मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता से जुड़े मानकों पर खरा न उतरने के चलते उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश के 184 निजी अस्पतालों को योजना के पैनल से बाहर (डी-इम्पैनल) कर दिया है। अब इन अस्पतालों में मरीजों को योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी।
आयुष्मान भारत योजना क्या है, संक्षेप में
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) केंद्र सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसका मकसद आर्थिक रूप से कमज़ोर और वंचित परिवारों को महंगे इलाज के खर्च से सुरक्षा देना है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थी परिवारों को हर साल प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का कैशलेस और पेपरलेस इलाज मिलता है, जो सरकारी और सूचीबद्ध (इम्पैनल्ड) निजी अस्पतालों दोनों में उपलब्ध होता है। पहले से मौजूद बीमारियां भी शुरुआत से ही इस योजना में कवर होती हैं। इसके अलावा इसमें अस्पताल में भर्ती होने से तीन दिन पहले तक की जांचें और छुट्टी के बाद 15 दिन तक की दवाइयां भी शामिल हैं।
अस्पतालों पर कार्रवाई क्यों हुई
केंद्र सरकार ने हाल ही में आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े मानकों को और सख्त किया है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश में योजना से संबद्ध सभी अस्पतालों के दस्तावेज़ों और व्यवस्थाओं का विस्तृत सत्यापन कराया गया, जिसमें अस्पतालों से फायर एनओसी (अग्निशमन विभाग की अनापत्ति) और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट जैसे कई अनिवार्य मानकों को पूरा करने और उनसे जुड़े दस्तावेज़ उपलब्ध कराने को कहा गया था।
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य एवं उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के मुताबिक, अस्पतालों को इन मानकों को पूरा करने के लिए मार्च 2026 से लगातार मौका और ज़रूरी सूचनाएं दी जा रही थीं। इसके बावजूद कई अस्पताल तय समयसीमा में आवश्यक शर्तें पूरी नहीं कर पाए, खासकर फायर एनओसी जैसे मानक, जो सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़े होते हैं। इसी आधार पर नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हुए इन 184 अस्पतालों को योजना से बाहर किया गया।
पाठक ने साफ किया कि इस कार्रवाई का मकसद पैनल में शामिल अस्पतालों की संख्या घटाना नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि योजना में केवल वही अस्पताल बने रहेंगे जो निर्धारित सुरक्षा, गुणवत्ता और अन्य ज़रूरी मानकों का पूरी तरह पालन करेंगे।
दोबारा जुड़ने का विकल्प खुला
डी-इम्पैनल किए गए अस्पतालों के लिए योजना से दोबारा जुड़ने का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अगर संबंधित अस्पताल भविष्य में सभी अनिवार्य शर्तें पूरी कर लेते हैं और ज़रूरी दस्तावेज़ उपलब्ध करा देते हैं, तो वे नियमों के तहत दोबारा इम्पैनलमेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसके बाद विभाग उनकी व्यवस्थाओं और दस्तावेज़ों का फिर से सत्यापन करेगा।
अब यूपी में कितने निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के पोर्टल के मुताबिक, 8 अगस्त 2026 तक देशभर में कुल 38,437 अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से जुड़े थे, जिनमें 20,363 सरकारी और 18,074 निजी अस्पताल शामिल थे। उत्तर प्रदेश में इस योजना से जुड़े अस्पतालों का नेटवर्क देश में सबसे बड़ा माना जाता है, और राज्य ने वित्त वर्ष 2025-26 में देश में सबसे ज़्यादा (30.6 लाख) अस्पताल भर्तियां दर्ज कीं, जिसके लिए केंद्र से 1,047.53 करोड़ रुपये मिले। हालांकि 184 अस्पतालों के डी-इम्पैनल होने के बाद राज्य में फिलहाल जुड़े निजी अस्पतालों की सटीक अद्यतन संख्या स्वास्थ्य विभाग की ओर से अलग से जारी नहीं की गई है, लेकिन यह राज्य के कुल नेटवर्क का एक छोटा हिस्सा है, जिससे आयुष्मान योजना के दायरे पर बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं जताई जा रही।
गौरतलब है कि इससे पहले मई 2026 में भी उत्तर प्रदेश में हॉस्पिटल एम्पैनलमेंट मॉड्यूल (HEM) पोर्टल पर माइग्रेशन न करने और नए मानकों का पालन न करने के चलते 200 से अधिक निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिसमें 100 अस्पतालों का भुगतान रोका गया था और 100 को पैनल से निलंबित किया गया था।
