उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने वाली बीसी सखियों (बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी) को जल्द ही स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ देने की तैयारी कर रही है। प्रदेश में वर्तमान में करीब 40 हजार बीसी सखियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। सरकार इन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा से जोड़ने पर विचार कर रही है।
इसके साथ ही लखपति दीदियों, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को भी आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने की तैयारी है। उच्चाधिकारियों की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया है और जल्द ही प्रस्ताव को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
गांव-गांव बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं बीसी सखियां
ग्रामीण विकास विभाग ने गांवों में महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए बीसी सखी के रूप में काम करने का अवसर दिया है। समूहों के माध्यम से चयनित महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। प्रदेश में करीब 40 हजार महिलाएं सक्रिय बीसी सखी के तौर पर कार्य कर रही हैं।
बीसी सखियां गांव-गांव जाकर लोगों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ सरकारी योजनाओं से जुड़े वित्तीय लेनदेन में भी मदद करती हैं। इनकी औसत मासिक आय करीब 10 से 15 हजार रुपये बताई जा रही है।
स्वास्थ्य सुरक्षा से बढ़ेगा सामाजिक संरक्षण
सरकार का मानना है कि बीसी सखियों को आयुष्मान योजना से जोड़ने से उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिलेगी। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से गंभीर बीमारी की स्थिति में उन्हें और उनके परिवार को इलाज का लाभ मिल सकेगा।
इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी दीदियों और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को भी आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे इन वर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रदेश में 18.55 लाख लखपति दीदियां
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में करीब 18.55 लाख लखपति दीदियां होने की जानकारी दी गई है। सरकार इन महिलाओं को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद पात्र महिलाओं को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
सरकार का यह कदम ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
