मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि योजना के दायरे में आने वाले किसी व्यक्ति के माता-पिता दोनों की अलग-अलग कृषि दुर्घटनाओं में मृत्यु होती है, तो दोनों मामलों में मुआवजे का दावा किया जा सकता है। एक व्यक्ति की मृत्यु पर ₹5 लाख का मुआवजा मिलने के बाद दूसरे की मृत्यु के लिए किए गए दावे को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
यह आदेश न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने सीतापुर निवासी रामशंकर शुक्ल की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
माता और पिता दोनों की हुई थी मौत
मामला संजय कुमार और उनकी पत्नी मायादेवी से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, 22 सितंबर 2023 को सड़क दुर्घटना में मायादेवी घायल हुई थीं और उसी दिन उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके कुछ दिन बाद 27 सितंबर को संजय कुमार की भी कृषि कार्य के दौरान दम तोड़ने से मृत्यु हो गई।
दोनों घटनाओं में मृतक एक-दूसरे के निकट संबंधी यानी पति-पत्नी थे। परिवार की ओर से मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत दोनों मौतों के लिए ₹5-₹5 लाख के मुआवजे का दावा किया गया।
दूसरे दावे को किया गया था खारिज
जिलाधिकारी ने पिता की मृत्यु के संबंध में ₹5 लाख का मुआवजा देने का दावा स्वीकार कर भुगतान कर दिया था। हालांकि, मां की मृत्यु के संबंध में किए गए दूसरे दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि योजना के तहत एक ही परिवार में दूसरे सदस्य की मृत्यु पर अलग से मुआवजा नहीं दिया जा सकता।
इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि योजना में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर अलग-अलग घटनाओं में हुई मौतों के लिए मुआवजे के दावे पर रोक लगाई जा सके।
अदालत ने माना कि यदि योजना की पात्रता शर्तें पूरी होती हैं तो अलग-अलग कृषि दुर्घटनाओं में हुई दो मौतों के मामलों में अलग-अलग मुआवजे का दावा किया जा सकता है।
पांच लाख से अधिक मुआवजा नहीं, लेकिन अलग-अलग मामलों में दावा संभव
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि विभिन्न योजनाओं से मिलने वाली सहायता को मिलाकर ₹5 लाख से अधिक की राशि नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि योजना के प्रावधानों में जब तक स्पष्ट रोक नहीं है, तब तक अलग-अलग पात्र व्यक्तियों की अलग-अलग मृत्यु के मामलों में मुआवजा देने से रोक नहीं लगाई जा सकती।
कोर्ट ने सरकार की ओर से योजना की जो व्याख्या पेश की गई थी, उसे स्वीकार नहीं किया और मामले में नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।
फैसले का क्या मतलब है?
इस आदेश का सीधा संबंध मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत अलग-अलग दुर्घटनाओं में हुई मौतों के मुआवजे से है। कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार, किसी एक पात्र व्यक्ति की मृत्यु पर मुआवजा मिलने के बाद उसी परिवार के दूसरे पात्र व्यक्ति की अलग घटना में मृत्यु होने पर केवल पहले मुआवजे का भुगतान हो जाने के आधार पर दूसरे दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।
