फूड डिलीवरी की दुनिया की दिग्गज कंपनी जोमैटो ने अपने प्लेटफॉर्म पर एक बड़ा और अहम बदलाव किया है। कंपनी ने ऐलान किया है कि वह अब ‘एनालॉग’ डेयरी उत्पादों से बनी डिशेज़ बिल्कुल नहीं बेचेगी। यानी नकली या सिंथेटिक पनीर, चीज और अन्य डेयरी जैसे दिखने वाले उत्पादों से तैयार व्यंजन अब जोमैटो की ऐप और वेबसाइट पर ऑर्डर नहीं किए जा सकेंगे।
क्या है पूरा मामला
जोमैटो ने सोमवार को औपचारिक रूप से घोषणा की कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट्स द्वारा एनालॉग डेयरी उत्पादों से बनी डिश की बिक्री को लेकर ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। इसके तहत कंपनी ने ऐसे तमाम खाद्य पदार्थों को अपने प्लेटफॉर्म से तत्काल हटा दिया है, जिनमें पनीर या अन्य डेयरी उत्पादों की जगह वैकल्पिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था।
जोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने इस फैसले पर बयान देते हुए कहा कि कंपनी का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बेहतर और पौष्टिक भोजन पहुंचाना है, और इसका मतलब है ग्राहकों की सेहत की सुरक्षा करना तथा रेस्टोरेंट पार्टनर्स द्वारा परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों के लिए स्पष्ट मानक तय करना। उन्होंने कहा कि यह नीति उन्हीं रेस्टोरेंट पार्टनर्स के सहयोग से लागू की जा रही है जो इस प्रतिबद्धता को साझा करते हैं।
आखिर ‘एनालॉग’ डेयरी उत्पाद होते क्या हैं
‘एनालॉग’ व्यंजन उन्हें कहा जाता है जिनमें पारंपरिक सामग्री यानी असली दूध, पनीर या चीज की जगह सस्ते या वैकल्पिक पदार्थों — जैसे वनस्पति तेल, स्टार्च या गैर-डेयरी फैट — का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उनका रूप-रंग और बनावट बिल्कुल असली डेयरी उत्पाद जैसी ही रखी जाती है। आम भाषा में इसे “नकली पनीर” या “नकली चीज” भी कहा जा रहा है।
डेयरी एक्सपर्ट्स के मुताबिक असली पनीर मुलायम होता है और मुंह में रखते ही घुल जाता है, क्योंकि इसमें करीब 24 प्रतिशत तक फैट होता है। इसके उलट एनालॉग पनीर को चबाना ज्यादा पड़ता है और इसकी बनावट अलग होती है, जिसे रेस्टोरेंट अक्सर ग्रेवी में डुबोकर छुपाने की कोशिश करते हैं।
फैसला क्यों लिया गया
जोमैटो का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब देशभर में एनालॉग पनीर और डेयरी उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI और कई राज्य सरकारें पहले से ही सख्ती बरत रही हैं। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड और पंजाब जैसे कई राज्यों में एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और भंडारण पर पहले ही प्रतिबंध या सख्त कार्रवाई हो चुकी है। पंजाब सरकार ने तो हाल ही में गैर-डेयरी पनीर के उत्पादन और बिक्री पर पूरे एक साल के लिए रोक लगा दी है, जो वहां हुई जांच में 512 सैंपलों में से 215 के फेल होने के बाद उठाया गया कदम है।
FSSAI के नियमों के अनुसार डेयरी एनालॉग को दूध, मिल्क प्रोडक्ट या कंपोजिट मिल्क प्रोडक्ट नहीं माना जाता, और ऐसे उत्पादों को असली पनीर, दूध या डेयरी आइटम बताकर बेचना नियमों का सीधा उल्लंघन है। नियामक की गाइडलाइन के मुताबिक अगर कोई एनालॉग उत्पाद पैकेट में बिकता है तो उस पर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि यह एनालॉग है, और खुला बेचे जाने पर भी ग्राहक को इसकी जानकारी दी जानी अनिवार्य है। होटल और रेस्टोरेंट को भी अपने मेन्यू कार्ड पर यह बताना होगा कि वे एनालॉग उत्पाद परोस रहे हैं।
रेस्टोरेंट पार्टनर्स के लिए नया नियम
जोमैटो ने अपने सभी रेस्टोरेंट पार्टनर्स को साफ निर्देश दिया है कि वे डिश तैयार करने में असली और प्राकृतिक डेयरी उत्पादों का ही इस्तेमाल करें। अगर कोई रेस्टोरेंट किसी वजह से तुरंत ऐसा नहीं कर पाता, तो उसे अपने मेन्यू से एनालॉग डेयरी उत्पादों वाले सभी व्यंजन हटाने होंगे।
कंपनी के मुताबिक कुछ रेस्टोरेंट्स ने खुद ही अपनी डिश में एनालॉग डेयरी के इस्तेमाल की जानकारी दी थी, ऐसे मामलों में संबंधित डिश को प्लेटफॉर्म से तुरंत हटा दिया गया। जो रेस्टोरेंट इस नई नीति का पालन नहीं करेंगे, उन्हें जोमैटो प्लेटफॉर्म से पूरी तरह हटाया भी जा सकता है।
ग्राहकों की सेहत पर क्यों जरूरी है यह कदम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार नकली या एनालॉग पनीर का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है और इससे दिल की बीमारियों (हार्ट डिजीज) का खतरा भी बढ़ सकता है। असली पनीर के मुकाबले एनालॉग पनीर में पोषक तत्वों की कमी होती है, जबकि इसमें इस्तेमाल होने वाले वनस्पति फैट और अन्य तत्व लंबे समय में सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे क्या
FSSAI के सीईओ के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक यह मुद्दा अब किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है, जिसके चलते आने वाले समय में केंद्र सरकार स्तर पर भी सख्त नियम या राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध को लेकर फैसला लिया जा सकता है। जोमैटो जैसी बड़ी फूड डिलीवरी कंपनी का यह कदम इस दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, जिससे उम्मीद है कि अन्य फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी इसी तरह की नीति अपना सकते हैं।
ग्राहकों के लिए सलाह यही है कि ऑर्डर करते समय डिश की सामग्री को लेकर सतर्क रहें और यदि किसी डिश में एनालॉग डेयरी उत्पाद के इस्तेमाल की आशंका हो, तो रेस्टोरेंट या प्लेटफॉर्म से इसकी पुष्टि जरूर करें।
