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Home»सोशल»SHe-Box पोर्टल- कॉर्पोरेट की हवा निकली: यौन उत्पीड़न मामलों में निजी संस्थान फिसड्डी, आंकड़ों ने खोली पोल!
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SHe-Box पोर्टल- कॉर्पोरेट की हवा निकली: यौन उत्पीड़न मामलों में निजी संस्थान फिसड्डी, आंकड़ों ने खोली पोल!

News DriftBy News DriftJuly 26, 2026No Comments4 Mins Read
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SHe-Box पोर्टल- कॉर्पोरेट की हवा निकली: यौन उत्पीड़न मामलों में निजी संस्थान फिसड्डी, आंकड़ों ने खोली पोल!
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SHe-Box पोर्टल: कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित और गरिमामय माहौल सुनिश्चित करने के सरकारी दावों के बीच एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) द्वारा संचालित डिजिटल निगरानी प्लेटफॉर्म ‘शी-बॉक्स’ (SHe-Box) पोर्टल से प्राप्त आंकड़े यह दर्शाते हैं कि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के मामलों के निपटान में निजी संस्थान बेहद फिसड्डी साबित हुए हैं।

संसद में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार, जहाँ केंद्र सरकार के संस्थान शिकायतों का समाधान करने में सबसे आगे रहे, वहीं निजी क्षेत्र की कंपनियों ने यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निस्तारण में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया है।

शी-बॉक्स पोर्टल का डेटा: किस क्षेत्र का कैसा रहा प्रदर्शन?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 29 अगस्त 2024 को पुनर्गठित एवं डिजिटल रूप से उन्नत ‘शी-बॉक्स’ पोर्टल की शुरुआत के बाद से 20 जुलाई 2026 तक कुल 504 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से केवल 206 शिकायतों (40.87%) का ही निपटान किया जा सका।

विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन रिपोर्ट कार्ड:

कार्यस्थल का क्षेत्र प्राप्त कुल शिकायतें निपटाए गए मामले निपटान दर (%)
केंद्र सरकार (Central Govt) 221 137 61.99%
राज्य सरकार (State Govt) 155 61 39.35%
निजी संस्थान (Private Sector) 128 8 6.25%
कुल (Total) 504 206 40.87%

निजी क्षेत्र का निराशाजनक प्रदर्शन: केवल 6.25% मामलों पर कार्रवाई

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि निजी क्षेत्र के पास आई कुल 128 शिकायतों में से केवल 8 मामलों (6.25%) का ही निस्तारण किया जा सका। इसका मतलब यह है कि निजी क्षेत्र की 93.75% शिकायतें आज भी लंबित हैं या उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

यह आंकड़ा कॉर्पोरेट जगत और निजी कंपनियों के उस दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है जहाँ ‘पॉश नीति’ (PoSH Policy) और आंतरिक शिकायत समितियों (Internal Committees – IC) के गठन के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।

केंद्र सरकार सबसे आगे

इसके विपरीत, केंद्र सरकार के कार्यस्थलों से कुल 221 शिकायतें आईं, जिनमें से 137 मामलों (61.99%) को सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया। वहीं, राज्य सरकारों के विभागों में 155 मामलों में से 61 शिकायतों (39.35%) का निस्तारण हुआ।

पोर्टल का नेटवर्क और कानूनी ढांचा

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने लिखित जवाब में बताया कि:

  • नेटवर्क का विस्तार: शी-बॉक्स पोर्टल से 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के 1.89 लाख से अधिक कार्यस्थलों को जोड़ा जा चुका है।

  • निगरानी और डेटा रिकॉर्ड: ‘कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013’ (पॉश एक्ट / POSH Act) के तहत समुचित सरकार के लिए अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी करना और मामलों का ब्योरा रखना अनिवार्य है।

  • स्थानीय समितियों (LC) का गठन: जिन कार्यस्थलों में कर्मचारियों की संख्या 10 से कम है या जहाँ शिकायत स्वयं नियोक्ता  के विरुद्ध है, उनके लिए अधिसूचित जिलाधिकारियों द्वारा स्थानीय समिति का गठन अनिवार्य किया गया है।

क्या है ‘शी-बॉक्स’ (SHe-Box) पोर्टल?

‘शी-बॉक्स’ (Sexual Harassment Electronic Box) एक एकीकृत आईटी सुविधा है, जो देश भर में सरकारी और निजी क्षेत्रों में गठित आंतरिक समितियों (IC) और स्थानीय समितियों (LC) के बारे में सूचना के प्रसार को सुगम बनाती है।

पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं:

  1. एकल-खिड़की सुविधा: कोई भी पीड़ित महिला (चाहे वह नियमित, संविदा, या अस्थायी कर्मचारी हो) बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकती है।

  2. गोपनीयता और सुरक्षा: पोर्टल शिकायतकर्ता की पहचान और विवरण को पूरी तरह गोपनीय (Mask) रखता है, जिसे केवल संबंधित समिति की अध्यक्ष ही देख सकती हैं।

  3. ऑटो-फॉरवर्डिंग: शिकायत दर्ज होते ही यह अपने आप संबंधित संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (IC) को स्थानांतरित हो जाती है।

  4. ट्रैकिंग सुविधा: पीड़ित महिला और नोडल अधिकारी वास्तविक समय (Real-Time) में शिकायत की प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं।

निजी क्षेत्र में सुस्ती की वजहें और चिंताएं

संसदीय रिपोर्ट से साफ है कि निजी कंपनियां पॉश कानून (POSH Act) के तहत अनिवार्य आंतरिक समितियों (ICs) को कागजों पर तो दिखा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर वे शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई (90 दिनों के भीतर) करने में लापरवाही बरत रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र में केवल 6.25% मामलों का निस्तारण होना यह दर्शाता है कि वहाँ या तो कर्मचारियों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जाता है, या फिर समितियों को निष्पक्ष रूप से काम करने की स्वायत्तता नहीं दी जाती। सरकार को अब निजी कंपनियों के खिलाफ सख्त अनुपालनात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल केवल एक कागजी विचार न रहकर हकीकत बन सके।

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