मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। सोमवार, 1 सितंबर 2026 को अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए, जिसके बाद चाबहार से लेकर बंदर अब्बास तक दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी ईरान के बड़े हिस्से में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
ताज़ा हमले में क्या हुआ
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए बताया कि अमेरिकी समयानुसार दोपहर 12 बजे (भारतीय समयानुसार रात करीब साढ़े नौ बजे) उसकी सेनाओं ने ईरान में IRGC के ठिकानों पर हमले शुरू किए। CENTCOM के मुताबिक, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल शिपिंग और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर IRGC द्वारा हाल में की गई हमले की कोशिशों के जवाब में की गई।
ईरानी स्थानीय मीडिया और सरकार से जुड़े समाचार माध्यमों के मुताबिक, इन हमलों की चपेट में दक्षिणी ईरान के कई प्रमुख तटीय शहर आए, जिनमें बंदर अब्बास, चाबहार, कोणारक, केश्म द्वीप, जास्क, सिरिक और मीनाब शामिल हैं। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के मुताबिक बंदर अब्बास के पूर्वी हिस्से और केश्म द्वीप के आसपास कई धमाके सुने गए, जबकि सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने जास्क और सिरिक में भी विस्फोटों की आवाज सुने जाने की पुष्टि की। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक चाबहार और उससे सटे कोणारक बंदरगाह शहरों पर चार प्रोजेक्टाइल (मिसाइल/रॉकेट) गिरने की पुष्टि ईरानी अधिकारियों ने की है।
गौर करने वाली बात यह है कि बंदर अब्बास और केश्म द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के उत्तरी किनारे पर स्थित हैं — जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा-पारगमन (एनर्जी शिपिंग) मार्गों में से एक है — जबकि चाबहार और कोणारक ओमान की खाड़ी पर स्थित दो रणनीतिक बंदरगाह शहर हैं, जहां अहम व्यावसायिक, समुद्री और सैन्य ढांचा मौजूद है।
Today at 12 p.m. ET, U.S. forces began striking Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) targets in Iran. The strikes follow recent attempted attacks by the IRGC against commercial shipping in the Strait of Hormuz and against American service members deployed to the region.
— U.S. Central Command (@CENTCOM) September 1, 2026
अमेरिका ने हमले क्यों किए
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई सीधे तौर पर ईरान की उकसाने वाली गतिविधियों का जवाब है। हाल के दिनों में IRGC ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर हमले की कोशिशें कीं और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को भी निशाना बनाने की कोशिश की, जिसके जवाब में अमेरिका ने यह हवाई कार्रवाई की।
इससे ठीक पहले, फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने रविवार (31 अगस्त 2026) को जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सेना पर कम से कम आठ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। यह हमला अमेरिका द्वारा लारक द्वीप पर IRGC के मिसाइल लॉन्चरों पर किए गए पहले के हवाई हमले के जवाब में हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मिसाइल हमले से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
दूसरी ओर ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फर्स न्यूज ने IRGC के हवाले से दावा किया कि ईरानी सेना ने जॉर्डन में स्थित किंग हुसैन और अल-अजराक अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मौजूद ‘तकनीकी और रखरखाव ढांचे’ और उन क्षेत्रों को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी लड़ाकू विमान तैनात थे। ईरान का दावा है कि इस हमले से भारी नुकसान हुआ, हालांकि अमेरिकी पक्ष ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
ट्रंप की चेतावनी और अमेरिकी प्रतिक्रिया
ईरान की इस मिसाइल कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी थी। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “हम उन पर कड़ा प्रहार करेंगे। इसका जवाब दिया जाएगा।” उन्होंने बताया कि रात में दागी गई ईरानी मिसाइलों में से एक को अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने जानबूझकर नहीं रोका, क्योंकि आकलन में यह सामने आया कि वह किसी लक्ष्य को नहीं लगेगी। बाकी आने वाली मिसाइलों को अमेरिका ने बीच रास्ते में ही रोक दिया।
इसके साथ ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया चैनल पर यह भी कहा कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, तो उसे “पहले से कहीं ज्यादा जोरदार और उच्च स्तर पर” फिर से निशाना बनाया जाएगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “वे बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि उनके साथ किसी समझौते पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं।” ट्रंप के मुताबिक ईरान पर लगे प्रतिबंधों का असर अब बहुत मजबूती से दिखाई दे रहा है।
होर्मुज संकट की पृष्ठभूमि
यह ताज़ा टकराव अचानक नहीं आया, बल्कि महीनों से चली आ रही एक बड़ी जंग की अगली कड़ी है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमलों के साथ यह युद्ध शुरू हुआ था। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था, जो दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाला अहम समुद्री मार्ग है। जून 2026 में दोनों देशों के बीच करीब 107 दिन तक चली लड़ाई के बाद एक संघर्षविराम को अंतिम रूप दिया गया था, जिसके बाद तेल की कीमतों में राहत भी मिली थी।
लेकिन यह शांति ज्यादा दिन नहीं टिकी। 14 जुलाई 2026 से ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर एक बार फिर नाकाबंदी शुरू हो गई। इसके बाद से ईरान अब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कम से कम आठ कमर्शियल जहाजों पर हमले कर चुका है। मिडिल ईस्ट में जहाजों पर होने वाले हमलों पर नजर रखने वाली संस्था यूकेएमटीओ (UKMTO) के मुताबिक, इनमें से चार हमले केवल पिछले सोमवार (24 अगस्त 2026) के बाद से हुए हैं, यानी बीते एक हफ्ते में ही स्थिति तेजी से बिगड़ी है।
ईरान ने यह चेतावनी भी दी है कि वह खाड़ी देशों से होने वाले तेल निर्यात को पूरी तरह रोक सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता और बढ़ गई है।
वैश्विक असर: तेल की कीमतों में उछाल
इस ताज़ा टकराव का सबसे सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है। अमेरिका द्वारा नए हमलों की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 94 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को केवल पांच जहाज ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर सके, जो सामान्य औसत से काफी कम है, और इनमें एक भी तेल टैंकर शामिल नहीं था। इससे साफ है कि दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक पर कमर्शियल शिपिंग लगभग ठप पड़ गई है।
ईरान की प्रतिक्रिया और आगे की आशंका
ईरान के सशस्त्र बलों के केंद्रीय मुख्यालय ने कहा है कि वह “अमेरिकी दुश्मन” के खिलाफ “कुचलने वाले और विनाशकारी वार” करेगा। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के मुताबिक बयान में कहा गया, “अमेरिकी सेना क्षेत्र में जितना ज्यादा अपनी आक्रामकता जारी रखेगी, उसे उतना ही बड़ा और भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।”
इस बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी नागरिकों और सहयोगी देशों के लिए भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी हाल में अपने जलक्षेत्र में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि तनाव अब केवल अमेरिका-ईरान तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल स्थिति बेहद अनिश्चित बनी हुई है। एक तरफ ट्रंप बातचीत की गुंजाइश बनाए रखने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने साफ कर दिया है कि किसी भी जवाबी कार्रवाई का और भी सख्त जवाब दिया जाएगा। वहीं ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा और उसने तेल निर्यात रोकने तक की धमकी दे दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह टकराव इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, कीमतों और शिपिंग सुरक्षा पर भी गहरा असर पड़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत समेत तेल आयात पर निर्भर तमाम देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
