उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले गंगा एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। उन्नाव जिले में भारी बारिश के बाद एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंस गया, जिससे करीब सात फुट गहरा गड्ढा बन गया। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस धंसे हुए हिस्से को छिपाने के लिए वहां एक्सप्रेसवे के रंग से मिलती-जुलती शॉल बिछा दी गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
कहां और कैसे हुआ हादसा
यह घटना उन्नाव जिले में गंगा एक्सप्रेसवे की प्रयागराज लेन पर, बसीरतगंज टोल प्लाजा के पास, करीब किलोमीटर 423.6 पर सामने आई। लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे सड़क पर एक बड़ा और गहरा गड्ढा बन गया। घटना के बाद से इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
शॉल से गड्ढा ढकने का वीडियो वायरल
इस पूरे मामले में सबसे विवादित पहलू सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक वीडियो है, जिसमें धंसे हुए गड्ढे पर एक शॉल बिछी हुई साफ दिखाई दे रही है। वीडियो में यह दावा किया गया कि गड्ढे को छिपाने के लिए जानबूझकर यह शॉल वहां रखी गई थी, ताकि आने-जाने वाले वाहन चालकों और अधिकारियों को नुकसान का अंदाजा न लगे। हालांकि, यह शॉल किसने और किस मकसद से रखी, इसकी अभी तक कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन और निर्माण एजेंसी की प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होते ही कार्यदायी संस्था हरकत में आ गई और तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि क्षति का पता चलते ही तत्काल मरम्मत शुरू कर दी गई और कंक्रीट मिक्सर की मदद से गड्ढे को भरा गया, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो। अधिकारी ने यह भी कहा कि एक्सप्रेसवे के अन्य हिस्सों में भी जहां इसी तरह की क्षति सामने आई है, वहां मरम्मत का काम जारी है।
लखनऊ में अधिकारी ने कहा, “हम एक्सप्रेसवे की लगातार निगरानी कर रहे हैं, ताकि आवागमन में कोई बाधा न आए और यात्रा सुगम बनी रहे।” फिलहाल प्रभावित लेन को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है और मरम्मत का काम कराया जा रहा है।
एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर उठे सवाल
करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे 36 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की लागत से तैयार किया गया है। यह मेरठ से प्रयागराज को जोड़ता है और इसे उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। लेकिन लगातार बारिश के दौरान सड़क धंसने की यह घटना कोई पहली बार नहीं है — इससे पहले भी एक्सप्रेसवे पर इसी तरह की दरारें और धंसाव की खबरें सामने आ चुकी हैं। इन बार-बार होने वाली घटनाओं ने इसके निर्माण की गुणवत्ता और जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों अहम है यह मामला
एक तरफ जहां भारी बारिश और खराब जल निकासी को इस धंसाव की वजह बताया जा रहा है, वहीं गड्ढे को शॉल से ढकने वाला वीडियो सामने आने के बाद निर्माण एजेंसी और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि अगर वाकई किसी ने जानबूझकर गड्ढे को छुपाने की कोशिश की, तो यह न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पारदर्शिता की भी भारी कमी दिखाता है।
फिलहाल असली वजह क्या रही — चाहे वह भारी बारिश हो, निर्माण में खामी हो, या फिर लापरवाही — यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
