Close Menu
News Drift Media
  • दुनिया
  • बिजनेस
  • खबर विशेष
  • खेल
  • राज्य
  • रोजगार
  • शिक्षा
  • ई पेपर
  • ई पत्रिका
  • राष्ट्रीय
  • …
    • मनोरंजन
    • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • सोशल
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp
News Drift Media
E - Papers
  • दुनिया
  • बिजनेस
  • खबर विशेष
  • खेल
  • राज्य
  • रोजगार
  • शिक्षा
  • ई पेपर
  • ई पत्रिका
  • राष्ट्रीय
  • …
    • मनोरंजन
    • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • सोशल
News Drift Media
Home»खबर विशेष»अमेरिकी सख्ती से भारत और ईरान के बीच व्यापार पर संकट के बादल
खबर विशेष

अमेरिकी सख्ती से भारत और ईरान के बीच व्यापार पर संकट के बादल

NDMBy NDMAugust 26, 2026No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp
Follow Us
Google News Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest YouTube WhatsApp Telegram
अमेरिकी सख्ती से भारत और ईरान के बीच व्यापार पर संकट के बादल
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

अमेरिका की ओर से ईरान पर बढ़ती आर्थिक और कारोबारी पाबंदियों का असर अब भारत-ईरान व्यापार पर भी पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान को अलग-थलग करने के लिए आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इसका सीधा असर दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार और भुगतान व्यवस्था पर पड़ सकता है।

ईरानी तेल के आयात में बड़ी गिरावट

भारत लंबे समय से ईरान से कच्चे तेल का आयात करता रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते इसमें लगातार कमी आई है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में भारत के ईरान से कच्चे तेल के आयात में 61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल से मई के दौरान इसमें करीब 1.18 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आई।

मई के दौरान भारत ने ईरान से करीब 70.7 करोड़ डॉलर का तेल खरीदा, जबकि जनवरी-जून की अवधि में भारत का ईरान से आयात करीब 70.7 करोड़ डॉलर रहा।

भारत के लिए बढ़ सकती हैं व्यापारिक मुश्किलें

ईरान भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच चावल, चाय, दवाएं, मशीनरी और अन्य वस्तुओं का कारोबार होता है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भुगतान और शिपिंग से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

वर्ष 2018-19 में भारत ने ईरान को करीब 5.68 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि ईरान से भारत का आयात करीब 36.37 करोड़ डॉलर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी दबाव बढ़ने से भारतीय निर्यातकों और आयातकों के लिए कारोबार करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

पांच बड़े कारोबारी साझेदारों में ईरान

भारत के पांच प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में ईरान भी शामिल रहा है। भारत मुख्य रूप से ईरान को चावल, चाय, कॉफी, मसाले और दवाएं निर्यात करता है। वहीं ईरान से कच्चा तेल और कुछ अन्य उत्पाद भारत आते हैं।

अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण बैंकिंग और शिपिंग कंपनियों पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे भुगतान व्यवस्था प्रभावित होने के साथ कारोबार की लागत बढ़ने की आशंका है।

अमेरिका की नई रणनीति

अमेरिका ने ईरान को अलग-थलग करने के लिए नई आर्थिक रणनीति अपनाई है। इसके तहत ईरान से जुड़े कारोबार, तेल आयात और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन पर निगरानी और प्रतिबंध बढ़ाए जा रहे हैं।

अमेरिका की कोशिश है कि ईरान को तेल से होने वाली कमाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से मिलने वाले वित्तीय संसाधनों से दूर रखा जाए। इसके चलते ईरान के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों और देशों पर भी अप्रत्यक्ष दबाव बढ़ रहा है।

चीन और तुर्किये बने ईरान के बड़े कारोबारी साझेदार

ईरान के साथ कारोबार में चीन सबसे बड़ा साझेदार है। इसके बाद तुर्किये और इराक जैसे देश महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चीन ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है और समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार में भी उसकी अहम भूमिका है।

तुर्किये भी ईरान के साथ ऊर्जा और अन्य उत्पादों का कारोबार करता है। इराक के साथ ईरान का व्यापार मुख्य रूप से बिजली, खाद्य उत्पादों और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर आधारित है।

भारत पर भी पड़ सकता है असर

ईरान पर अमेरिकी सख्ती का असर केवल तेल कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव शिपिंग, बैंकिंग, बीमा, विमानन, डिजिटल भुगतान, सोना और तकनीकी क्षेत्र तक पहुंच सकता है।

यदि प्रतिबंध और कड़े होते हैं तो ईरान से जुड़े भारतीय कारोबारियों के लिए भुगतान और माल की आवाजाही मुश्किल हो सकती है। वहीं, भारत को वैकल्पिक आपूर्ति और भुगतान व्यवस्था तलाशनी पड़ सकती है।

कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर

ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में है। इसलिए यदि अमेरिकी दबाव के कारण ईरान का तेल निर्यात प्रभावित होता है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए चिंता बढ़ा सकती है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।

कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और भुगतान व्यवस्था, तीनों मोर्चों पर चुनौती पैदा कर सकता है। हालांकि, भारत के पास ईरान के साथ व्यापार जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं का अनुभव भी रहा है।

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
NDM
  • Website

Related Posts

‘आपके अकाउंट से 50 हजार डेबिट हुए हैं’, मैसेज आए तो दें ध्यान

September 24, 2026

महंगाई की मार: दालों की कीमतों में उछाल, अरहर 20 रुपये महंगी

September 24, 2026

कैंसर की दवा 2700 की, MRP 27000 — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और भारत में दवा मूल्य नियंत्रण

September 23, 2026
Leave A Reply Cancel Reply

© 2026 Newsdrift - All Right Reserved | Designed & Develoved By Aimsoftnet
  • Terms & Conditions
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Refund Policy
  • Advertise with us
  • Contact us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.