नैमिषारण्य को एक साधारण तीर्थस्थल से विकसित कर विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्र को आध्यात्मिक और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। परियोजना के तहत नैमिषारण्य क्षेत्र के विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सीतापुर और हरदोई जिलों के 241 गांवों को शामिल किया गया है। इन गांवों को जोड़ते हुए करीब 777.41 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को विनियमित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना को उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र (यूपीएससीआर) में भी शामिल किया गया है। प्रमुख सचिव आवास एवं आयुक्त, लखनऊ ने परियोजना को मंजूरी दी है।
241 गांव होंगे परियोजना में शामिल
परियोजना के तहत हरदोई जिले की हरदोई तहसील के 41 गांव, संडीला तहसील के 43 गांव और सीतापुर जिले की मिश्रिख तहसील के 157 गांव शामिल किए गए हैं। इस तरह कुल 241 गांव और 77,771.41 हेक्टेयर क्षेत्र परियोजना का हिस्सा होगा।
तीन एजेंसियां मिलकर करेंगी विकास
महापरियोजना को धरातल पर उतारने और मास्टर प्लान लागू करने की जिम्मेदारी तीन प्रमुख संस्थाओं को दी गई है। इनमें नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद, आवास एवं शहरी विकास विभाग तथा उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद शामिल हैं।
योजना का उद्देश्य नैमिषारण्य को आधुनिक सुविधाओं से युक्त धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
777 वर्ग किमी में बनेगा बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र
परियोजना पूरी होने के बाद नैमिषारण्य को बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के साथ आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
परियोजना के तहत करीब 75 एकड़ में आधुनिक टूरिज्म टाउनशिप विकसित करने की योजना है। इसमें आवासीय क्षेत्र, हॉस्पिटैलिटी और होटल रिसॉर्ट, व्यावसायिक गतिविधियों के साथ थीम पार्क और खुले हरे-भरे क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।
84 किमी की परिक्रमा का होगा कायाकल्प
नैमिषारण्य की करीब 84 किलोमीटर लंबी परिक्रमा को आधुनिक नागरिक और आध्यात्मिक सुविधाओं से युक्त किया जाएगा। दो जिलों में फैले इस परिक्रमा मार्ग के 11 प्रमुख पड़ावों को विकसित किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
श्रद्धालुओं के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं
परियोजना का लक्ष्य नैमिषारण्य को भारत के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में शामिल करना है। यहां वेदरण्य और आधुनिक सुविधाओं से युक्त वेलनेस सिटी विकसित करने की भी योजना है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ वेलनेस और अन्य पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटकों की संख्या में वृद्धि का अनुमान
वर्ष 2024 में पीक सीजन के दौरान नैमिषारण्य में करीब 60 लाख पर्यटकों के पहुंचने का अनुमान है। परियोजना से जुड़े आकलन के अनुसार अगले 20 वर्षों में पर्यटकों की संख्या में करीब 12 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि हो सकती है।
बढ़ती पर्यटक संख्या को ध्यान में रखते हुए सरकार इको-फ्रेंडली और आधुनिक धार्मिक पर्यटन मॉडल विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
पर्यटन परियोजनाओं से मजबूत होगा बुनियादी ढांचा
प्रदेश की दर्शन योजना के तहत नैमिषारण्य के आसपास केंद्रीय और राज्य योजनाओं के माध्यम से करीब 750 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं, संपर्क व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है।
