उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में एक ऐसा मामला सामने आया है जो व्यवस्था के भीतर की सड़ांध और उसे उजागर करने वालों की नियति, दोनों पर एक साथ सवाल खड़े करता है। लखनऊ में पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला के निलंबन ने विभाग में हलचल पैदा कर दी है।
कौन हैं सुनील कुमार शुक्ला?
मूल रूप से अमेठी जनपद के गौरीगंज के रहने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला साल 2015 बैच के कांस्टेबल हैं और लखनऊ की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लगातार तीसरा वीडियो जारी कर पुलिस विभाग के भीतर कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।
क्या था मामला — हर सिपाही से ₹2000 की वसूली का आरोप
सुनील कुमार शुक्ला ने बीते दिनों सोशल मीडिया पर लगातार तीन वीडियो पोस्ट किए। इन वीडियो रील में उन्होंने रिजर्व पुलिस लाइन के गणना कार्यालय के प्रभारी और आरआई (RI) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। सुनील का दावा था कि पुलिस लाइन में तैनात हर सिपाही से ड्यूटी लगाने के नाम पर हर महीने ₹2,000 की अवैध वसूली की जाती है।
सुनील यहीं नहीं रुके। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि पुलिस विभाग में भी होमगार्ड विभाग की तरह भ्रष्टाचार के खिलाफ कमेटी बनाई जाए, तभी व्यवस्था सुधर सकती है।
महिला हेड कांस्टेबल ने भी उठाई थी आवाज
इसी मामले में नाका कोतवाली में तैनात और वर्तमान में कोर्ट सुरक्षा ड्यूटी संभाल रही 2011 बैच की हेड कांस्टेबल नीतू सिंह ने भी सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने भी नियमों के विपरीत जाकर गणना कार्यालय प्रभारी और आरआई के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की और वीडियो पोस्ट कर दिया।
विभाग की सफाई और जांच
वीडियो वायरल होने के बाद विभाग की छवि दांव पर लग गई। लखनऊ पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बयान जारी कर पुष्टि की कि भ्रष्टाचार के आरोपों की गहन जांच एक उच्च-स्तरीय समिति द्वारा की जा रही है, जिसमें पुलिस लाइंस के पर्यवेक्षण में शामिल कोई भी अधिकारी शामिल नहीं है। हालांकि कांस्टेबल ने यह भी आरोप लगाया था कि जिन व्यक्तियों पर उन्होंने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, उन्हीं को इस मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया था।
आरोपी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया और उनकी जगह अन्य कर्मियों को तैनात किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह प्रशासनिक कार्रवाई जांच को किसी भी तरह से प्रभावित होने से रोकने के लिए की गई है।
आरोप लगाने वाले पर ही गिरी गाज — दोनों सस्पेंड
लखनऊ कमिश्नरेट ने सोशल मीडिया पॉलिसी तोड़ने के आरोप में सिपाही सुनील कुमार शुक्ला और महिला हेड कांस्टेबल नीतू सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। दोनों पुलिसकर्मियों द्वारा सार्वजनिक रूप से विभाग की छवि धूमिल करने को घोर अनुशासनहीनता माना गया।
एसीपी पुलिस लाइन सौम्या पांडे ने बताया कि यह निलंबन आदेश डीसीपी मुख्यालय के निर्देश पर जारी किया गया है। लखनऊ के पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर ने साफ किया कि यूपी पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी के तहत वर्दी में या सेवा में रहते हुए इस तरह के कृत्य पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। विभाग अपनी अंदरूनी समस्याओं के समाधान के लिए उचित माध्यम देता है, लेकिन अनुशासन तोड़ने वालों पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आगे भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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राजनीतिक रंग भी लिया मामले ने
सिपाही का मामला राजनीतिक रंग भी लेता दिखा। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी शुक्ला का वीडियो साझा करते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा और इसे भ्रष्टाचार तथा उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वालों की लड़ाई बताया।
सवाल जो उठते हैं
यह पूरा प्रकरण कई अहम सवाल छोड़ जाता है। क्या विभागीय शिकायत के आधिकारिक रास्ते इतने बंद हो चुके हैं कि एक सिपाही को सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा? क्या आरोप की जांच और आरोप लगाने वाले का निलंबन एक साथ न्यायसंगत है? यह मामला पुलिस महकमे में पारदर्शिता और आंतरिक शिकायत तंत्र की कमजोरी की ओर ध्यान दिलाता है।
फिलहाल दोनों पुलिसकर्मी निलंबित हैं और जांच जारी है। मामले का अगला मोड़ क्या होगा, यह देखना अभी बाकी है।
