जिले के गांवों में हेपेटाइटिस सी (हेप-सी) संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बिसवां विकासखंड के जहांगीराबाद गांव और उसके आसपास के इलाकों में अब तक बड़ी संख्या में लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
कैसे हुआ खुलासा
मामले की शुरुआत तब हुई जब गांव के एक व्यक्ति में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई। इसके बाद उसके परिवार के अन्य सदस्यों — पत्नी, बेटी, भाई और भाई की पत्नी — की भी निजी पैथोलॉजी में जांच कराई गई, जिसमें एक ही परिवार के छह सदस्य संक्रमित मिले। इसके बाद पीड़ित परिवार के आसपास रहने वाले पड़ोसियों की भी जांच शुरू की गई तो वहां भी 21 नए संक्रमित सामने आए। इस तरह गांव में अब तक 32 से अधिक लोग हेपेटाइटिस से संक्रमित पाए जा चुके हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की राज्य मुख्यालय टीम ने भी संज्ञान लिया और सीएमओ से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी। इसके बाद जिला सर्विलांस अधिकारी की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की छह टीमों ने गांव के 154 घरों के 823 सदस्यों की जांच की, जिनमें से 406 लोगों के संदेह के आधार पर ब्लड सैंपल लिए गए। इनमें से वायरल लोड जांच में 43 लोगों में हेपेटाइटिस की पुष्टि हुई — इनमें दो मरीज हेपेटाइटिस बी के और बाकी हेपेटाइटिस सी के पाए गए। सभी संक्रमित मरीजों का इलाज शुरू करवा दिया गया है।
इसी तरह जिले के सोनसारी गांव में भी हेपेटाइटिस बी और सी के मामले अचानक बढ़ने लगे, जहां अब तक 95 से ज्यादा लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। सीएमओ के अनुसार यहां एक ही दिन में 31 नए मामले सामने आए थे।
नाई के ब्लेड और असुरक्षित शेविंग-कटिंग पर शक
स्वास्थ्य विभाग की जांच में एक अहम पहलू सामने आया है — गांवों में बाहर से हर हफ्ते नाई (बार्बर) आते हैं, और आशंका जताई जा रही है कि असुरक्षित शेविंग, बाल कटाई और एक ही ब्लेड व रेजर को कई लोगों पर इस्तेमाल करने से यह संक्रमण फैल रहा है। यदि ब्लेड, रेजर या कैंची को हर इस्तेमाल के बाद ठीक से सैनिटाइज़ या स्टरलाइज़ नहीं किया जाता, तो संक्रमित व्यक्ति के खून के सूक्ष्म अंश दूसरे व्यक्ति की त्वचा में कट या खरोंच के जरिए पहुंच सकते हैं, जिससे संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता चला जाता है। यही वजह है कि एक ही परिवार और आसपास के घरों में बड़ी संख्या में मामले मिलने से जांच का दायरा अब पूरे गांव तक बढ़ा दिया गया है, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अभी और मरीज सामने आ सकते हैं।
हेपेटाइटिस सी क्या है?
हेपेटाइटिस सी लीवर (यकृत) को प्रभावित करने वाला एक वायरल संक्रमण है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस (HCV) के कारण होता है। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खून के संपर्क में आने से फैलता है — जैसे संक्रमित सुई या सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल, बिना स्टरलाइज़ किए मेडिकल या डेंटल उपकरण, टैटू बनवाने में इस्तेमाल हुई दूषित सुइयां, और रेजर, ब्लेड या टूथब्रश जैसी निजी चीजें साझा करना, जिन पर संक्रमित व्यक्ति के खून के सूक्ष्म कण लगे हों।
यह बीमारी छूने, गले लगने, हाथ मिलाने, खांसने-छींकने या खाना-पीना साझा करने से नहीं फैलती — इसके फैलने का इकलौता मुख्य जरिया खून का संपर्क है।
लक्षण
हेपेटाइटिस सी की सबसे बड़ी खतरनाक बात यह है कि शुरुआती दौर में अक्सर इसके कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते, जिस वजह से यह चुपचाप वर्षों तक लीवर को नुकसान पहुंचाता रहता है। जब लक्षण दिखते हैं, तो इनमें शामिल हो सकते हैं — लगातार थकान रहना, हल्का बुखार, पेट में दर्द, भूख न लगना, जी मिचलाना, पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना), और पेशाब का रंग गहरा होना। समय पर इलाज न होने पर यह संक्रमण लीवर सिरोसिस (लीवर का सख्त होना), लीवर फेलियर या लीवर कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों तक पहुंचा सकता है।
क्या इसका इलाज संभव है?
राहत की बात यह है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में हेपेटाइटिस सी अब पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है। इसका इलाज मुख्य रूप से एंटीवायरल दवाओं (डायरेक्ट-एक्टिंग एंटीवायरल्स/DAA) से किया जाता है, जिन्हें डॉक्टर मरीज के वायरल लोड, वायरस के जीनोटाइप (स्ट्रेन) और लीवर की स्थिति के आधार पर तय करते हैं। इलाज पूरा होने के तीन महीने बाद अगर खून की जांच में वायरस का पता नहीं चलता, तो मरीज को पूरी तरह ठीक माना जाता है, जिसे ‘सस्टेन्ड वायरोलॉजिकल रिस्पॉन्स (SVR)’ कहा जाता है। नई दवाओं के आने से आज हेपेटाइटिस सी के इलाज में करीब 90 प्रतिशत तक सफलता दर देखी जा रही है।
हालांकि अगर बीमारी का पता देर से चले और लीवर पहले ही काफी क्षतिग्रस्त हो चुका हो, तो सिर्फ दवाओं से इलाज पर्याप्त नहीं होता — ऐसे में लीवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और जरूरत पड़ने पर लीवर बायोप्सी के जरिए विस्तृत जांच कर लीवर की सेहत का आकलन किया जाता है, और लीवर विशेषज्ञ की निगरानी में इलाज चलाया जाता है।
बचाव कैसे करें
- नाई से बाल कटवाते या शेविंग कराते समय नए/डिस्पोजेबल ब्लेड के इस्तेमाल पर जोर दें
- रेजर, ब्लेड, कैंची, टूथब्रश जैसी निजी चीजें कभी साझा न करें
- टैटू या पियर्सिंग केवल स्टरलाइज़ उपकरणों वाली भरोसेमंद जगह से ही कराएं
- इंजेक्शन या सुई का इस्तेमाल हमेशा नई और डिस्पोजेबल ही करें
- यदि परिवार या आसपास किसी में हेपेटाइटिस की पुष्टि हो, तो बिना देर किए अपनी जांच जरूर कराएं, क्योंकि शुरुआती दौर में पहचान होने पर इलाज कहीं आसान और असरदार होता है
