।
बाहर किए गए प्रमुख खेल:
हॉकी, बैडमिंटन, क्रिकेट, टेबल टेनिस, कुश्ती और स्क्वैश जैसे लोकप्रिय खेल इस बार गायब हैं।
इसका एक और अनोखा पहलू यह है कि इस बार पारंपरिक एथलीट्स विलेज भी नहीं बनाया गया है। इसके बजाय एथलीट अलग-अलग होटलों और आवासों में ठहरे हैं, जिसे आयोजकों ने “होम अवे फ्रॉम होम” अनुभव के तौर पर पेश किया।
भारत के लिए चुनौती
खेलों की संख्या घटने का सीधा असर भारत की पदक संभावनाओं पर पड़ा है। जिन प्रमुख खेलों के दम पर भारत पदक तालिका में शीर्ष चार में जगह बनाता रहा है — बैडमिंटन, कुश्ती, शूटिंग, टेबल टेनिस, हॉकी, क्रिकेट और स्क्वैश — वे सभी इस बार प्रतियोगिता सूची से गायब हैं।
भारतीय दल
भारत ने इस बार 126 खिलाड़ियों का दल भेजा है, जिसमें 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी (पैरा स्पोर्ट्स सहित) शामिल हैं। दल में 51 अधिकारी और सपोर्ट स्टाफ भी शामिल हैं। भारतीय दल में सबसे अधिक खिलाड़ी एथलेटिक्स से हैं — इस खेल में कुल 32 एथलीट (22 पुरुष और 10 महिला) देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
प्रमुख भारतीय खिलाड़ी: नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू, लवलीना बोर्गोहेन, श्रीहरि नटराज, प्रणति नायक, प्रीति पवार, बिंद्यारानी देवी, तुलिका मान, मुरली श्रीशंकर, तेजस्विन शंकर, पारुल चौधरी और प्रियंका गोस्वामी।
उद्घाटन समारोह
23 जुलाई को ग्लासगो के OVO हाइड्रो एरिना में हुए रंगारंग उद्घाटन समारोह की शुरुआत किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने पारंपरिक ढंग से की। परेड ऑफ नेशंस के दौरान भारतीय दल ओलंपिक पदक विजेता वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन की अगुवाई में एरिना में पहुंचा — मीराबाई ने राष्ट्रीय ध्वज थामा, जबकि लवलीना ‘किंग्स बैटन’ लेकर चलीं। समारोह में ब्रिटिश गायक टॉम वॉकर की प्रस्तुति भी हुई, और इस बार पदकों के डिजाइन में भी बदलाव करते हुए कलाकार मिलित्सा मिलेनकोवा ने ग्लासगो की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान को शामिल किया।
पदक तालिका — अब तक की स्थिति (27 जुलाई 2026 तक)
खेलों के चौथे दिन तक की स्थिति के अनुसार:
- ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर है — 17 स्वर्ण, 9 रजत और 17 कांस्य पदकों के साथ।
- इंग्लैंड दूसरे स्थान पर है — 4 स्वर्ण, 9 रजत और 6 कांस्य पदकों के साथ।
- स्कॉटलैंड (मेज़बान) — 4 स्वर्ण और 2 रजत पदकों के साथ आगे है।
भारत का प्रदर्शन
भारत ने इस बार धीमी लेकिन मजबूत शुरुआत की है:
- भारत के लिए पहला पदक पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने जीता — उन्होंने पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया।
- इसके बाद वेटलिफ्टिंग में भारत का शानदार दिन रहा — मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर लगातार तीसरा राष्ट्रमंडल खेल खिताब अपने नाम किया, 190 किग्रा (85 किग्रा स्नैच + 105 किग्रा क्लीन एंड जर्क) के कुल भार के साथ, और स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया।
- इसी दिन ऋषिकांत सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में 264 किग्रा के कुल भार के साथ रजत पदक जीता।
- राजा मुथुपांडी ने पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में 286 किग्रा के कुल भार के साथ रजत पदक हासिल किया — हालांकि मलेशिया के अजनिल बिन बिदिन मुहम्मद ने 299 किग्रा के नए गेम्स रिकॉर्ड के साथ लगातार तीसरा स्वर्ण जीतकर उन्हें पीछे छोड़ दिया।
इस तरह रविवार तक भारत की कुल पदक संख्या चार हो गई — एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य, और ये सभी चारों पदक अकेले वेटलिफ्टिंग से आए। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।
एक खास बात यह भी है कि मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में क्वार्टर फाइनल बाई मिलने के कारण पहले ही पदक पक्का कर चुकी हैं — मुक्केबाजी में दोनों हारने वाले सेमीफाइनलिस्ट को कांस्य पदक दिया जाता है, हालांकि लवलीना इसे स्वर्ण में बदलने की कोशिश करेंगी।
आगे की उम्मीदें
एथलेटिक्स में भारत का अभियान भी शुरू हो चुका है — पुरुषों की हाई जंप फाइनल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक सर्वेश कुशारे, बर्मिंघम 2022 के कांस्य पदक विजेता तेजस्विन शंकर और आदर्श राम ज्योति शंकर की तिकड़ी मैदान में उतरेगी। इसके अलावा राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक तेजस शिरसे पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ में अपना अभियान शुरू करेंगे, जबकि 100 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक गुरिंदरवीर सिंह और CWG 2022 के रजत पदक विजेता मुरली श्रीशंकर भी अपने-अपने इवेंट में हिस्सा लेंगे। नीरज चोपड़ा से भी भाला फेंक में पदक की सबसे बड़ी उम्मीद बनी हुई है।
