राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के सदस्यों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आ सकती है। बहुत जल्द एनपीएस में बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह अलग, एक निश्चित रिटर्न या पेंशन भुगतान का विकल्प मिल सकता है। पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) इस योजना को शुरू करने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा कर रहा है, हालांकि यह योजना अभी शुरुआती चरण में है।
मौजूदा समय में एनपीएस मूल रूप से अंशदान आधारित व्यवस्था है, जिसके तहत पहले से किसी भी प्रकार की निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ‘न्यूनतम सुनिश्चित रिटर्न योजना’ पर काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे निवेशकों को एक बेहतर विकल्प देना है, जो शेयर बाजार से जुड़े रिटर्न के जोखिम के बजाय, सेवानिवृत्ति के बाद एक सुरक्षित और निश्चित आय प्राप्त करना चाहते हैं।
फिलहाल एनपीएस में मिलने वाला अंतिम लाभ पूरी तरह से निवेश के बाजार प्रदर्शन पर निर्भर करता है। ऐसे में गारंटीशुदा भुगतान देने के लिए पेंशन कोष प्रबंधकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से अपने निवेश को बचाना होगा। प्राधिकरण एक ऐसी व्यवस्था बनाने में जुटा है, जिससे निवेशकों को सुरक्षा भी मिले और योजना की लागत भी नियंत्रण में बनी रहे।
एक साल में किए गए कई बड़े बदलाव
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दिसंबर 2025: 12 लाख रुपये से अधिक की बचत वाले अंशधारकों के लिए निकासी के समय मिलने वाली एकमुश्त रकम की सीमा को 60 फीसदी से बढ़ाकर 80 फीसदी कर दिया गया।
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जनवरी 2026 (भाग-1): पेंशन कोषों को एनपीएस की रकम का कुछ हिस्सा चुनिंदा जिंसों (कमोडिटीज) में लगाने की अनुमति प्रदान की गई। साथ ही, बैंकों को अपने स्वयं के पेंशन कोष प्रायोजित करने से जुड़ा नया ढांचा भी मंजूर किया गया।
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जनवरी 2026 (भाग-2): एक ऐसा नया ढांचा मंजूर हुआ, जिसके तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक स्वतंत्र रूप से एनपीएस परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने वाले पेंशन फंडों को प्रायोजित कर सकेंगे।
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एनपीएस वात्सल्य: इसके एग्जिट नियमों में ढील दी गई है, जिसके तहत माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों के लिए भी एनपीएस खाते खोल सकते हैं।
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जून 2026: PFRDA ने ग्राहक सेवा केंद्रों (POP) के लिए ऑडिट नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया। ये केंद्र ग्राहकों के एनपीएस खाते खोलने और उन्हें संचालित करने का काम करते हैं।
पहले भी आया था इसका प्रस्ताव
एनपीएस में सुनिश्चित भुगतान का यह विचार कोई नया नहीं है। इससे पहले PFRDA ने इस संबंध में एक परामर्श पत्र जारी किया था। इसके बाद जनवरी 2026 में नियामक ने नियमित पेंशन भुगतान से जुड़े ढांचे पर सलाह देने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन भी किया था। इस समिति को सुनिश्चित भुगतान के लिए कड़े नियम, विनियामक ढांचा, निकासी सीमा, लॉक-इन अवधि, शुल्क, जोखिम प्रबंधन और कर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पेंशन कोष प्रबंधकों के लिए बढ़ेंगे नए मौके
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुनिश्चित रिटर्न प्रदान करने के लिए जोखिम से बचाव (हेजिंग) की लागत में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, PFRDA की पूरी कोशिश यह है कि इस प्रकार की गारंटी देने के बावजूद एनपीएस की सबसे बड़ी खूबी यानी इसकी ‘कम लागत’ हमेशा बनी रहे। इसके लिए पेंशन कोषों को ‘वादा अनुबंध बाजार’ (Forward Contract Market) तक अपनी पहुंच बनाने की संभावना पर भी विचार-विमर्श जारी है। फिलहाल पेंशन कोषों को वादा अनुबंध बाजार का इस्तेमाल करने की अनुमति बेहद सीमित और कुछ खास शर्तों के साथ ही दी गई है।
