पुरानी तहसील और निबंधन कार्यालय के आसपास नाले व सड़क पर बने वकीलों के 58 चैंबरों के खिलाफ रविवार को नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में हुई इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। सुबह करीब पांच बजे शुरू हुआ अभियान देर शाम तक चला। चैंबरों को हटाए जाने के बाद सड़क के बड़े हिस्से से अतिक्रमण साफ हो गया।
कार्रवाई की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौके पर पहुंच गए और कार्रवाई का विरोध किया। अधिवक्ताओं का कहना था कि 72 चैंबर हटाने के आदेश दिए गए थे, जिनमें से 14 चैंबर पहले ही हटाए जा चुके हैं। ऐसे में शेष चैंबरों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल चिह्नित अवैध निर्माणों पर ही कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि लाल निशान लगाए गए चैंबरों में से किसी भी अतिरिक्त निर्माण को तोड़ने की अनुमति नहीं दी गई। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि कार्रवाई के दौरान किसी तरह के विवाद या अतिरिक्त निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट रहे। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि कार्रवाई केवल चिह्नित अवैध निर्माणों तक सीमित रहेगी।
अभियान के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मोर्चा संभाले रखा। जोनल अधिकारी एपी सिंह और जोन-3 के जोनल अधिकारी अजीत राय लगातार मौके पर मौजूद रहे। अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव भी पूरे समय मौके पर रहे। भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस और अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर पर्याप्त बल तैनात किया और किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए लगातार निगरानी रखी।
चैंबरों को हटाने के साथ ही मलबा हटाने का काम भी शुरू कर दिया गया। सड़क के किनारे जमा मलबा हटाया गया तो लंबे समय से दबा हुआ सड़क और नाले का हिस्सा सामने आने लगा। अधिकारियों के मुताबिक, चैंबरों के नीचे और आसपास कई स्थानों पर तीन-तीन मंजिल तक के निर्माण तथा विस्तारित ढांचे खड़े कर दिए गए थे। इनके कारण सड़क और नाले का बड़ा हिस्सा पूरी तरह ढक गया था।
नगर निगम की टीम ने कार्रवाई के लिए बड़ी संख्या में जेसीबी मशीनें लगाईं। करीब आधा दर्जन जेसीबी मशीनों की मदद से चैंबर और उनके आसपास बने निर्माण हटाए गए। कार्रवाई के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने अपने परिचितों के चैंबरों को लेकर अधिकारियों से नरमी बरतने की अपील भी की, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश और चिह्नित अवैध निर्माण के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई का सबसे अहम असर सड़क पर दिखाई दिया। मलबा हटने के बाद सड़क की वास्तविक चौड़ाई सामने आने लगी और नाले का हिस्सा भी स्पष्ट हुआ। नगर निगम की ओर से सड़क और नाले पर हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई को लंबे समय से लंबित माना जा रहा था।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माण किसी भी व्यक्ति या संस्था से जुड़े हों, उन्हें नियमों के अनुरूप हटाया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कार्रवाई के नाम पर किसी वैध निर्माण को नुकसान न पहुंचे और न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन हो।
