भारत में एक मध्यमवर्गीय परिवार का बच्चा जब डॉक्टर बनने का सपना देखता है, तो वह सपना सिर्फ उसका नहीं होता — उसके माँ-बाप की बरसों की जमापूँजी का होता है, उसके गाँव की उम्मीदों का होता है। वह बच्चा सुबह चार बजे उठता है, दूर दराज के शहरों की तंग गलियों में रहता है, खाना भूलकर पढ़ता है — सिर्फ इसलिए कि एक दिन NEET पास करेगा और देश का डॉक्टर बनेगा।
लेकिन जब परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर पेपर वायरल हो जाए, जब CBI गिरफ्तारियाँ करे, जब NTA परीक्षा रद्द करने पर मजबूर हो — तो उस बच्चे की मेहनत का क्या मोल?
NEET 2026: इतिहास खुद को दोहरा रहा है — फिर से
3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा को 12 मई 2026 को NTA ने आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया। केंद्रीय एजेंसियों की जाँच में पाया गया कि परीक्षा प्रक्रिया की अखंडता से समझौता हो चुका था। सरकार ने CBI जाँच के आदेश दिए और NTA ने दोबारा परीक्षा की घोषणा की।
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जाँच में सामने आया कि एक “गेस पेपर” में करीब 410 प्रश्न थे, जिनमें से लगभग 120 प्रश्न Biology और Chemistry के वास्तविक पेपर से मिलते-जुलते थे। यह सामग्री परीक्षा से 42 घंटे पहले छात्रों के WhatsApp पर भेजी गई थी।
दिल्ली की एक अदालत के सामने CBI ने स्वीकार किया कि NEET 2026 परीक्षा की तारीख से पहले ही एक संगठित गिरोह ने पैसों के लालच में पेपर लीक करके उसे बाँटा। अब तक छह आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और आरोपियों के बीच लगभग 6 लाख रुपये के बैंकिंग लेनदेन के प्रमाण मिले हैं।
सरकार का जवाब? वही पुरानी पटकथा — CBI जाँच, आश्वासन, और दोबारा परीक्षा:
2022, 2023, 2024, 2025, 2026 — हर साल एक नई FIR, एक नई CBI जाँच, एक नया वादा। और हर साल वही परिणाम — लाखों ईमानदार छात्रों की तबाही।
NTA ने उस वर्ष एक भी हेल्पलाइन नहीं चलाई — जब उसके कारण लाखों छात्र बर्बाद हो रहे थे। एक छात्र ने सोशल मीडिया पर लिखा: “653 अंक लेकर भी मेरी रैंक 27,000 हो गई। पिछले साल इसी अंक पर रैंक 7,000 थी। यह घोटाला है।”
परीक्षा लीक और रद्द – अब पैटर्न बन गया
- अगर आप सोच रहे हैं कि यह कोई अपवाद है, तो इतिहास देखिए।
- NEET UG 2024 में बिहार पुलिस ने 13 लोगों को पेपर लीक के आरोप में गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया कि कम से कम 155 छात्रों को लीक का फायदा मिला। उस वर्ष 67 छात्रों ने पूर्ण अंक प्राप्त किए — जिनमें से कई एक ही परीक्षा केंद्र से थे। यह संयोग नहीं था, यह व्यवस्था थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया यह कहते हुए कि “व्यापक छेड़छाड़” के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं — जबकि पूरा देश देख रहा था कि Bluetooth डिवाइस से उत्तर भेजे गए, एक बहु-राज्यीय नेटवर्क ने पेपर बाँटा और 700 से अधिक छात्रों पर संदेह था।
- NEET 2025 में भी Telegram और WhatsApp पर पेपर वायरल होने के दावे आए, NTA ने फिर इनकार किया, और छात्रों को फिर से भरोसा दिलाया गया।
NTA: भरोसे की सबसे बड़ी दुकान, जो बंद होनी चाहिए
- राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को 2017 में इसीलिए बनाया गया था ताकि परीक्षाएँ पारदर्शी और निष्पक्ष हों। लेकिन आज NTA खुद सबसे बड़ी समस्या बन चुका है।
- NEET 2024 के परिणाम जब 4 जून को घोषित हुए, तब पूरे देश में छात्रों और शिक्षकों ने व्यापक धोखाधड़ी, पेपर लीक और NTA द्वारा अंकों में हेरफेर के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किए।
सरकार ने क्या किया? NTA के तत्कालीन अध्यक्ष को हटाया — लेकिन व्यवस्था को नहीं बदला।
बच्चों का क्या ?
- भारत में डॉक्टर बनना मध्यमवर्गीय परिवारों का सपना होता है। लेकिन जब यह व्यवस्था भ्रष्टाचार में डूबी हो, तो वह सपना जानलेवा बन जाता है।
- तेलंगाना की एक लड़की ने 2023 में NEET दिया, अच्छे नतीजे नहीं आए। उसने एक कोचिंग सेंटर जॉइन किया और 2024 में फिर प्रयास किया। 4 मई को घर लौटकर जब उसने उत्तर मिलाए और महसूस किया कि इस बार भी नहीं होगा — तो वह नहीं रही।
- एक RTI के जवाब में खुलासा हुआ कि पाँच वर्षों में 119 मेडिकल छात्रों ने आत्महत्या की और 1,000 से अधिक ने पढ़ाई छोड़ दी।
- 2022 में देश भर में 13,000 से अधिक छात्र मौतें दर्ज हुईं। NEET और JEE की तैयारी कर रहे बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य संकट तेजी से बढ़ रहा है।
क्या किसी मंत्री ने संसद में खड़े होकर इन 119 नामों को पढ़ा? नहीं। क्योंकि ये बच्चे वोट बैंक नहीं थे — ये सिर्फ आँकड़े थे।
कोचिंग माफिया और सरकार की मिलीभगत का सवाल
- राजस्थान के सीकर — जो देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब माना जाता है — वहाँ के एक कोचिंग-लिंक्ड करियर काउंसलर को SOG ने गिरफ्तार किया। महाराष्ट्र के लातूर में एक कोचिंग अकादमी से भी सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र के वीडियो वायरल हुए।
- यह महज संयोग नहीं है। पेपर लीक का धंधा एकाकी नहीं चलता — इसके लिए परीक्षा केंद्र, प्रिंटिंग प्रेस, कोचिंग नेटवर्क और प्रशासनिक संगठन — सबकी मिलीभगत चाहिए।
- SOG की जाँच में सामने आया कि WhatsApp पर भेजे गए प्रश्नों पर “Forwarded many times” का टैग था — यानी यह एक दो लोगों तक नहीं, बल्कि हजारों तक पहुँचा था।
फिर भी सरकार हर बार “isolated incident” कहकर पल्ला झाड़ लेती है।
सरकार के वादे बनाम जमीनी हकीकत
- मोदी सरकार ने 2020 में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)” लागू की — जिसमें परीक्षा सुधार के बड़े-बड़े वादे थे। लेकिन 2024 और 2026 के पेपर लीक ने साबित कर दिया कि NEP का ढाँचा सिर्फ कागज पर है।
- NTA ने NEET 2026 रद्द करते हुए कहा कि “परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता हुआ है” — लेकिन यही बात 2024 में भी कही गई थी। तब भी CBI जाँच हुई थी, तब भी सुधार के वादे हुए थे।
अगर सरकार वाकई गंभीर होती, तो —
- परीक्षा केंद्रों पर biometric और CCTV निगरानी अनिवार्य होती
- पेपर प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पूरी तरह डिजिटल और encrypted होता
- लीक करने वालों को 10 साल की सख्त सजा का कानून पहले ही बनाया जाता
- NTA का पूर्ण ऑडिट हर वर्ष होता
लेकिन इनमें से कुछ नहीं हुआ — क्योंकि यह व्यवस्था जिनके हाथ में है, उन्हीं का फायदा इस अराजकता में है।
यह परीक्षा का संकट नहीं, लोकतंत्र का संकट :
- जब एक गरीब किसान का बेटा रात-रात भर जाग कर NEET की तैयारी करता है और अमीर परिवार का बच्चा पैसे देकर पेपर खरीद लेता है — तो यह सिर्फ शिक्षा की विफलता नहीं है। यह संविधान में लिखे “समानता के अधिकार” की हत्या है।
- सरकार को सुनना होगा — CBI जाँच काफी नहीं है। NTA को भंग करना होगा, परीक्षा प्रणाली का पुनर्गठन करना होगा, और दोषियों को नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करना होगा जिसने यह माफिया पाला है।
वरना अगले साल फिर कोई 42 घंटे पहले पेपर वायरल होगा। फिर CBI जाँच होगी। और फिर सरकार कहेगी — “हम बहुत गंभीर हैं।”
