लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार दोपहर एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग से 15 युवाओं की जान गई, 7 घायल; मृतकों की उम्र 20 से 24 वर्ष के बीच।
क्या हुआ — पूरी घटना
सोमवार, 22 जून 2026 को दोपहर करीब 2:15 से 3:00 बजे के बीच अलीगंज के उषा मेहता मार्ग, पुरनिया/सेक्टर-D स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में आग लग गई। ग्राउंड फ्लोर पर Drools Aliganj पेट शॉप थी। पहली और दूसरी मंजिल पर क्रमशः “Learning Space” (लाइब्रेरी व कोचिंग) और “Head Hopper Studio” (3D आर्ट प्रोडक्शन व गेमिंग सॉफ्टवेयर) संचालित थे।
माना जा रहा है कि आग ग्राउंड फ्लोर की पेट शॉप या उसके आसपास से शॉर्ट सर्किट/इलेक्ट्रिकल फॉल्ट के कारण शुरू हुई। कुछ ही मिनटों में घुटन भरे काले धुएं और लपटों ने पूरी इमारत को जकड़ लिया। ऊपरी मंजिल पर बैठे छात्रों और कर्मचारियों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं था।
बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इमारत में कोई औपचारिक कोचिंग सेंटर या पंजीकृत लाइब्रेरी नहीं थी — ऊपर गेमिंग जोन व स्टूडियो था जहाँ युवा काम करते थे।
मृत और घायल
अब तक 15 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में 12 पुरुष और 3 महिलाएं हैं। सभी 20 से 24 साल के युवा थे — अपने भविष्य को संवारने आए थे। 7 घायलों को KGMU ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। 20 से अधिक लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया।
शासन और प्रशासन की लापरवाही
यह हादसा सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्थागत लापरवाही का नतीजा है। कई सवाल उठ रहे हैं:
फायर NOC और बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट: अभी तक मिली जानकारी के अनुसार इमारत के पास वैध फायर NOC नहीं थी और न ही LDA से बिल्डिंग का नक्शा पास था , अधिकारियों के बस इतने बयान से पल्ला झाड़ लेना कितना सही है। फरवरी 2025 की एक रिपोर्ट में अलीगंज सहित कई संस्थानों को नोटिस जारी और लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई थी — लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।
ऊपरी मंजिल पर इमरजेंसी एग्जिट की कमी, एकल प्रवेश-निकास द्वार, और अपर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण — इन सभी ने मिलकर जानलेवा स्थिति बनाई।
रिहायशी इलाके में व्यावसायिक खेल: शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनके मुताबिक यह पूरी बिल्डिंग पूरी तरह अवैध बताई जा रही है. रिहायशी कॉलोनी (रेजिडेंशियल एरिया) होने के कारण इस बिल्डिंग में कमर्शियल एक्टिविटी के लिए नक्शा पास होने का कोई प्रावधान ही नहीं है. इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर सबसे नीचे पेट शॉप, ऊपर एनिमेशन सेंटर और गेमिंग जोन चलाया जा रहा था. इतना ही नहीं, इसी अवैध बिल्डिंग में एक कैंटीन और लाइब्रेरी का भी धड़ल्ले से संचालन किया जा रहा था।
सरकार का रुख — CM योगी का बयान
“लखनऊ में अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी जो नजीर बनेगी।”
— मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
सीएम योगी घटना की जानकारी मिलते ही अलीगढ़ का पूरा कार्यक्रम बीच में रद्द करके लखनऊ लौटे। उन्होंने DGP राजीव कृष्ण और ACS Home (अपर मुख्य सचिव, गृह) संजय प्रसाद को तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। सीएम ने घटनास्थल और KGMU ट्रॉमा सेंटर का दौरा किया, घायलों और मृतकों के परिजनों से मिले।
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5 – 5 लाख रुपये और घायलों को 50- 50 हजार रुपये देने की घोषणा की।
डिप्टी CM ब्रजेश पाठक — भावुक हुए, कहा
“मैंने अपनी आंखों के सामने मासूमों की लाशें निकलती देखी हैं, यह मंजर बेहद गंभीर और असहनीय है। सरकार की पहली प्राथमिकता घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।”
— उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (कैमरे के सामने रो पड़े)
पाठक ने बताया कि बचाव दल ने इमारत की पिछली दीवार तोड़कर अंदर प्रवेश किया, कमरे-दर-कमरा और वॉशरूम तक सर्च किया। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया है और कोई और व्यक्ति अंदर नहीं फंसा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — मुआवजे का ऐलान
“उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आग लगने की घटना में हुई मौतों से बहुत दुख हुआ है। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं। घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हों।”
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PMO, 22 जून 2026)
PMNRF (प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष) से राहत:
✦ प्रत्येक मृतक के परिजनों को — ₹2,00,000
✦ प्रत्येक घायल को — ₹50,000
बड़े सवाल — आगे क्या?
यह हादसा सिर्फ एक इमारत में लगी आग नहीं है — यह पूरे प्रदेश के कोचिंग हब, गेमिंग जोन, और व्यावसायिक इमारतों में व्याप्त लापरवाही का आईना है।
• फायर NOC के बिना इमारत चलती रही — जिम्मेदार कौन?
• LDA और फायर विभाग की नियमित जांच क्यों नहीं हुई?
• एकल निकास वाले भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक क्यों नहीं?
• 2025 में नोटिस के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
इसके बावजूद एक बात स्पष्ट है कि लखनऊ के रिहायशी इलाकों और कमर्शियल बिल्डिंग्स में चल रहे कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी मानकों, इमरजेंसी एग्जिट और एनओसी की घोर अनदेखी का यह एक और बेहद दर्दनाक नतीजा है। इस घटना ने एक बार फिर पूरे प्रदेश के कोचिंग संचालकों और प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। अब आवश्यकता है की जांच कर दोषियों के खिलाफ शख्त कार्यवाही हो जिसमे बिल्डिंग के मालिक ही नहीं , कोचिंग संचालक और जिम्मेदार अधिकारी भी शामिल हों।
