भ्रष्टाचार : उत्तर प्रदेश के मत्स्य विभाग में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मत्स्य निदेशक सहित कुल पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के क्रियान्वयन में लापरवाही और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के आधार पर की गई है।
मत्स्य निदेशक पर क्या आरोप हैं
मत्स्य विभाग के निदेशक नूरुस्सब्बूर रहमानी पर आरोप है कि उन्होंने लखनऊ स्थित विभागीय जलाशय में मत्स्याखेट (मछली पकड़ने) के ठेके की स्वीकृति महानिदेशक मत्स्य के अनुमोदन के बिना ही जारी कर दी। इस निविदा में तीन निविदादाताओं ने हिस्सा लिया था, जिनमें से एक निविदादाता की फाइनेंशियल बिड ही नाट फाउंड (उपलब्ध नहीं) निकली थी। इसके बावजूद निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया, जो नियमों की स्पष्ट अनदेखी मानी जा रही है।
इसके अलावा प्रयागराज के गुलरिहा जलाशय और बहराइच के जलाशय में मत्स्याखेट ठेकों की स्वीकृति भी बिना महानिदेशक मत्स्य के अनुमोदन के जारी करने का आरोप निदेशक पर लगाया गया है। इसके साथ ही लखनऊ के चकबंदी क्षेत्र में विभाग के कब्ज़े में दर्ज करीब 0.733 हेक्टेयर भूमि का न तो अमलदरामद कराया गया और न ही उसका सीमांकन कराया गया — यह मामला भी जांच के दायरे में सामने आया है।
निदेशक पर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 की अनुदानित परियोजनाओं के संचालन में भी लापरवाही और अनियमितता के आरोप हैं। जांच में प्रथमदृष्टया इन आरोपों में नूरुस्सब्बूर रहमानी को दोषी मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें मंडलायुक्त सहारनपुर कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
वाराणसी में योजना क्रियान्वयन से जुड़े चार अधिकारी भी निलंबित
निदेशक के अलावा वाराणसी में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन से जुड़े चार मत्स्य अधिकारियों — श्वेता सिंह, आकाश दीप, राजेंद्र कुमार और खुर्शीद आलम — को भी निलंबित किया गया है। इन पर आरोप है कि वाराणसी में योजना के तहत लाभार्थियों को दी जाने वाली अनुदान राशि और संचालित परियोजनाओं में बरती गई अनियमितताओं के चलते न तो लाभार्थियों को समय पर भुगतान किया गया और न ही परियोजनाओं का समुचित सत्यापन कराया गया।
निलंबित किए गए इन चार अधिकारियों में ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक व तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण वाराणसी राजेंद्र कुमार, ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक व तत्कालीन मत्स्य निरीक्षक, मत्स्य पालक विकास अभिकरण वाराणसी आकाश दीप सिंह, मत्स्य निरीक्षक व तत्कालीन मत्स्य विकास अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण वाराणसी खुर्शीद आलम, तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंबेडकर नगर व तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण वाराणसी श्वेता सिंह शामिल हैं। इन सभी पर भी वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में आवंटित परियोजनाओं को स्थापित व संचालित कराने में अनियमितताओं के आरोप हैं।
मत्स्य मंत्री की संस्तुति पर हुई कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद की संस्तुति पर की गई है। मत्स्य मंत्री के मुताबिक, प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कुछ अन्य मत्स्य अधिकारियों की भूमिका भी सामने आने के संकेत मिले हैं, जिनकी अलग से जांच जारी है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी की लापरवाही, अनियमितता या अन्य गलत कार्य में संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर मत्स्य विभाग में यह कार्रवाई दो मोर्चों पर हुई अनियमितताओं को लेकर की गई है — एक तरफ मत्स्य निदेशक स्तर पर लखनऊ, प्रयागराज और बहराइच के जलाशयों में बिना उचित अनुमोदन के ठेके जारी करने और सरकारी भूमि के प्रबंधन में लापरवाही के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ वाराणसी में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन में लाभार्थियों को समय पर भुगतान न करने और परियोजनाओं के सत्यापन में लापरवाही के आरोप हैं। कुल पांच अधिकारियों — निदेशक मत्स्य नूरुस्सब्बूर रहमानी और वाराणसी के चार मत्स्य अधिकारियों — को इन आरोपों में प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित किया गया है, और मामले की आगे की जांच अभी जारी है।
