उत्तर प्रदेश में लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे पंचायत सहायकों को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। 16 सितंबर 2026 को पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने घोषणा की कि प्रदेश के 57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों का मासिक मानदेय 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया जाएगा — यानी सीधे 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई बातचीत के बाद लिया गया, और इसके साथ ही मंत्री ने पंचायत सहायकों से जुड़ी कई अन्य मांगों को भी मंजूरी दी।
आंदोलन के दबाव में आया फैसला
यह घोषणा अचानक नहीं हुई। पिछले कुछ दिनों से पंचायत सहायक अपनी मांगों को लेकर लखनऊ समेत प्रदेश भर में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान कुछ सहायकों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हुए थे, और कई जगह प्रधान या सचिव के स्तर से सहायकों को हटाए जाने की भी शिकायतें आई थीं। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायक प्रतिनिधियों से बातचीत की, जिसके बाद प्रतिनिधियों ने धरना समाप्त कर दिया।
मानदेय के अलावा और क्या-क्या मिला
सरकार की घोषणा सिर्फ मानदेय बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। इसके साथ पंचायत सहायकों को निम्नलिखित राहतें भी दी गई हैं:
- सेवा सुरक्षा — अब ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव अपने स्तर पर किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे। किसी सहायक को सेवा से हटाने का फैसला अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनने वाली एक समिति करेगी, जिससे मनमाने ढंग से हटाए जाने पर रोक लगेगी।
- मुकदमों की वापसी — आंदोलन के दौरान पंचायत सहायकों पर दर्ज हुए मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
- बहाली — कार्रवाई के तहत पहले हटाए जा चुके पंचायत सहायकों को फिर से बहाल किया जाएगा।
- कैशलेस इलाज — सभी पंचायत सहायकों को कैशलेस स्वास्थ्य उपचार की सुविधा मिलेगी।
- मातृत्व अवकाश — महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा दी जाएगी।
- सीधा भुगतान (DBT) — अभी तक पंचायत सहायकों को मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से मिलता रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब बढ़ा हुआ 9,000 रुपये मानदेय सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा।
पंचायत सहायकों की भूमिका
पंचायत सहायकों की नियुक्ति 2022 में राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कामकाज को सुव्यवस्थित करने के मकसद से की थी। ये सहायक ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं को आम ग्रामीणों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं — जैसे ऑनलाइन आवेदन में मदद करना, सरकारी सेवाओं की जानकारी देना और पंचायत से जुड़े डिजिटल कामकाज में सहयोग देना। यानी डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में इनकी भूमिका फ्रंटलाइन वर्कर जैसी है।
क्यों अहम है यह फैसला
57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों के लिए 6,000 से 9,000 रुपये की यह बढ़ोतरी सीधे उनके घरेलू बजट पर असर डालने वाली है, खासकर तब जब ये सहायक अब तक न्यूनतम मानदेय पर काम करते हुए सेवा-सुरक्षा की भी लगातार मांग करते रहे थे। सेवा सुरक्षा वाला प्रावधान — यानी अब प्रधान या सचिव मनमाने ढंग से नहीं हटा सकेंगे — इस वर्ग के लिए मानदेय बढ़ोतरी जितना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नौकरी की अनिश्चितता लंबे समय से इनकी सबसे बड़ी शिकायत रही है। कुल मिलाकर, यह फैसला ग्रामीण स्तर पर काम कर रहे इस बड़े कार्यबल के लिए राहत के साथ-साथ भविष्य में उनकी सेवा-शर्तों को अधिक स्थिर बनाने की दिशा में भी एक कदम माना जा रहा है।
