अगर आपकी गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस खत्म हो चुका है या आपने कभी करवाया ही नहीं, तो जल्द ही आपको पेट्रोल पंप पर ईंधन मिलना मुश्किल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, बीमा नियामक संस्था IRDA और सड़क परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वे एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करें, जिसके तहत बिना वैध वाहन बीमा वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से मना किया जा सके। खास बात यह है कि कोर्ट ने कहा है कि इस व्यवस्था की शुरुआत दिल्ली से की जा सकती है।
मामला शुरू कहां से हुआ?
इस पूरे मामले की जड़ें एक सड़क हादसे से जुड़ी हैं। तिरुपति के रहने वाले टी. रामू अपनी मारुति 800 कार से अपने गांव लौट रहे थे, तभी एक लापरवाह लॉरी ड्राइवर ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी, जिसमें उनकी मौत हो गई। परिवार ने मुआवजे के लिए मोटर व्हीकल ट्रिब्यूनल का रुख किया, लेकिन बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया। बाद में हाईकोर्ट ने परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया और मुआवजा देने का आदेश दिया। यह मामला अपील में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, और सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि देश में सड़क सुरक्षा और वाहन बीमा को लेकर स्थिति बेहद चिंताजनक है — इसी के बाद कोर्ट ने बीमा और सड़क सुरक्षा से जुड़े व्यापक निर्देश जारी करने शुरू किए।
आदेश आने की असली वजह — आंकड़े डराने वाले हैं
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने जो आंकड़े रखे गए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। देशभर में करीब 30.48 करोड़ रजिस्टर्ड वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ यानी करीब 56 प्रतिशत गाड़ियां बिना किसी वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रही हैं। यानी आधे से ज्यादा वाहन बिना बीमा के हैं, जो हादसे की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा दिलाने में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं।
मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 146 के तहत हर वाहन के लिए वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है, ताकि सड़क हादसे में किसी तीसरे व्यक्ति को हुए नुकसान की भरपाई हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है।
आदेश में क्या कहा गया है?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कोई अनिवार्य आदेश (mandamus) नहीं, बल्कि एक सुझाव है, जिसे लागू करने की जिम्मेदारी अब केंद्र सरकार, IRDA और पेट्रोलियम मंत्रालय पर छोड़ी गई है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- IRDA और सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करें, जिसमें पेट्रोल पंप पर ईंधन देने की सुविधा गाड़ी के वैध बीमा स्टेटस से जोड़ी जाए।
- बिना वैध बीमा वाली गाड़ी को तब तक ईंधन न दिया जाए, जब तक वह बीमा न करवा ले।
- इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें ‘इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ और ‘VAHAN पोर्टल’ के डेटा से जोड़ा जाएगा।
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि उसे इस सुझाव पर सैद्धांतिक रूप से कोई आपत्ति नहीं है।
हाईवे और पुलिस स्तर पर भी सख्ती
सिर्फ पेट्रोल पंप ही नहीं, कोर्ट ने सड़क सुरक्षा की निगरानी को और मजबूत करने के लिए कई अन्य निर्देश भी दिए हैं:
- कुछ चुनिंदा नेशनल हाईवे कॉरिडोर पर एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट लागू किया जाए, जहां परंपरागत टोल प्लाजा पर रुकने के बजाय वाहनों की स्वचालित पहचान (ऑटोमैटिक डिटेक्शन) की व्यवस्था हो, जिससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें भी कम हों।
- राज्य पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप दिए जाएं, जो इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और VAHAN पोर्टल से जुड़े हों, ताकि सड़क पर ही रियल टाइम में किसी भी गाड़ी की बीमा स्थिति जांची जा सके।
- हाईवे पर पहले से लगे ANPR कैमरों का इस्तेमाल तेज रफ्तार, रेड लाइट जंप और गलत दिशा में गाड़ी चलाने जैसे उल्लंघनों के साथ-साथ बिना बीमा वाले वाहनों के लिए ऑटोमैटिक ई-चालान जारी करने में भी हो।
बीमा पॉलिसी में भी होगा बदलाव
कोर्ट ने निजी वाहनों के लिए बीमा को चार स्तरों में बांटने का सुझाव भी दिया है, ताकि ग्राहकों को साफ-साफ पता चले कि वे किस तरह का कवर ले रहे हैं:
- सिर्फ थर्ड-पार्टी पॉलिसी — कानूनन अनिवार्य न्यूनतम कवर।
- गाड़ी में सवार लोगों के लिए वैकल्पिक अतिरिक्त कवर — अतिरिक्त प्रीमियम पर उपलब्ध ऐड-ऑन।
- मालिक, ड्राइवर और सवारियों के लिए पर्सनल एक्सीडेंट कवर — मौत या स्थायी विकलांगता की स्थिति में सुरक्षा।
- ओन डैमेज कवर — खुद अपनी गाड़ी को हुए नुकसान की भरपाई।
साथ ही, बीमा खरीदते समय हर ग्राहक (ऑनलाइन हो या ऑफलाइन) को एक ‘कस्टमर ऑप्शन फॉर्म’ दिया जाएगा, जिसमें चेकबॉक्स के जरिए वे अपनी जरूरत के हिसाब से ऐड-ऑन कवर चुन सकेंगे।
नई गाड़ियों के लिए बीमा अवधि भी बढ़ेगी
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नई कारों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि चार साल और नई दोपहिया गाड़ियों के लिए छह साल तक बढ़ाई जाए, ताकि लोग बार-बार रिन्यू कराना भूलकर बीमा-रहित न रह जाएं। IRDA को इस बारे में जल्द जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया है।
अभी आगे क्या होगा?
केंद्र सरकार से इस पूरी योजना पर एक ठोस प्रस्ताव, समय-सीमा के साथ, मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई तय है, जिसमें केंद्र को अपनी कार्ययोजना कोर्ट के सामने रखनी होगी। यानी अभी यह व्यवस्था देशभर में तुरंत लागू नहीं हुई है — पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे सीमित इलाकों (संभावित रूप से दिल्ली) में आजमाया जाएगा, और नतीजों के आधार पर आगे इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।
आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?
अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो हर वाहन मालिक के लिए वैध थर्ड-पार्टी बीमा रखना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो जाएगा। बीमा न होने पर सिर्फ जुर्माने का खतरा नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल पंप पर ईंधन मिलना भी मुश्किल हो सकता है। इसलिए सलाह यही है कि गाड़ी का बीमा समय पर चेक करें और उसे रिन्यू कराते रहें, ताकि आगे चलकर किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
