23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लास्गो शहर में आयोजित हुए राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) के 23वें संस्करण में भारत ने 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया।
ग्लास्गो 2026, आधिकारिक तौर पर XXIII कॉमनवेल्थ गेम्स, राष्ट्रमंडल देशों के इस चतुर्वार्षिक खेल आयोजन का 23वां संस्करण था। यह तीसरी बार था जब स्कॉटलैंड ने इन खेलों की मेज़बानी की (इससे पहले एडिनबरा में 1970 और 1986 में, और ग्लास्गो में ही 2014 में), और अब चौथी बार।
इस आयोजन की सबसे दिलचस्प कहानी इसकी मेज़बानी को लेकर रही। मूल रूप से ये खेल ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में होने थे, लेकिन बढ़ती लागत (लगभग 6-7 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक पहुंचने के अनुमान) के कारण जुलाई 2023 में विक्टोरिया सरकार ने मेज़बानी से हाथ खींच लिए। इसके बाद गोल्ड कोस्ट, मलेशिया, सिंगापुर और घाना जैसे विकल्पों पर भी विचार हुआ, लेकिन बात नहीं बनी। अंततः सितंबर 2024 में स्कॉटिश सरकार ने विक्टोरिया से मिले मुआवजे (करीब 20 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) की मदद से एक छोटे, किफायती संस्करण के तौर पर ग्लास्गो में खेलों की मेज़बानी करने पर सहमति जताई।
इसी वजह से यह अब तक का सबसे “छोटा” संस्करण भी रहा — सिर्फ 10 खेल (कुछ पैरा स्पर्धाओं समेत 11 गिने जाने पर), चार वेन्यू क्लस्टर और बिना किसी अलग एथलीट विलेज के आयोजित किया गया। यह 1994 के बाद सबसे कम खेलों वाला संस्करण था। कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश, ट्रायथलॉन, डाइविंग, रग्बी सेवंस और T20 क्रिकेट जैसे खेल इस बार शामिल नहीं किए गए।
- उद्घाटन समारोह: 23 जुलाई 2026, OVO Hydro एरीना में — यह पहली बार था जब उद्घाटन समारोह किसी इनडोर वेन्यू में हुआ।
- समापन समारोह: 2 अगस्त 2026, जहां अगली मेज़बानी अहमदाबाद (भारत) को सौंपी गई — 2030 में शताब्दी संस्करण भारत में होगा।
- भाग लेने वाले देश: 74 राष्ट्रमंडल खेल संघ (Commonwealth Games Associations), जिनमें गैबॉन और टोगो ने पहली बार हिस्सा लिया।
- कुल खिलाड़ी: लगभग 3,000
- कुल स्पर्धाएं: 215 स्वर्ण पदक स्पर्धाएं, 10 खेलों (16 डिसिप्लिन) में, जिनमें से 6 खेलों में पैरा-स्पोर्ट्स भी शामिल थे — यह इतिहास में किसी भी राष्ट्रमंडल खेल का सबसे बड़ा पैरा-स्पोर्ट्स कार्यक्रम था (47 पैरा फाइनल)।
लोगो, शुभंकर और अन्य पहचान चिन्ह
लोगो: ग्लास्गो 2026 का लोगो एक “ऐतिहासिक पहली” कोशिश माना गया, क्योंकि इसमें कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन के लोगो को सीधे ग्लास्गो शहर की दृश्य पहचान के साथ जोड़ा गया। इसमें नदी क्लाइड (River Clyde) और क्लाइड आर्क पुल (Clyde Arc Bridge) की प्रतीकात्मक झलक शामिल है, जो वॉटरफ्रंट के रंगों में बनाई गई है। इसे ग्लास्गो स्थित एजेंसी Loop Design ने डिज़ाइन किया।
शुभंकर (मैस्कट): खेलों का शुभंकर फिनी (Finnie) नाम का एक गुलाबी गेंडा (यूनिकॉर्न) है, जिसे स्कॉटलैंड भर के स्कूली बच्चों ने मिलकर डिज़ाइन किया। फिनी का नाम शहर के मशहूर फिनिस्टन क्रेन (Finnieston Crane) से लिया गया है, और उसके सींग की जगह एक ट्रैफिक कोन लगा है — यह ग्लास्गो की उस मशहूर परंपरा का मज़ाकिया संदर्भ है जिसमें शहरवासी ड्यूक ऑफ वेलिंग्टन की प्रतिमा के सिर पर ट्रैफिक कोन रख देते हैं। यूनिकॉर्न स्कॉटलैंड का राष्ट्रीय पशु भी है।

आधिकारिक टार्टन: स्कॉटिश डिज़ाइनर सिओभान मैकेंज़ी के साथ मिलकर बनाया गया खास टार्टन जुलाई 2025 में जारी हुआ। इसमें नीले, गुलाबी और बैंगनी रंगों का इस्तेमाल स्टील-ग्रे बेस पर किया गया — 74 ग्रे धागे 74 भाग लेने वाले देशों का प्रतीक हैं, जबकि 26 नीले धागे साल 2026 को दर्शाते हैं।
मैडल डिज़ाइन: पदकों को कलाकार मिलित्सा मिलेनकोवा ने डिज़ाइन किया, जो ग्लास्गो स्कूल ऑफ आर्ट की “आर्टिस्ट इन रेजिडेंस” रह चुकी हैं। पदक एक अनोखे ज्यामितीय आकार — रीलो त्रिकोण (Reuleaux triangle) — में बने हैं, जो पहले किसी भी खेल पदक से अलग है। इसमें शहर के कोट ऑफ आर्म्स, फिनिस्टन क्रेन और टार्टन पैटर्न की झलक है। सबसे खास बात — पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पदकों में ब्रेल और स्पर्श-योग्य (tactile) एलिमेंट्स जोड़े गए ताकि दृष्टिबाधित लोग भी उन्हें महसूस कर सकें।
किंग्स बैटन रिले (Baton Relay): 10 मार्च 2025 को किंग चार्ल्स तृतीय ने ओलंपिक व पैरालंपिक स्वर्ण विजेता सर क्रिस हॉय को बैटन सौंपकर रिले की शुरुआत की। इस बार एक नया प्रारूप अपनाया गया — एक ही बैटन दुनियाभर घुमाने के बजाय, सभी 74 देशों को अपना अलग, स्थानीय संस्कृति दर्शाता बैटन दिया गया, जिससे यह अब तक की सबसे लंबी और सबसे विकेंद्रीकृत बैटन रिले बनी।
कुल 215 गोल्ड मेडल स्पर्धाएं आयोजित हुईं और लगभग 645 पदक बांटे गए। खास बात यह रही कि महिलाओं की मील (Mile) दौड़ इस बार पहली बार शामिल हुई — यह 1954 के वैंकूवर खेलों की मशहूर “मिरेकल माइल” (रोजर बैनिस्टर बनाम जॉन लैंडी) को श्रद्धांजलि थी।
पूरी मैडल तालिका (टॉप 10 देश)
| स्थान | देश | गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | कुल |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ऑस्ट्रेलिया | 70 | 44 | 56 | 170 |
| 2 | इंग्लैंड | 29 | 45 | 36 | 110 |
| 3 | कनाडा | 19 | 20 | 23 | 62 |
| 4 | भारत | 13 | 17 | 9 | 39 |
| 5 | स्कॉटलैंड (मेज़बान) | 13 | 9 | 17 | 39 |
| 6 | न्यूज़ीलैंड | 10 | 14 | 11 | 35 |
| 7 | नाइजीरिया | 10 | 7 | 7 | 24 |
| 8 | जमैका | 10 | 4 | 5 | 19 |
| 9 | वेल्स | 9 | 10 | 12 | 31 |
| 10 | मलेशिया | 8 | 3 | 5 | 16 |
(74 में से 45 देशों/क्षेत्रों ने कम से कम एक पदक जीता।)
कुछ दिलचस्प तथ्य:
- ऑस्ट्रेलिया ने तैराकी और पैरा-स्विमिंग में अकेले 37 गोल्ड और 76 पदक जीते।
- साउथ अफ्रीका के तैराक चैड ली क्लो राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास के सबसे सफल एथलीट बन गए — कुल 21 पदक (7 गोल्ड, 5 सिल्वर, 9 ब्रॉन्ज़) जीतकर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की एम्मा मैककियोन (20 पदक) को पीछे छोड़ा।
- रवांडा को अपना पहला ही पदक मिला — फ्लोरेंस न्योनकुरू ने 10,000 मीटर में कांस्य जीता।
- डोमिनिका ने अपना पहला गोल्ड मेडल जीता — थिया लाफॉन्ड ने महिलाओं की ट्रिपल जंप में।
- तुवालु को अपना पहला राष्ट्रमंडल पदक मिला — मुक्केबाज़ तारोना ताफाकी ने महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में कांस्य जीता।
- न्यूज़ीलैंड ने नेटबॉल में जमैका को 56-48 से हराकर 2010 के बाद पहली बार खिताब जीता।
- स्कॉटलैंड के जोश केर ने पुरुषों की मील दौड़ (1966 के बाद पहली बार शामिल) 3:54.12 में जीतकर घरेलू दर्शकों को सबसे यादगार पल दिया।
भारत का प्रदर्शन: एक नज़र में
भारत ने 39 पदक (13 गोल्ड, 17 सिल्वर, 9 ब्रॉन्ज़) के साथ पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया — मेज़बान स्कॉटलैंड से बेहतर सिल्वर मेडल संख्या की बदौलत, क्योंकि दोनों देशों के कुल पदक (39-39) और गोल्ड (13-13) बराबर थे।
122 भारतीय एथलीटों ने आठ ओलंपिक खेलों और पांच इंटीग्रेटेड पैरा-स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। मूल रूप से 191 सदस्यीय दल (126 एथलीट, 51 अधिकारी) मंज़ूर हुआ था, लेकिन एक पैरा तैराक के क्वालिफिकेशन विवाद और तीन एथलीटों की वापसी के बाद यह संख्या घटी।
खास बात यह रही कि बर्मिंघम 2022 में जीते गए 61 पदकों में से लगभग आधे (30) उन खेलों में आए थे जो इस बार शामिल ही नहीं थे (कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, शूटिंग)। इसके बावजूद जिन 10 खेलों में दोनों संस्करणों में भारत ने भाग लिया, उनमें पदक संख्या 31 से बढ़कर 39 हो गई — यानी दक्षता के लिहाज़ से यह भारत के सबसे शानदार अभियानों में से एक रहा।
खेल के अनुसार भारत के पदक
| खेल | गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज़ | कुल |
|---|---|---|---|---|
| बॉक्सिंग | 7 | 3 | 0 | 10 |
| एथलेटिक्स | 0 | 5 | 5 | 10 |
| वेटलिफ्टिंग | 1 | 6 | 1 | 8 |
| पैरा-एथलेटिक्स | 3 | 2 | 1 | 6 |
| जूडो | 2 | 1 | 1 | 4 |
| पैरा-पावरलिफ्टिंग | 0 | 0 | 1 | 1 |
| कुल | 13 | 17 | 9 | 39 |
बॉक्सिंग भारत के लिए सबसे शानदार खेल रहा — 7 स्वर्ण किसी भी देश द्वारा एक ही संस्करण में जीते गए सबसे ज़्यादा बॉक्सिंग गोल्ड हैं (इससे पहले यह रिकॉर्ड इंग्लैंड और कनाडा के पास 6-6 गोल्ड का था)। एथलेटिक्स में पदक संख्या बर्मिंघम के मुकाबले दोगुनी हो गई (8 से 16, पैरा-एथलेटिक्स मिलाकर)। भारत का पैरा-अभियान भी ऐतिहासिक रहा — 7 पदकों (3 गोल्ड, 2 सिल्वर, 2 ब्रॉन्ज़) के साथ भारत ने अब तक के सभी राष्ट्रमंडल खेलों में जीते अपने कुल पैरा-पदकों (7) की बराबरी अकेले इस एक संस्करण में कर ली — 20 साल के इंतज़ार के बाद पैरा-एथलेटिक्स में पदक आया।
भारत के ध्वजवाहक (Flag Bearers)
- उद्घाटन समारोह: वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने भारत की तिरंगा थामा, जबकि मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहेन बैटन-वाहक रहीं।
- समापन समारोह: मुक्केबाज़ जैस्मीन लम्बोरिया — जो 57 किग्रा भारवर्ग में विश्व चैंपियन और अब कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट भी बन चुकी हैं — ने भारतीय दल का नेतृत्व किया।
