उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बड़ी खबर है। अब निपुण परीक्षा में भी छात्रों को रिपोर्ट कार्ड मिलेगा। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा पांच तक के छात्रों की निपुण परीक्षा का परिणाम अभिभावकों को सौंपा जाएगा। खास बात यह है कि परीक्षा परिणाम ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगा, जिससे अभिभावक कभी भी अपने बच्चे की प्रगति देख सकेंगे। नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित निपुण मूल्यांकन को लेकर तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं।
किन विषयों में होगी दक्षता जांच
भाषा, विज्ञान, गणित और पर्यावरण विज्ञान जैसे विषयों में छात्रों की दक्षता जांचने के लिए निपुण परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। छात्रों को आधारभूत ज्ञान है या नहीं, इसका आकलन करने के लिए डीएलएड (D.El.Ed) के प्रशिक्षु विद्यालयों में जाएंगे और मूल्यांकन प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।
जो छात्र 75 प्रतिशत तक प्रश्नों का सही उत्तर देंगे, उन्हें “निपुण” घोषित किया जाएगा। छात्रों के अभिभावकों को निपुण परीक्षा का परिणाम सौंपा जाएगा, जिससे वे यह समझ सकेंगे कि उनका बच्चा किन-किन विषयों में कमजोर है। इसके बाद विद्यालय में प्रत्येक छात्र की दक्षता की जांच की जाएगी और परिणाम में सुधार के लिए विशेष चर्चा भी की जाएगी।
स्कूली शिक्षा महानिदेशालय परीक्षा परिणाम को पोर्टल पर भी ऑनलाइन अपलोड करेगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और डेटा आसानी से उपलब्ध हो सके।
मुख्य बिंदु
- कक्षा पांच तक के छात्रों का मूल्यांकन किया जाएगा
- रिपोर्ट कार्ड ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया जाएगा
शिक्षक पुरस्कार: बतानी होगी बढ़ी हुई छात्र संख्या
खबर में एक और अहम पहलू शिक्षक पुरस्कार से जुड़ा है। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के अध्यापकों को शिक्षक पुरस्कार पाने के लिए यह बताना होगा कि उन्होंने अपने विद्यालय में छात्र संख्या कितनी बढ़ाई है। इसके साथ ही नवाचार (इनोवेशन) और शिक्षण तकनीकी के इस्तेमाल को भी आंका जाएगा।
इसके लिए 13 से 19 अगस्त तक साक्षात्कार (इंटरव्यू) की प्रक्रिया आयोजित होगी। पीपीटी (PPT) की मदद से शिक्षक पांच-पांच मिनट में अपने श्रेष्ठ कार्यों के बारे में जानकारी देंगे और विशेषज्ञों के सवालों का जवाब भी देंगे।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए विभिन्न जिलों के चयनित शिक्षकों का साक्षात्कार लिया जाएगा।
श्रेष्ठ शिक्षकों के चयन के लिए क्या होगा आधार
पुरस्कार की दौड़ में शामिल शिक्षकों को यह बताना होगा कि वे किस तरह की शिक्षण तकनीकी का प्रयोग कर रहे हैं। नवाचार के साथ-साथ निम्नलिखित बिंदुओं पर भी आकलन होगा:
- विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति
- विद्यालय में नामांकन बढ़ाने के प्रयास और उनका प्रभाव
श्रेष्ठ शिक्षकों के चयन के लिए अलग-अलग दिन, दो-दो पालियों में साक्षात्कार लिया जाएगा। इसका कार्यक्रम पहले ही जारी कर दिया गया है, जिससे प्रत्येक विद्यालय की स्थिति की जांच हो सके। अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के शिक्षकों को हर वर्ष की तरह इस बार भी सम्मानित किया जाएगा।
शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) के प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे डीएलएड प्रशिक्षुओं के सहयोग से यह पूरी प्रक्रिया संचालित कराने में मदद करें।
परिषदीय स्कूलों के दिव्यांग छात्र जाएंगे शैक्षिक भ्रमण पर
खबर का तीसरा महत्वपूर्ण हिस्सा दिव्यांग छात्रों से जुड़ी पहल है। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के दिव्यांग छात्रों को भी शैक्षिक भ्रमण (एजुकेशनल टूर) पर भेजा जाएगा। इसके लिए 50-50 दिव्यांग छात्रों का बैच बनाकर उन्हें भ्रमण पर भेजा जाएगा।
प्रत्येक जिले को इस शैक्षिक भ्रमण के लिए डेढ़-डेढ़ लाख रुपये (1.5 लाख रुपये) की धनराशि भेजी गई है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की ओर से सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हर जिले में तीन-तीन शैक्षिक भ्रमण आयोजित किए जाएं।
भ्रमण पर जाने वाले दिव्यांग छात्रों को निम्न सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी:
- भोजन और जलपान
- टी-शर्ट, कैप सहित अन्य सामग्री
- साथ में दो महिला केयर टेकर भी रहेंगी
प्रति शैक्षिक भ्रमण पर 50-50 हजार रुपये की दर से खर्च किया जाएगा, यानी तीन एक्सपोजर विजिट में कुल 1.50 लाख रुपये प्रति जिला खर्च किए जाएंगे।
दिव्यांगता दिवस पर स्कूलों में विशेष कार्यक्रम
आगामी 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगता दिवस के अवसर पर स्कूलों में खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक जिले को एक-एक लाख रुपये की धनराशि पहले ही भेजी जा चुकी है।
दिव्यांग छात्रों के लिए ब्लॉक स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। साथ ही एक गोष्ठी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें विद्यालय के ऐसे पूर्व दिव्यांग छात्र, जो किसी मुकाम पर पहुंच चुके हैं, उन्हें आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे अपने अनुभव वर्तमान छात्रों के साथ साझा कर सकें।
उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। निपुण मूल्यांकन की रिपोर्ट कार्ड व्यवस्था जहां छात्रों की वास्तविक शैक्षिक स्थिति को अभिभावकों तक पहुंचाएगी, वहीं शिक्षक पुरस्कार और दिव्यांग छात्रों के लिए शैक्षिक भ्रमण जैसी पहलें शिक्षकों को प्रोत्साहित करने और दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेंगी।
