उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से बुधवार रात नौ बजे शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी 2026) का परिणाम घोषित कर दिया गया। आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि यूपी टीईटी 2026 की लिखित परीक्षा 2 और 3 जुलाई 2026 को दो-दो पालियों तथा 4 जुलाई 2026 को एक पाली में, इस तरह कुल पांच पालियों (तीन पाली उच्च प्राथमिक स्तर और तीन पाली प्राथमिक स्तर) में प्रदेश के 60 जनपदों के 955 परीक्षा केंद्रों पर संपन्न कराई गई थी। परीक्षा में पंजीकृत अभ्यर्थियों की संख्या 19,94,661 होने के कारण इसे तीन दिनों की पांच पालियों में कराना पड़ा था।
नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के आधार पर तैयार हुआ परिणाम
आयोग ने विज्ञापन के बिंदु नौ में उल्लिखित तुलनात्मक मूल्यांकन (नॉर्मलाइजेशन) की प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए परिणाम तैयार किया है, क्योंकि परीक्षा अलग-अलग पालियों में आयोजित हुई थी।
प्राथमिक स्तर पर 80.07% सफल
प्राथमिक स्तर (कक्षा एक से पांच तक) की परीक्षा में कुल 7,13,648 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 80.07 प्रतिशत यानी 5,71,435 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं।
उच्च प्राथमिक स्तर पर 71.85% सफल
उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8 तक) की परीक्षा में कुल 10,57,021 अभ्यर्थियों ने भाग लिया, जिनमें से 71.85 प्रतिशत यानी 7,59,513 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए हैं।
सेवारत शिक्षकों का हाल: करीब 62 हजार फेल
परिणाम में सबसे अहम पहलू सेवारत (कार्यरत) शिक्षकों की सफलता दर रही, जिन्हें अपनी नौकरी बचाए रखने और पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है:
- प्राथमिक स्तर पर परीक्षा में शामिल कुल 1,22,405 कार्यरत शिक्षकों में से 76.29 प्रतिशत यानी 93,387 शिक्षक सफल रहे। इसका सीधा अर्थ है कि करीब 29 हजार सेवारत प्राथमिक शिक्षक टीईटी में असफल रहे।
- उच्च प्राथमिक स्तर पर परीक्षा में शामिल कुल 1,46,394 कार्यरत शिक्षकों में से 77.45 प्रतिशत यानी 1,13,384 शिक्षक सफल घोषित किए गए। यानी करीब 33 हजार सेवारत उच्च प्राथमिक शिक्षक परीक्षा पास नहीं कर सके।
इस तरह दोनों स्तरों को मिलाकर कुल मिलाकर करीब 62 हजार सेवारत शिक्षक इस बार यूपी टीईटी में सफल नहीं हो पाए हैं।
फेल शिक्षकों की नौकरी बचाने के लिए विशेष परीक्षा की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शिक्षण सेवा में बने रहने या पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य कर दिया गया है, हालांकि कोर्ट ने सेवारत शिक्षकों को राहत देते हुए यह योग्यता हासिल करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद शिक्षा सेवा चयन आयोग को टीईटी में असफल रहे कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से विशेष परीक्षा (स्पेशल टीईटी) कराने की तैयारी करने के निर्देश दिए गए थे। आयोग ने इसके लिए करीब 1.42 लाख शिक्षकों को ध्यान में रखकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार भी कर ली है, हालांकि विशेष परीक्षा की अंतिम तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। प्रस्ताव को शासन की मंजूरी मिलने के बाद परीक्षा से जुड़ी आगे की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
कहां देखें परिणाम
अभ्यर्थी अपना चयन परिणाम आयोग की आधिकारिक वेबसाइट https://upessc.up.gov.in/ पर जाकर देख सकते हैं।
गौरतलब है कि यूपी टीईटी एक पात्रता परीक्षा है, न कि सीधी भर्ती परीक्षा — यानी इसे पास करने से सीधे नौकरी नहीं मिलती, बल्कि उम्मीदवार आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में आवेदन करने के योग्य बन जाते हैं। वहीं सेवारत शिक्षकों के लिए यह परीक्षा उनकी सेवा जारी रखने और पदोन्नति के लिए अनिवार्य योग्यता के तौर पर काम करती है।
