मिड-डे मील: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से मिड-डे मील योजना में भारी लापरवाही का एक और मामला सामने आया है, जिसने बच्चों के पोषण अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर विकास खंड महमूदाबाद स्थित प्राथमिक विद्यालय छांगापुर (छंगापुर) में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो वीडियो ने स्कूल प्रशासन की पोल खोल कर रख दी।
क्या दिखा वायरल वीडियो में
सोमवार को स्कूल में मिड-डे मील के तहत बच्चों को जो भोजन परोसा गया, वह किसी भी मायने में खाने लायक नहीं था। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बच्चों की थाली में आलू-तोरई की बेहद पतली, लगभग पानी जैसी सब्जी परोसी गई थी। इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्चों को रोटियां सही तरीके से हाथ में देने के बजाय फेंककर दी गईं, और कुछ रोटियां ज़मीन पर गिरने के बावजूद उन्हें उठाकर बच्चों को खाने के लिए दे दिया गया। इसके अलावा दूध वितरण में भी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं, जहां बच्चों को अधूरा और अनियमित मात्रा में दूध दिया गया।
यह पूरा दृश्य जब कैमरे में कैद होकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया।
जांच में वीडियो निकला सही, प्रधानाध्यापिका निलंबित
वीडियो वायरल होने के बाद बुधवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. गोरखनाथ पटेल अपनी टीम के साथ छांगापुर प्राथमिक विद्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद बच्चों से सीधे बातचीत कर पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश की। जांच के दौरान वायरल वीडियो में दिखाई गई स्थिति पूरी तरह सही पाई गई — भोजन की गुणवत्ता खराब थी, दूध वितरण में अनियमितता थी, और मिड-डे मील के तय मानकों का खुला उल्लंघन हो रहा था।
जांच रिपोर्ट और खंड शिक्षा अधिकारी, महमूदाबाद की संस्तुति के आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल ने स्कूल की प्रधानाध्यापिका कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन की अवधि के दौरान प्रधानाध्यापिका वर्मा को विकास खंड महमूदाबाद के ही प्राथमिक विद्यालय नदवा में अपनी दैनिक उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
आगे की जांच जारी, दोषियों पर होगी कार्रवाई
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण की गहन जांच खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई है। अधिकारी के मुताबिक, जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी व्यक्ति या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मामले को शासन स्तर पर भी गंभीरता से लिया गया है।
सवाल बरकरार: निगरानी तंत्र आखिर कहां सोया था?
यह घटना एक बार फिर उस बड़े सवाल को जन्म देती है कि जिस मिड-डे मील योजना की निगरानी के लिए हर जिले में दर्जनों अधिकारी तैनात होते हैं, आखिर वह तंत्र इतनी बड़ी लापरवाही को समय रहते पकड़ने में नाकाम क्यों रहा। बच्चों को पौष्टिक और सम्मानजनक तरीके से भोजन मिले, यह सुनिश्चित करना योजना का मूल उद्देश्य है — लेकिन छांगापुर जैसी घटनाएं दिखाती हैं कि ज़मीनी स्तर पर निगरानी में बड़े छेद मौजूद हैं। सवाल यह भी उठता है कि क्या सिर्फ एक प्रधानाध्यापिका के निलंबन से जवाबदेही तय हो जाएगी, या इसकी जड़ें और गहरी हैं, जहां आपूर्ति और निगरानी की पूरी चेन जांच के दायरे में आनी चाहिए।
विशेष संवाददाता सीतापुर।
