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Home»राज्य»उत्तरप्रदेश»उत्तर प्रदेश से खाड़ी देशों को निर्यात 56 फीसदी बढ़ा
उत्तरप्रदेश

उत्तर प्रदेश से खाड़ी देशों को निर्यात 56 फीसदी बढ़ा

News DriftBy News DriftAugust 19, 2026No Comments5 Mins Read
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उत्तर प्रदेश से खाड़ी देशों को निर्यात 56 फीसदी बढ़ा
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मध्य पूर्व एशिया में पिछले कुछ महीनों से चल रही राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता का सीधा असर उत्तर प्रदेश के निर्यात कारोबार पर पड़ा था, लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे पटरी पर लौटती दिख रही है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के साथ यूपी के कारोबारी रिश्ते तेज़ी से सुधरने लगे हैं। इस दौरान राज्य ने न केवल नए बाज़ार तलाशे, बल्कि नए देशों के साथ कारोबारी संबंध भी मज़बूत किए, और वित्त वर्ष की पहली छमाही का नतीजा कुल मिलाकर सकारात्मक रहा।

कैसे लगा था कारोबार को झटका

ईरान युद्ध के बाद जनवरी से मार्च 2026 के बीच खाड़ी देशों को यूपी के निर्यात में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। जनवरी-मार्च 2025 की तुलना में मार्च 2026 तक निर्यात में 68.4 प्रतिशत की भारी गिरावट आई थी। युद्ध जितना लंबा खिंचता गया, कारोबार पर असर उतना ही गहरा होता गया — इन कारोबारी महीनों के दौरान करीब 1,929 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

देशवार आंकड़े देखें तो झटके की तस्वीर साफ हो जाती है:

देश जनवरी-मार्च 2025 मार्च 2026 बदलाव (%)
यूएई 1,865 73 -75.0
सऊदी अरब 578 50 -39.0
ओमान 99 33 -66.7
बहरीन 140 6 -95.7
कतर 87 19 -78.2
कुवैत 53 12 -77.4
कुल 2,822 893 -68.4

बहरीन को होने वाले निर्यात में सबसे भीषण गिरावट (-95.7%) दर्ज हुई, वहीं यूएई — जो यूपी के लिए खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा बाज़ार है — वहां भी 75 प्रतिशत तक का नुकसान झेलना पड़ा।

अब सुधार की रफ्तार

लेकिन जून 2026 आते-आते हालात में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। जनवरी-मार्च के दौर में जहां 68.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी, वहीं 30 जून तक निर्यात में 56 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि यह सुधार इतना पर्याप्त नहीं रहा कि पिछले साल के स्तर की भरपाई हो सके — पिछले वर्ष की तुलना में अब भी कुल निर्यात में 12 प्रतिशत की गिरावट बनी हुई है।

जनवरी-जून की छमाही (आधे साल) का तुलनात्मक आंकड़ा इस प्रकार है:

देश जनवरी-जून 2025 जनवरी-जून 2026 बदलाव (%)
यूएई 7,085 5,380 -24.1
सऊदी अरब 2,345 2,734 +16.6
ओमान 362 484 +33.7
बहरीन 193 239 +47.7
कतर 313 239 -23.6
कुवैत 234 145 -38.0
कुल 10,532 9,267 -12.0

इन आंकड़ों में एक दिलचस्प बात यह है कि हर देश की रिकवरी एक जैसी नहीं रही। जहां यूएई, कतर और कुवैत अब भी पिछले साल के मुकाबले नुकसान में हैं, वहीं सऊदी अरब (+16.6%), ओमान (+33.7%) और बहरीन (+47.7%) ने न सिर्फ अपने नुकसान की भरपाई कर ली, बल्कि पिछले साल से भी बेहतर प्रदर्शन दिखाया है। इससे संकेत मिलता है कि यूपी के निर्यातकों ने संकट के दौरान अपने कारोबारी ध्यान को रणनीतिक रूप से इन अपेक्षाकृत स्थिर बाज़ारों की ओर मोड़ा।

निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाली तिमाही में यह 12 प्रतिशत का गैप भी भर जाएगा और आखिरी तिमाही तक यूपी पिछले साल के आंकड़ों से भी आगे निकल जाएगा। अधिकारियों का यह भरोसा इस तथ्य पर टिका है कि जीसीसी में शामिल बहरीन, कतर, कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और ओमान — इन सभी देशों से यूपी के सीधे कारोबारी रिश्ते हैं, जो लंबी अवधि में स्थिरता की गारंटी देते हैं।

किन उत्पादों की मांग बढ़ी, किसकी घटी

निर्यात में हुए बदलाव का असर अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों पर एक जैसा नहीं रहा — कुछ उत्पादों ने ज़बरदस्त बढ़त दर्ज की तो कुछ को भारी नुकसान झेलना पड़ा:

उत्पाद जनवरी-जून 2025 जनवरी-जून 2026 बदलाव (%)
इलेक्ट्रॉनिक्स मशीनरी 947 1,801 +90.18
मीट 2,398 935 +22.39
कपड़े 878 893 +1.71
स्टोन-मेटल्स 2,334 554 -76.26
न्यूक्लियर उत्पाद 567 442 -22.05
सिल्क 455 317 -30.33
अनाज 334 239 -28.44
आयरन-स्टील 331 231 -30.21
कुल 7,244 7,411 +2.731

इस सूची में सबसे बड़ी कहानी इलेक्ट्रॉनिक्स मशीनरी की है, जिसमें करीब 90 प्रतिशत की भारी बढ़त दर्ज हुई — यह दिखाता है कि खाड़ी देशों में यूपी के तकनीकी और मशीनरी उत्पादों की मांग तेज़ी से बढ़ी है। इसके उलट, स्टोन-मेटल्स (पत्थर व धातु उत्पाद) की मांग में सबसे बड़ी गिरावट (-76.26%) आई, जो निर्माण और भारी उद्योग क्षेत्र में खाड़ी देशों की सतर्क मांग को दर्शाता है। सिल्क, अनाज और आयरन-स्टील जैसे पारंपरिक निर्यात उत्पादों में भी 22 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।

कुल मिलाकर उत्पाद श्रेणियों में मामूली 2.7 प्रतिशत की बढ़त ही दर्ज हो सकी, जो दिखाता है कि जहां कुछ नए क्षेत्रों (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स) में तेज़ी से मांग बढ़ी है, वहीं पारंपरिक निर्यात क्षेत्र अभी भी संकट के असर से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।

आगे की राह

कुल मिलाकर तस्वीर यह बनती है कि मध्य पूर्व में युद्ध और अस्थिरता के चलते यूपी के निर्यात कारोबार को शुरुआती महीनों में गहरा झटका लगा, लेकिन बीते तीन महीनों में हालात में साफ सुधार देखने को मिला है। हालांकि 12 प्रतिशत का सालाना गैप अभी बाकी है, अधिकारियों की उम्मीद और सऊदी अरब, ओमान, बहरीन जैसे बाज़ारों में मिली सफलता यह संकेत देती है कि आने वाली तिमाहियों में यूपी अपने निर्यात कारोबार को पूरी तरह पटरी पर ला सकता है — बशर्ते खाड़ी क्षेत्र की स्थिति आगे और स्थिर बनी रहे।

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