राजधानी लखनऊ में मेट्रो के विस्तार की योजना अब ज़मीन पर उतरने लगी है। वर्ष 2049 तक लखनऊ में मेट्रो का व्यापक जाल बिछाने की तैयारी के तहत, प्रस्तावित नए मेट्रो मार्गों के संचालन, रखरखाव और ट्रेनों के ठहराव के लिए डिपो बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु:
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एलडीए (LDA) द्वारा भूमि की तलाश: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा डिपो और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के लिए लगभग 20 हेक्टेयर जमीन की तलाश की जा रही है।
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विशेष समिति का गठन: एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने डिपो के लिए जमीन चिन्हित करने और उसकीउपलब्धता की जांच हेतु 5 अधिकारियों की एक समिति बनाई है। यह समिति प्रस्तावित मेट्रो मार्गों के दो किलोमीटर के दायरे में जमीन की उपलब्धता, उसके उपयोग और स्वामित्व का परीक्षण करेगी।
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विस्तार का दायरा: आने वाले वर्षों में राजधानी के कई नए क्षेत्रों जैसे— बाराबंकी, पीजीआई, सीतापुर रोड, आईआईएम रोड, राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल, एकाना स्टेडियम, सुशांत गोल्फ सिटी और आशियाना आदि को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।
प्रस्तावित 10 नए कॉरिडोर और उनकी लंबाई:
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कल्ली पश्चिम से आईआईएम कॉरिडोर – लंबाई: 45 किमी
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राजाजीपुरम से आईआईएम कॉरिडोर – लंबाई: 18.42 किमी
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चारबाग से कल्ली पश्चिम कॉरिडोर – लंबाई: 13 किमी
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इंदिरा नगर से सीजी सिटी कॉरिडोर – लंबाई: 7.7 किमी
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इंदिरा नगर से अनोरा कला कॉरिडोर – लंबाई: 9.27 किमी
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सीसीएस एयरपोर्ट से बंथरा कॉरिडोर – लंबाई: 11 किमी
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मुंशीपुलिया से जानकीपुरम कॉरिडोर – लंबाई: 6.29 किमी
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सीजी सिटी से एयरपोर्ट कॉरिडोर – लंबाई: 19.8 किमी
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कल्ली पश्चिम से मोहनलालगंज कॉरिडोर – लंबाई: 6 किमी
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अनोरा कला से बाराबंकी कॉरिडोर – लंबाई: 14 किमी
डिपो से जुड़ी व्यवस्था और योजना:
मेट्रो डिपो में ट्रेनों को खड़ा करने के साथ-साथ उनकी नियमित सफाई, जांच, रख-रखाव और मरम्मत की पूरी व्यवस्था होती है। इसलिए डिपो का स्थान मेट्रो मार्ग के नजदीक होना अनिवार्य है। एलडीए की समिति सरकारी और अन्य उपलब्ध जमीनों का पूरा ब्योरा जुटाकर मेट्रो के लिए सबसे उपयुक्त स्थान का चयन करेगी।