अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाइयों में भारत के लगातार बढ़ते कदम और अंतरिक्ष अभियानों की बढ़ती महत्वाकांक्षा के बीच, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ देश के अंतरिक्ष नेटवर्क का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मजबूत बैकअप केंद्र बनकर उभरा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की प्रमुख इकाई ‘इस्ट्रैक’ (ISTRAC) ने लखनऊ को देश के अंतरिक्ष अभियानों की सुरक्षा और सुचारू संचालन का एक प्रमुख स्तंभ बना दिया है।
ऑल्टरनेट सैटेलाइट कंट्रोल सेंटर (ASCC)
शहर में स्थापित इस विशेष नियंत्रण केंद्र का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे भारतीय उपग्रहों पर 24 घंटे और सातों दिन पैनी नजर रखना है। यह केंद्र आपात स्थिति में बेंगलुरु स्थित मुख्य मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (MOX) के विकल्प के रूप में कार्य करता है।
स्पेशल बैकअप और आपदा प्रबंधन
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत के सभी उपग्रहों और अंतरिक्ष अभियानों की निगरानी मुख्य रूप से बेंगलुरु स्थित मुख्य मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (MOX) से की जाती है। परंतु, यदि कभी प्राकृतिक आपदा, तकनीकी खराबी या किसी अन्य आपातकालीन परिस्थिति के कारण बेंगलुरु केंद्र से संपर्क टूट जाता है, तो अंतरिक्ष में तैर रहे करोड़ों-अरबों रुपये के भारतीय उपग्रहों के बेसहारा होने का जोखिम रहता है।
ऐसी किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए लखनऊ स्थित अल्टरनेट सैटेलाइट कंट्रोल सेंटर पूरी तरह तैयार और सक्षम है। यहां से सभी सुदूर संवेदन, वैज्ञानिक और गहरे अंतरिक्ष अभियानों (Deep Space Missions) का सीधा नियंत्रण और मॉनिटरिंग तुरंत संभाली जा सकती है।
इस्ट्रैक (ISTRAC) का वैश्विक ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क
लखनऊ केवल एक बैकअप सेंटर के रूप में ही सीमित नहीं है, बल्कि यह इस्ट्रैक के उन चुनिंदा वैश्विक ग्राउंड स्टेशनों में शामिल है जो देश-विदेश में फैले हुए हैं।
वर्तमान में बेंगलुरु, श्रीहरिकोटा, पोर्ट ब्लेयर और तिरुवनंतपुरम के साथ-साथ विदेशों में ब्रुनेई, बियाक और मॉरीशस में इसरो के ग्राउंड स्टेशन मौजूद हैं, जिनमें लखनऊ का यह केंद्र अपनी तकनीकी क्षमता और सामरिक स्थिति के कारण अत्यधिक विशिष्ट स्थान रखता है।
मुख्य विशेषताएं एवं कार्यप्रणाली
स्थानीय रेडंडेंसी (Redundancy):
बेंगलुरु केंद्र के समक्ष किसी भी प्रकार की आपात स्थिति या तकनीकी बाधा उत्पन्न होने पर निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए लखनऊ में एएससीसी (ASCC) की स्थापना की गई है।
24/7 स्वचालित निगरानी:
उपग्रहों की स्वास्थ्य जांच, कक्षा संशोधन (Orbit Correction) और शेड्यूलिंग प्रबंधन का कार्य पूर्ण रूप से स्वचालित और अत्याधुनिक तरीकों से संपादित किया जाता है।
रॉकेट और पेलोड ट्रैकिंग:
प्रक्षेपण यान (Rocket) के लिफ्ट-ऑफ से लेकर उपग्रह के सफलतापूर्वक अलग होने तक की वास्तविक समय (Real-time) टेलीमेट्री सेवा लखनऊ स्टेशन द्वारा प्रदान की जाती है।
अंतरिक्ष दिवस का विशेष संदर्भ
23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के ‘विक्रम लैंडर’ ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग की थी। इस महान उपलब्धि को यादगार बनाने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
लखनऊ का यह स्पेस कंट्रोल सेंटर इस बात का प्रमाण है कि भारत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सुरक्षा और डेटा अखंडता (Data Integrity) को लेकर कितना गंभीर और दूरदर्शी है। यह केंद्र न केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रतीक है, बल्कि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी सुदृढ़ करता है।
