ग्लास्गो राष्ट्र्मंडल खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, भारत ने 39 पदक (13 गोल्ड, 17 सिल्वर, 9 ब्रॉन्ज़) के साथ पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। यह भारत के लिए एक बेहतरीन उपलब्धि रही। महिला खिलाडियों ने भारत द्वारा जीते गए कुल स्वर्ण पदकों में से लगभग 61 % जीतकर पूरे विश्व में भारत की उभरती नारी शक्ति का संखनाद किया।
भारत के हर पदक विजेता की कहानी:
गोल्ड मेडल विजेता (13)
बॉक्सिंग (7 गोल्ड)
- प्रीति पवार (महिला 54 किग्रा) — भारतीय सेना में सीधे नायब सूबेदार नियुक्त होने वाली पहली महिला एथलीट। फाइनल में कनाडा की स्कारलेट सवाना डेलगाडो को हराया।
- जैस्मीन लम्बोरिया (महिला 57 किग्रा) — रिकॉर्डधारी विश्व चैंपियन ने डिफेंडिंग चैंपियन उत्तरी आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को हराकर गोल्ड जीता; यह उनका दूसरा CWG पदक है (बर्मिंघम में ब्रॉन्ज़ जीता था)।
- साक्षी चौधरी (महिला 51 किग्रा) — फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट की 68 मुकाबलों की अजेय लकीर को तोड़ा। ट्रायल्स में उन्होंने पूर्व विश्व चैंपियन निखत ज़रीन और मीनाक्षी हुड्डा को हराकर टीम में जगह बनाई थी।
- प्रिया घांघस (महिला 60 किग्रा) — कनाडा की मैरी-बैथूल अल-अहमदी को कड़े मुकाबले में हराया।

- अरुंधति चौधरी (महिला 70 किग्रा) — विश्व कांस्य पदक विजेता इंग्लैंड की चैंटेल रीड को हराया।
- सचिन सिवाच (पुरुष 60 किग्रा, हरियाणा के भिवानी से) — नामीबिया के त्रयगेन मॉर्निंग एंडेवेलो को 3-2 के करीबी स्प्लिट फैसले में हराया; कैप्टन हवा सिंह अकादमी, भिवानी में प्रशिक्षित।

- अंकुश पंघाल (पुरुष 80 किग्रा) — इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को 4-1 से हराया, बेदाग अभियान के साथ।
जूडो (2 गोल्ड)
- अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा) — कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय जूडोका बनीं। उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) के पद पर तैनात अस्मिता 2021 में पुलिस सेवा में चुनी गई थीं और नौकरी की ज़िम्मेदारियों के साथ खेल की तैयारी जारी रखी।
- हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा) — ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज़ को हराकर भारत के पहले पुरुष जूडो गोल्ड मेडलिस्ट बने; फाइनल के आखिरी मिनट में शानदार हाफ-आर्म थ्रो से “वाज़ा-आरी” हासिल किया।
वेटलिफ्टिंग (1 गोल्ड)
- मीराबाई चानू (महिला 48 किग्रा) — लगातार तीसरा CWG गोल्ड जीतकर हैट्रिक पूरी की, ऐसा करने वाली भारत की दूसरी वेटलिफ्टर बनीं। ओलंपिक रजत विजेता चानू ने उद्घाटन समारोह में ध्वजवाहक की भूमिका भी निभाई।
पैरा-एथलेटिक्स (3 गोल्ड)
- शर्मिला (महिला F57 शॉट पुट) — इस स्पर्धा में पहला स्थान हासिल करने वाली पहली भारतीय बनीं।
- सोमन राणा (पुरुष F57 शॉट पुट) — सीज़न-बेस्ट 13.40 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड जीता; भारत ने इस स्पर्धा में 1-2 फिनिश की (शुभम जुयाल ने सिल्वर जीता)।
- (तीसरा पैरा-एथलेटिक्स गोल्ड) — पुरुषों की 100मी T47 स्पर्धा में डबल पोडियम फिनिश का हिस्सा।
🥈 सिल्वर मेडल विजेता (17)
- नीरज चोपड़ा (पुरुष जावेलिन थ्रो) — चोट के कारण बर्मिंघम 2022 चूकने के बाद वापसी करते हुए सिल्वर जीता।
- गुलवीर सिंह (पुरुष 10,000 मीटर) — 27:49.78 के समय के साथ; एक ही संस्करण में दो व्यक्तिगत एथलेटिक्स पदक (10,000मी सिल्वर + 5,000मी ब्रॉन्ज़) जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक-फील्ड एथलीट बने।
- सर्वेश कुशारे (पुरुष हाई जंप) — 2.25 मीटर की छलांग, गोल्ड मेडलिस्ट जमैका के रोमेन बेकफोर्ड से एक अटेम्प्ट ज़्यादा लगने से सिल्वर मिला।
- प्रवीण चित्रवेल (पुरुष ट्रिपल जंप) — बर्मिंघम में 3 सेमी से ब्रॉन्ज़ चूकने के बाद इस बार 16.58मी के साथ सिल्वर जीता।
- रिशिकांता सिंह (पुरुष 60 किग्रा वेटलिफ्टिंग) — स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड के साथ भारत का पहला “एबल-बॉडीड” पदक।
- मुथुपांडी राजा (वेटलिफ्टिंग)
- ज्ञानेश्वरी यादव (महिला 53 किग्रा वेटलिफ्टिंग) — छत्तीसगढ़ की रहने वाली, छत्तीसगढ़ पुलिस में सहायक उप-निरीक्षक; 199 किग्रा (88+111) के करियर-बेस्ट लिफ्ट के साथ सिल्वर जीता, नाइजीरिया की ओनोम डिडिह से पीछे रहीं।
- हरजिंदर कौर (वेटलिफ्टिंग)
- वल्लूरी अजया बाबू (वेटलिफ्टिंग)
- यामिनी मौर्य (महिला 57 किग्रा जूडो) — फाइनल गोल्डन स्कोर तक गया, इंग्लैंड की एसेल्या टोपराक से मामूली अंतर से हारीं।
- जदुमणि सिंह (पुरुष 51 किग्रा बॉक्सिंग) — ऑस्ट्रेलिया के जाय डिक्सन से हारे।
- लवलीना बोरगोहेन (महिला 75 किग्रा बॉक्सिंग) — ओलंपिक पदक विजेता लवलीना ने सिल्वर से संतोष किया; बैटन-वाहक भी रहीं।
- शुभम जुयाल (पुरुष F57 शॉट पुट पैरा-एथलेटिक्स)
- यशवीर सिंह — जावेलिन/एथलेटिक्स में पदक
- और एथलेटिक्स-वेटलिफ्टिंग की अन्य स्पर्धाओं में शेष सिल्वर पदक।
🥉 ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता (9)
- झंडू कुमार (पैरा-पावरलिफ्टिंग) — भारत के पहले पदक विजेता, गरीबी और संघर्ष से निकलकर पदक तक पहुंचने की प्रेरक कहानी।
- तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन) — भारत के पहले CWG डेकाथलॉन पदक विजेता बने; उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें विशेष बधाई दी।
- सेल्वा प्रभु थिरुमरन (पुरुष ट्रिपल जंप) — प्रवीण चित्रवेल के साथ भारत की लगातार दूसरी डबल पोडियम फिनिश।
- बिंद्यारानी देवी (वेटलिफ्टिंग)
- शिल्पा के. शायला (महिला F57 शॉट पुट पैरा-एथलेटिक्स)
- सीमा कालीरामना (महिला डिस्कस थ्रो) — अपना पहला CWG पदक जीता।
- गुलवीर सिंह (पुरुष 5,000 मीटर) — दोहरे पदक का दूसरा भाग।
- यश वीर सिंह (जावेलिन थ्रो) — नीरज चोपड़ा के साथ भारत की डबल फिनिश।
- और एथलेटिक्स की एक अन्य स्पर्धा में ब्रॉन्ज़।
उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी: गर्व का पल
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में उत्तर प्रदेश से जुड़ी सबसे गौरवशाली कहानी अस्मिता डे की रही।
अस्मिता डे — गोल्ड मेडलिस्ट, महिला जूडो 48 किग्रा
अस्मिता डे उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) के पद पर तैनात हैं। उनका चयन 2021 में यूपी पुलिस में हुआ था, और पुलिस सेवा जॉइन करने के बाद भी उन्होंने खेल को नहीं छोड़ा — दिन में ड्यूटी निभाते हुए वे अपनी ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटी रहीं। ग्लास्गो में उन्होंने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय जूडोका बनने का गौरव हासिल किया।
उनकी यह उपलब्धि खास तौर पर इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि वे उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने सरकारी सेवा की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की। उनकी सफलता ने यह साबित किया कि नौकरी और खेल की दोहरी ज़िम्मेदारियां संभालते हुए भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं — और यह उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश की महिला खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल बन गया।
अस्मिता के गोल्ड मेडल जीतने के कुछ ही मिनट बाद हर्ष सिंह ने भी पुरुष 60 किग्रा जूडो में गोल्ड जीता, जिससे भारत के जूडो गोल्ड मेडल की संख्या उसी दिन दोगुनी हो गई, और यामिनी मौर्य ने भी सिल्वर मेडल जीतकर भारत के जूडो अभियान को और मज़बूत किया।
एक सीमित बजट और छोटे प्रारूप में आयोजित होने के बावजूद ग्लास्गो 2026 राष्ट्रमंडल खेल भारत के लिए दक्षता के लिहाज़ से बेहद सफल साबित हुए। बॉक्सिंग का ऐतिहासिक 7-गोल्ड अभियान, जूडो में पहली बार पुरुष और महिला दोनों वर्गों में गोल्ड, पैरा-एथलेटिक्स का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, और मीराबाई चानू व नीरज चोपड़ा जैसे स्टार्स की चमक — इन सबने मिलकर भारत को चौथे स्थान तक पहुंचाया। और उत्तर प्रदेश पुलिस की दरोगा अस्मिता डे की गोल्डन कहानी ने यह साबित कर दिया कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने की कोई सीमा नहीं होती।
अगला पड़ाव अब अहमदाबाद 2030 है, जहां भारत पहली बार शताब्दी संस्करण की मेज़बानी करेगा।
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