वित्तीय सेवा विभाग देशभर के चुनिंदा एटीएम के जरिए ग्राहकों को तुरंत डेबिट कार्ड जारी करने की सुविधा शुरू करने जा रहा है। इसका मकसद बैंकिंग सेवाओं को शाखा और कागजी प्रक्रिया से बाहर निकालकर सीधे ग्राहक तक पहुंचाना है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद डेबिट कार्ड के लिए बैंक शाखा जाने या डाक से कार्ड आने का इंतजार करने की जरूरत खत्म हो जाएगी।
अभी की स्थिति बनाम नई व्यवस्था
- अभी: नया खाता खुलने, कार्ड खोने, खराब होने या बंद होने के बाद नया कार्ड पाने में सामान्यतः 7 से 10 कार्यदिवस लगते हैं। दूर-दराज के इलाकों में यह समय दो सप्ताह से भी ज्यादा हो सकता है।
- आगे: देश भर के 10,000 चुनिंदा एटीएम में आधुनिक तकनीक वाली विशेष मशीनें लगाई जाएंगी, जिनसे ग्राहक को मौके पर ही नया डेबिट कार्ड मिल सकेगा।
यह सुविधा सामान्य एटीएम में नहीं, बल्कि खासतौर पर तैयार की गई मशीनों में मिलेगी। इन मशीनों में कार्ड जारी करने वाला हार्डवेयर और सुरक्षित डिजिटल मॉड्यूल लगाया जा रहा है।
प्रक्रिया कैसे काम करेगी
- ग्राहक एटीएम की स्क्रीन पर कार्ड जारी करने का अनुरोध दर्ज करेगा।
- पहचान सत्यापन के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर, ओटीपी के साथ-साथ चेहरे या उंगली के निशान (बायोमेट्रिक) या यूपीआई सत्यापन का इस्तेमाल किया जाएगा।
- यह प्रणाली बैंक के केंद्रीय तंत्र से ग्राहक के खाते का सत्यापन करेगी।
- सत्यापन पूरा होने पर मशीन से नया डेबिट कार्ड जारी हो जाएगा।
- ग्राहक वहीं नया पिन बना सकेगा और कार्ड को तुरंत इस्तेमाल के लिए चालू कर सकेगा।
चेहरा-सत्यापन क्यों अनिवार्य होगा
चेहरा सत्यापन को अनिवार्य बनाने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डेबिट कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में न जाए। ग्राहक को मशीन से कार्ड तभी मिलेगा, जब उसकी पहचान का सत्यापन पूरी तरह हो जाएगा — यानी सुविधा जितनी तेज है, पहचान की जांच उतनी ही सख्त भी रखी गई है।
लागू होने की समयसीमा
अधिकारियों के अनुसार, इस सुविधा को 2026 के अंत तक सरकारी और निजी, दोनों तरह के बैंकों में लागू किया जाएगा। यानी यह बदलाव किसी एक बैंक या बैंकिंग क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे बैंकिंग तंत्र में एक साथ अपनाया जाएगा।
इसका क्या मतलब है
- समय की बचत: कार्ड मिलने में लगने वाला 7-10 दिन का इंतजार खत्म होकर यह काम कुछ ही मिनट में पूरा हो सकेगा।
- दूरदराज इलाकों को बड़ी राहत: जिन इलाकों में डाक से कार्ड पहुंचने में दो हफ्ते से ज्यादा लगते थे, वहां के ग्राहकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
- सुरक्षा पर जोर: मोबाइल नंबर, ओटीपी और बायोमेट्रिक/चेहरा सत्यापन की बहुस्तरीय (मल्टी-लेयर) प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कार्ड के गलत हाथों में जाने की आशंका कम होगी।
- तकनीकी निवेश जरूरी: चूंकि यह सुविधा सिर्फ विशेष रूप से तैयार मशीनों में मिलेगी, इसलिए शुरुआत में यह सीमित संख्या (10,000) के एटीएम तक ही सीमित रहेगी, न कि देश के सभी एटीएम में।
यह पहल बैंकिंग सेवाओं को शाखा-केंद्रित मॉडल से हटाकर ग्राहक-केंद्रित, तत्काल-सेवा मॉडल की ओर ले जाने की बड़ी कोशिश है। हालांकि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक कितनी तेजी से 10,000 एटीएम पर जरूरी हार्डवेयर और सुरक्षित डिजिटल मॉड्यूल स्थापित करते हैं, और चेहरा-सत्यापन जैसी नई प्रक्रिया आम ग्राहकों के लिए व्यवहार में कितनी सहज साबित होती है।
