CCI : देश में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने वाली नियामक संस्था भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) अब खुद से (Suo Motu) मामले दर्ज करने से बच रही है। संसद की एक समिति के सामने आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई प्रभावित पक्ष खुद शिकायत लेकर सामने नहीं आता, आयोग हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, राज्यसभा की अधीनस्थ विधान समिति ने कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा प्रतिस्पर्धा नियमों के बार-बार उल्लंघन पर चिंता जताते हुए आयोग को दंड दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने की सिफारिश की है।
समाचार के मुख्य अंश :
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स्वत: संज्ञान से परहेज: हितों के टकराव से बचने के लिए CCI ने अपनी ओर से स्वत: संज्ञान वाले मामले दर्ज करने बंद/कम कर दिए हैं।
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दंड दिशानिर्देश लागू करने की मांग: संसदीय समिति ने कहा कि बार-बार नियम तोड़ने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त मौद्रिक दंड लगाया जाए, ताकि इसे महज ‘बिजनेस की लागत’ न माना जाए।
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एंड्रॉयड स्मार्ट टीवी मामले पर सवाल: समिति के अध्यक्ष मिलिंद मुरली देवड़ा ने गूगल स्मार्ट टीवी मामले में महज ₹20.24 करोड़ के निपटान राशि पर सवाल खड़े किए।
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क्षेत्रीय नियामकों के साथ संयम: जहाँ पहले से कोई क्षेत्रीय नियामक मौजूद है, वहाँ CCI बेवजह दखल देने से बच रहा है।
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1,237 मामलों का निपटारा: आयोग ने समिति को बताया कि अब तक प्राप्त 1,375 मामलों में से 1,237 प्रतिस्पर्धा-रोधी मामलों को निपटाया जा चुका है।
1. ‘स्वत: संज्ञान’ न लेने की पीछे CCI की दलील
संसदीय समिति (अधीनस्थ विधान संबंधी समिति) की बैठक के दौरान CCI की चेयरपर्सन रवनीत कौर ने बताया कि आयोग के शुरुआती वर्षों में स्वत: संज्ञान के मामले अधिक आते थे, क्योंकि उस समय प्रतिस्पर्धा कानून को लेकर जन-जागरूकता सीमित थी।
हितों का टकराव : आयोग का मानना है कि जब वह खुद ही किसी कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करता है और खुद ही उस पर फैसला सुनाता है, तो इससे हितों के टकराव जैसी स्थिति बनती है। इसलिए, अब जब तक कोई दूसरा पक्ष शिकायत दर्ज कराने के लिए तैयार नहीं होता, आयोग खुद आगे नहीं आता। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में स्वतंत्र क्षेत्रीय नियामक पहले से कार्य कर रहे हैं, वहाँ आयोग संयम बरतता है।
2. ‘बार-बार उल्लंघन’ को बिजनेस की लागत न बनने दें कंपनियां
संसद में पेश रिपोर्ट में समिति के अध्यक्ष मिलिंद मुरली देवड़ा की अगुवाई वाली समिति ने कॉरपोरेट घरानों द्वारा प्रतिस्पर्धा कानूनों के बार-बार उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई है:
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निवारक प्रभाव कम होने का खतरा: समिति के अनुसार, यदि बार-बार नियम तोड़ने पर कड़ा जुर्माना नहीं लगाया गया, तो कंपनियां इसे केवल ‘कारोबार करने की लागत’ मानकर नियमों का उल्लंघन करती रहेंगी।
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मौद्रिक दंड दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन: समिति ने सिफारिश की है कि आयोग अपने दंड निर्धारण दिशानिर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करे।
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MSME और स्टार्टअप्स की सुरक्षा: छोटे कारोबारियों, एमएसएमई (MSME) और स्टार्टअप्स को प्रतिस्पर्धी माहौल में बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि बड़े कॉरपोरेट्स की अनैतिक गतिविधियों से उनकी रक्षा की जाए।
3. एंड्रॉयड स्मार्ट टीवी सेटलमेंट केस पर उठे सवाल
बैठक के दौरान समिति के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने एंड्रॉयड स्मार्ट टीवी मामले में गूगल के साथ हुए ₹20.24 करोड़ के निपटान पर सवाल उठाया। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि इसी तरह के मामले में यूरोपीय संघ (EU) ने अरबों डॉलर (लगभग 4 अरब डॉलर) का जुर्माना ठोका था।
CCI की सफाई: इस पर आयोग की अध्यक्ष रवनीत कौर ने स्पष्ट किया कि:
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भारत में यह निपटान राशि केवल भारत के स्मार्ट टीवी ऑपरेटिंग सिस्टम मार्केट से जुड़े कारोबार (Relevant Turnover) के आधार पर तय की गई थी।
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नियमों के तहत दी जाने वाली 15% की वैधानिक निपटान छूट (Settlement Discount) और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही यह राशि तय की गई।
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यूरोपीय संघ का मामला मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ा था, जबकि भारत का यह मामला केवल एंड्रॉयड स्मार्ट टीवी सेगमेंट का था।
4. मामलों के निपटारे की मौजूदा स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रतिस्पर्धा कानूनों के क्रियान्वयन में आयोग की स्थिति इस प्रकार है:
