UP Weather: उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर अपने उग्र रूप में लौट आया है। सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान ने भारी तबाही मचा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 से 6 सितंबर 2026 तक प्रदेश में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जिसके साथ ही कई जिलों में आकस्मिक बाढ़, मेघगर्जन और वज्रपात की आशंका भी जताई गई है। इसे देखते हुए योगी सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है।
किन जिलों पर सबसे ज्यादा खतरा
राहत आयुक्त कार्यालय की चेतावनी के मुताबिक सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, गाजीपुर, वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, भदोही, चित्रकूट और कौशाम्बी जैसे जिलों में आकस्मिक बाढ़ की सबसे ज्यादा आशंका है। गंगा, यमुना, मंदाकिनी और वरुणा जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में बेतहाशा बढ़ोतरी होने से तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। धार्मिक नगरी काशी (वाराणसी), तीर्थराज प्रयागराज और धर्मनगरी चित्रकूट में हालात पल-पल बिगड़ते जा रहे हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का कहर
चित्रकूट जिले के पहाड़ी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले चौरा गांव में मंदाकिनी नदी की बाढ़ ने सबसे भीषण तबाही मचाई है। उफनते पानी ने गांव के आधे से ज्यादा हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे उत्तर टोला और दक्षिण टोला समेत कई दूरदराज के मजरों का मुख्य सड़क से संपर्क पूरी तरह कट चुका है। पहाड़ी से चौरा गांव तक जाने वाले सभी रास्ते पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं, जिससे राहत कार्यों में भी दिक्कत आ रही है।
राजधानी लखनऊ भी नहीं बची
राजधानी लखनऊ में भी सितंबर की शुरुआत तेज बारिश के साथ हुई, जिससे शहर के कई इलाकों में भारी जलभराव देखने को मिला। स्थिति यह हो गई कि कई जगह सड़कें ही मानो नदी में तब्दील हो गईं, जिससे आम लोगों की आवाजाही में भारी परेशानी हुई।
सरकार का रिस्पॉन्स
मौसम की गंभीरता को देखते हुए योगी सरकार ने सभी संबंधित जिलों को सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। राहत आयुक्त कार्यालय ने जिला प्रशासन को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने और स्थानीय स्तर पर जरूरी सावधानियां बरतने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संभावित प्रभावित इलाकों के लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने की अपील की गई है।
राहत कार्यों को लेकर सरकार जमीनी स्तर पर भी सक्रिय नजर आई। चित्रकूट की तहसील कर्वी में प्रभारी मंत्री नंद गोपाल नंदी ने बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत किट वितरित कीं और जिले के अन्य हिस्सों में भी प्रभावित लोगों का हाल-चाल जाना। उन्होंने अधिकारियों को हर स्तर पर लोगों की मदद करने के सख्त निर्देश दिए।
प्रशासन ने खासतौर पर तेज बारिश, नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर और वज्रपात की स्थिति में सतर्कता बरतने और जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया है।
पूरे उत्तर भारत पर मंडरा रहा खतरा
सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, मौसम विभाग ने दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत त्रिपुरा और मेघालय जैसे कई राज्यों में भी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। इनमें कुछ शहरों को येलो अलर्ट तो कुछ को रेड और ऑरेंज अलर्ट के दायरे में रखा गया है। सितंबर की शुरुआत के साथ ही मानसून एक बार फिर उग्र रूप दिखा रहा है, जिससे झमाझम बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और वज्रपात की आशंका भी जताई जा रही है।
आगे क्या करें
मौसम विभाग और प्रशासन दोनों ने आमजन से अपील की है कि:
- बाढ़ प्रभावित या आशंकित इलाकों में रहने वाले लोग सतर्क रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
- नदी-नालों के किनारे जाने से बचें और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर रुख करें।
- वज्रपात की चेतावनी वाले क्षेत्रों में खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या ऊंची जगहों पर जाने से परहेज करें।
- स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के अपडेट्स पर लगातार नजर बनाए रखें।
अगले कुछ दिन उत्तर प्रदेश के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि 6 सितंबर तक भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है। प्रशासन का कहना है कि हालात पर पल-पल नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों को और तेज किया जाएगा।
