उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में अनुशासन की एक नई मिसाल कायम होने जा रही है। पुलिस मुख्यालय ने सोशल मीडिया पर रील्स बनाने और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने का फैसला किया है।
मुख्य बिंदु
- एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश ने सख्त आदेश जारी किया
- नियम उल्लंघनकर्ताओं की पहचान कर तत्काल विभागीय कार्रवाई होगी
- हर माह मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी
- संदिग्ध पोस्ट के URL का रिकॉर्ड रखा जाएगा
- पूरी निगरानी प्रणाली के लिए फुल-प्रूफ प्लान तैयार
क्या है पूरा मामला?
कई पुलिसकर्मी वर्दी पहनकर या ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया पर रील्स बनाते और शेयर करते पाए गए हैं। इनमें कुछ पोस्ट ऐसी भी रही हैं जो विभाग की छवि के लिए आपत्तिजनक मानी गई हैं। इस बढ़ती अनुशासनहीनता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने अब कड़ा रुख अख्तियार करने का फैसला किया है।
एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सोशल मीडिया पर अनुचित सामग्री पोस्ट करने वाले पुलिसकर्मियों को चिन्हित किया जाएगा और उनके खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
हर महीने देनी होगी रिपोर्ट
नए आदेश की खास बात यह है कि महज कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा जाएगा — बल्कि एक नियमित रिपोर्टिंग व्यवस्था भी लागू होगी। जिला और यूनिट स्तर के अधिकारी हर माह ऐसे मामलों की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे। इससे न केवल जवाबदेही सुनिश्चित होगी, बल्कि पूरे प्रदेश में एकसमान अनुशासन भी बना रहेगा।
पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आचरण से विभाग की गरिमा बनाए रखें। सोशल मीडिया पर अनुचित सामग्री न केवल विभाग की छवि खराब करती है, बल्कि जनता का विश्वास भी कमजोर करती है।
— पुलिस सूत्र, उत्तर प्रदेश
मुख्य प्रतिबंध और नियम
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ड्यूटी के दौरान नो सोशल मीडिया: पुलिसकर्मी आधिकारिक काम के दौरान व्यक्तिगत रूप से सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकेंगे।
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यूनिफॉर्म में रील बनाने पर रोक: ड्यूटी के समय वर्दी (यूनिफॉर्म) में रील या वीडियो बनाना, उन्हें पोस्ट करना या अपने पर्सनल अकाउंट से लाइव टेलीकास्ट करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
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कमाई करने पर पाबंदी: कोई भी पुलिसकर्मी सरकार की उचित अनुमति के बिना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए किसी भी तरह की कमाई (Earnings) नहीं कर सकता।
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प्रमोशन पर रोक: सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत, व्यावसायिक या किसी उत्पाद (Product) का प्रमोशन करने की अनुमति नहीं होगी।
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टिप्पणी करने पर मनाही: पुलिसकर्मी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने सहकर्मियों, वरिष्ठ अधिकारियों, सरकार, किसी भी राजनीतिक दल या राजनेता के खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक टिप्पणी या बयानबाजी नहीं कर सकते।
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अपराधियों से दूरी: असामाजिक और आपराधिक गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर दोस्त (Friend) बनाने या उन्हें फॉलो करने पर सख्त पाबंदी है।
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शिकायतों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग नहीं: सेवा से जुड़े मुद्दों या किसी भी समस्या के समाधान के लिए वीडियो बनाकर या बयान जारी कर सोशल मीडिया का सहारा लेने की अनुमति नहीं है।
क्या होगा उल्लंघनकर्ताओं के साथ?
जो पुलिसकर्मी आदेश का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सीधे विभागीय कार्रवाई होगी। इसमें निलंबन, वेतन कटौती या अन्य दंडात्मक उपाय शामिल हो सकते हैं। URL रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि सबूत मिटाए न जा सकें और कार्रवाई पारदर्शी तरीके से हो।
विभाग के इस कदम को सोशल मीडिया के युग में पुलिस अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब देखना यह है कि इस आदेश का कितनी सख्ती से पालन होता है।
