उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के वृद्धों, दिव्यांगों और निराश्रितों के लिए एक अत्यंत संवेदनशील और जनहितैषी निर्णय लिया है। प्रदेश के लाखों ऐसे कार्डधारक जो अपनी शारीरिक अक्षमता या वृद्धावस्था के कारण राशन की दुकान (कोटे की दुकान) तक जाने में असमर्थ थे, अब उन्हें राशन लेने के लिए घर से बाहर निकलने की आवश्यकता नहीं होगी।
घर तक पहुँचेगा राशन
खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक खाद्यान्न की सुगम पहुँच सुनिश्चित करना है। अब प्रदेश के वृद्ध, दिव्यांग और निराश्रित व्यक्तियों को उनके घर तक राशन पहुँचाया जाएगा। इस नई व्यवस्था से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो राशन लेने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने या लंबी दूरी तय करने में कठिनाई महसूस करते थे।
संवेदनशीलता के साथ सुशासन
सरकार का यह कदम न केवल ‘अंत्योदय’ की भावना को चरितार्थ करता है, बल्कि राज्य में सुशासन के एक नए मॉडल को भी दर्शाता है। विभाग के अनुसार, राशन वितरण की इस डोर-टू-डोर सेवा के लिए उचित तंत्र तैयार किया जा रहा है ताकि लाभ सीधे जरूरतमंदों तक बिना किसी बिचौलिए के पहुँचे।
किन लोगों को होगा सीधा लाभ?
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वृद्ध नागरिक: ऐसे वरिष्ठ नागरिक जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं।
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दिव्यांगजन: शारीरिक रूप से चुनौती का सामना कर रहे कार्डधारक।
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निराश्रित: वे व्यक्ति जो निराश्रित हैं और जिनके पास राशन लेने के लिए परिवार का कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं है।
प्रशासनिक तैयारी
मंत्री डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट किया है कि इस सेवा के क्रियान्वयन के लिए खाद्य एवं रसद विभाग स्थानीय कोटेदारों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेगा। योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी संवेदनशील नागरिक खाद्यान्न के अधिकार से वंचित न रहे।
योगी सरकार का यह प्रयास ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रहने वाले समाज के सबसे कमजोर वर्गों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम है।
