उत्तर प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में एक बड़ा दावा पेश किया है। सरकार ने ट्रिब्यूनल को बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन जितना ठोस कचरा निकलता है, उससे कहीं अधिक है उसके वैज्ञानिक तरीके से निपटान की मौजूदा क्षमता। यह मामला एनजीटी प्रमुख जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ के समक्ष सुना जा रहा है, जिसमें यूपी सरकार के पर्यावरण एवं वन तथा जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष मित्तल ने विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की।
रोजाना कितना कचरा, कितनी क्षमता?
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 762 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में रोजाना 20,114 टन प्रतिदिन (टीडीपी) ठोस कचरा उत्पन्न होता है। इसके मुकाबले राज्य में मौजूदा निपटान क्षमता 20,746 टीडीपी है — यानी उत्पन्न होने वाले कचरे से करीब 600 टीडीपी अधिक। सरकार का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से निपटान होने से न केवल वायु प्रदूषण, बल्कि मिट्टी और भूजल के प्रदूषण से भी बचाव होगा।
100 फीसदी घरों से कूड़ा उठाने का दावा
रिपोर्ट में यूपी सरकार ने दावा किया कि राज्य के सभी 762 शहरी स्थानीय निकाय घर-घर और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से रोजाना निकलने वाला कूड़ा इकट्ठा कर रहे हैं। यह कार्य तय सफाई टीमों, कर्मचारियों और निर्धारित गाड़ियों के माध्यम से किया जाता है। इसके साथ ही व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए विशेष कलेक्शन सर्विस भी उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार ने बताया कि घर-घर कचरा संग्रहण की निगरानी के लिए अप्रैल 2022 में एक सरकारी आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत जिला स्तर पर ‘डिस्ट्रिक्ट कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ बनाने और समय पर कचरा उठाने की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कचरा पृथक्करण (सेग्रीगेशन) की स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में करीब 74 फीसदी यानी लगभग 14,884 टीडीपी कचरे को अलग-अलग (सूखा-गीला) किया जाता है, जो वैज्ञानिक निपटान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, दिसंबर 2027 तक राज्य में करीब 11,000 टीडीपी क्षमता की अतिरिक्त ठोस कचरा निपटान इकाइयां तैयार हो जाने की उम्मीद है, जिससे कुल मिलाकर 214 यूनिटें कार्यरत हो जाएंगी। फिलहाल राज्य में 20,746 टीडीपी क्षमता वाली 1,988 इकाइयां पहले से कार्यरत हैं।
आठ प्लांट अभी निर्माणाधीन
रिपोर्ट के अनुसार, यूपी ने एनजीटी को बताया कि राज्य में 8 वेस्ट-टू-एनर्जी/बायो-सीएनजी प्लांट निर्माणाधीन हैं, जिनकी कुल क्षमता 7,150 टीडीपी होगी। इसके अतिरिक्त:
- 34 इंटीग्रेटेड ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट — कुल क्षमता 2,980 टीडीपी
- 45 मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ)
- 127 कम्पोस्ट पिट — कुल क्षमता 537 टीडीपी
ये सभी परियोजनाएं फिलहाल निर्माणाधीन चरण में हैं और इनके पूरा होने पर राज्य की कचरा प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
पुराने कचरे (लेगेसी वेस्ट) का निपटान
सरकार ने ट्रिब्यूनल को यह भी बताया कि प्रदेश में मौजूद पुराने कचरे यानी ‘लेगेसी वेस्ट’ की कुल मात्रा लगभग 141.29 लाख टन थी, जिसमें से 122.14 लाख टन कचरे का सफलतापूर्वक जैविक उपचार (बायो-रेमेडिएशन) किया जा चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य ने वर्षों से जमा पुराने कचरे के निपटान में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार की यह रिपोर्ट राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। हालांकि, कचरा प्रोसेसिंग की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की बात भी रिपोर्ट में स्वीकार की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आंकड़ों में सुधार के बावजूद जमीनी क्रियान्वयन की चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।