पिछले कुछ दिनों से देश भर में — विशेषकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में — एक अजीब और चिंताजनक घटना सामने आ रही है। सड़क पर सामान्य गति से चल रहे ई-रिक्शा अचानक, बिना किसी स्पष्ट तकनीकी खराबी के, बीच रास्ते में बंद हो जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग ई-रिक्शा के पास खड़े होकर अपने मोबाइल फोन में एक ऐप खोलते हैं, और कुछ ही सेकंड में वाहन बीच सड़क पर ठप हो जाता है। इस घटनाक्रम ने न केवल ई-रिक्शा चालकों की रोज़ी-रोटी पर संकट खड़ा किया है, बल्कि सड़क सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
आखिर हो क्या रहा है?
देश में चलने वाले अधिकांश आधुनिक ई-रिक्शा लिथियम-आयन बैटरी से चलते हैं, और इन बैटरियों में एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) लगा होता है। यह सिस्टम बैटरी के तापमान, चार्ज-डिस्चार्ज और समग्र स्वास्थ्य की निगरानी करता है। कई आधुनिक BMS में ब्लूटूथ की सुविधा भी दी जाती है, ताकि वाहन मालिक या मैकेनिक मोबाइल ऐप के ज़रिए बैटरी की स्थिति की जांच कर सकें।
समस्या तब शुरू हुई जब BAT-BMS नाम के एक ऐप — जिसे चीन की कंपनी शेनझेन ग्रीनर्जी टेक्नोलॉजी (Shenzhen Grenergy Technology) ने विकसित किया है — के दुरुपयोग की खबरें सामने आने लगीं। यह ऐप मूल रूप से ब्लूटूथ-आधारित लिथियम बैटरियों की निगरानी के लिए बनाया गया था, यानी अपने आप में यह कोई “हैकिंग टूल” नहीं है। लेकिन असली खतरा तब पैदा होता है जब किसी ई-रिक्शा के BMS में डिफ़ॉल्ट पासवर्ड बदला नहीं गया होता या सुरक्षा कमज़ोर होती है। ऐसी स्थिति में, सीमित ब्लूटूथ रेंज के भीतर मौजूद कोई भी अनजान व्यक्ति उस ऐप के ज़रिए बैटरी से जुड़कर उसका डिस्चार्ज आउटपुट बंद कर सकता है — और चलता हुआ ई-रिक्शा अचानक रुक जाता है।
बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में अब तक लगभग 80 ऐसी शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जहां ई-रिक्शा चालकों ने आरोप लगाया कि उनके वाहन चलते-चलते अचानक लॉक हो गए। परेशान चालक स्थानीय पुलिस चौकी पहुंचे और कार्रवाई की मांग की। हालांकि यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है कि हर मामले के पीछे यही ऐप ज़िम्मेदार है, या फिर कुछ मामलों में सामान्य तकनीकी खराबी, कमज़ोर बैटरी या कंट्रोलर की समस्या भी वजह हो सकती है।
इससे क्या-क्या खतरे हैं?
यह मामला केवल एक “मज़ाकिया प्रैंक” नहीं, बल्कि कई स्तरों पर गंभीर खतरा पैदा करता है:
1. सड़क दुर्घटना का सीधा खतरा व्यस्त ट्रैफिक के बीच अगर कोई वाहन अचानक बंद हो जाए, तो पीछे से आ रहे वाहन उससे टकरा सकते हैं। तेज़ रफ्तार सड़कों या हाईवे जैसे इलाकों में यह जोखिम और भी बढ़ जाता है।
2. यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल ई-रिक्शा में बैठे यात्री — जिनमें अक्सर बुज़ुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल होते हैं — अचानक वाहन रुकने से असमंजस और डर की स्थिति में आ जाते हैं।
3. चालकों की आजीविका पर सीधा असर लाखों ई-रिक्शा चालक रोज़ कमाकर अपना घर चलाते हैं। बार-बार वाहन बंद होने से न केवल उनकी कमाई प्रभावित हो रही है, बल्कि यात्रियों के सामने शर्मिंदगी और यात्रियों का भरोसा टूटने का भी खतरा है।
4. साइबर सुरक्षा की गंभीर खामी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आज एक ई-रिक्शा केवल एक वाहन नहीं बल्कि एक “कनेक्टेड कंप्यूटर सिस्टम” है। अगर कोई व्यक्ति मालिक की अनुमति के बिना उसके इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में प्रवेश करता है, तो यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 (धारा 43 के साथ पठित) के तहत एक दंडनीय अपराध है — जिसमें तीन साल तक की कैद और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
5. भविष्य में बड़े खतरे की आशंका विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर बैटरी सिस्टम में मज़बूत सुरक्षा मानक तय नहीं किए गए, तो भविष्य में यह तकनीक अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों (कार, बाइक आदि) के लिए भी दुरुपयोग की जा सकती है — जो देश के तेज़ी से बढ़ते EV इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बन सकती है।
भारत सरकार का रुख
लगातार बढ़ती शिकायतों और वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने त्वरित कार्रवाई की है:
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने शुरुआती जांच में तीन मोबाइल ऐप्स — BAT-BMS, Epoch-i-ion और Lossigy — के कथित गलत इस्तेमाल की आशंका पाए जाने के बाद इन्हें भारत के एंड्रॉयड और iOS ऐप स्टोर से हटाने का निर्देश दिया है।
- IT सचिव एस. कृष्णन ने CII साइबर सिक्योरिटी समिट में कहा कि ऐप स्टोर संचालकों को किसी भी ऐप को प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने से पहले उचित ड्यू डिलिजेंस (सतर्कता जांच) करनी चाहिए, ताकि नुकसान पहुंचाने वाले या संभावित रूप से खतरनाक ऐप्स आम लोगों तक न पहुंचें।
- मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में इस तरह के जोखिम भरे ऐप्स की उपलब्धता रोकने के लिए ऐप स्टोर कंपनियों से सीधे बातचीत करेगा।
- राज्य स्तर पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है — दिल्ली परिवहन विभाग ने BAT-BMS और Epoch Li-ion ऐप्स के खिलाफ आपातकालीन जांच शुरू की है। दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह की निगरानी में अधिकारी इन ऐप्स से जुड़े तकनीकी जोखिमों की समीक्षा कर रहे हैं।
- सरकार अब असुरक्षित (बिना पासवर्ड-सुरक्षा वाले) बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम पर संभावित प्रतिबंध लगाने या उन्हें अनिवार्य रूप से पासवर्ड-प्रोटेक्टेड बनाने जैसे नियमों पर विचार कर रही है।
हालांकि, सरकार ने अभी तक यह विस्तृत तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है कि इन ऐप्स के ज़रिए वास्तव में ई-रिक्शा के सिस्टम में किस तरह दखल दिया जा रहा था। जांच और निगरानी की प्रक्रिया अभी जारी बताई जा रही है।
चालक और मालिक क्या सावधानी बरतें?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक कोई स्थायी नियामक समाधान नहीं आता, तब तक निम्नलिखित सावधानियां जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं:
- BMS का डिफ़ॉल्ट पासवर्ड तुरंत बदलकर एक मज़बूत, निजी पासवर्ड सेट करें।
- जहां संभव हो, अपने मोबाइल को BMS से स्थायी रूप से पेयर रखें, क्योंकि कई सिस्टम एक समय में केवल एक ही डिवाइस से कनेक्ट हो पाते हैं।
- अगर बैटरी सिस्टम में विकल्प उपलब्ध हो, तो अनावश्यक समय पर ब्लूटूथ ब्रॉडकास्ट बंद रखें।
- सेटिंग्स बदलने में दिक्कत होने पर नज़दीकी अधिकृत बैटरी सर्विस सेंटर या डीलर से तुरंत संपर्क करें।
- अगर वाहन के साथ ऐसी कोई घटना हो, तो स्थानीय पुलिस, साइबर सेल और परिवहन विभाग में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
निष्कर्ष
ई-रिक्शा का अचानक बीच सड़क बंद होना केवल एक तकनीकी गड़बड़ी या “मज़ेदार प्रैंक” का मामला नहीं है — यह लाखों लोगों की रोज़मर्रा की सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। यह घटना यह भी दिखाती है कि जैसे-जैसे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, वैसे-वैसे उनकी साइबर सुरक्षा को लेकर मज़बूत नियम और मानक तय करना अब पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। सरकार की त्वरित कार्रवाई एक सकारात्मक कदम है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए बैटरी निर्माताओं के लिए अनिवार्य सुरक्षा मानक, ऐप स्टोर की सख्त जांच-प्रक्रिया, और आम जनता में जागरूकता — तीनों की एक साथ ज़रूरत है।
