श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश कर दी है। रिपोर्ट में SIT ने मंदिर परिसर से जुड़े मामलों में सामने आई घटनाओं, आरोपियों की भूमिका और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों का उल्लेख किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, 105 घटनाओं की जांच की जा रही है और संबंधित आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
SIT ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चढ़ावा चोरी से जुड़े मामलों में गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं और फोरेंसिक रिपोर्ट को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।
25 सितंबर तक दाखिल होगा आरोपपत्र
मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कानूनी समय-सीमा भी महत्वपूर्ण हो गई है। अभियोजन पक्ष की ओर से बताया गया कि पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिनों की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है। इससे पहले आरोपपत्र दाखिल करना आवश्यक है। निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं होने की स्थिति में आरोपियों को वैधानिक जमानत का लाभ मिल सकता है।
SIT की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि जांच अभी जारी है और अगला चरण आरोपपत्र दाखिल करना है। जांच एजेंसी को मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी है।
सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट साझा करने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की ओर से SIT की रिपोर्ट साझा करने की मांग स्वीकार नहीं की। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि मामले की रिपोर्ट को अभी साझा करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, यदि जांच के बाद इसकी जरूरत महसूस होती है तो अदालत आगे उचित आदेश जारी कर सकती है।
चढ़ावे की चोरी की घटनाओं की जांच
जांच एजेंसी के अनुसार, मंदिर परिसर से संबंधित 105 घटनाएं जांच के दायरे में हैं। इनमें चढ़ावे और अन्य सामग्री की चोरी से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जा रही है। SIT ने कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर बयान दर्ज किए हैं। जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और फोरेंसिक साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया गया है।
चढ़ावा चोरी की सूचना लीक करने की भी जांच
जांच का दायरा केवल चोरी की घटनाओं तक सीमित नहीं है। SIT इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि मंदिर परिसर से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं बाहर कैसे पहुंचीं। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारियों के आधार पर पुलिस संबंधित व्यक्तियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
तीन आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
इस मामले में स्पेशल एंटी करप्शन कोर्ट के न्यायाधीश रजत वर्मा ने तीन आरोपियों—मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और रामशंकर मिश्रा—की जमानत अर्जियां सुनवाई के बाद खारिज कर दीं। अदालत ने जमानत दिए जाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।
दान की रसीदों के सॉफ्टवेयर की भी जांच
SIT मंदिर में दान के लिए इस्तेमाल होने वाली रसीदों के सॉफ्टवेयर की भी जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दान से संबंधित रसीदें किस व्यवस्था के माध्यम से तैयार होती थीं और उनसे जुड़ी जानकारी किस-किस स्तर तक पहुंचती थी। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कर्मचारियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि संवेदनशील जानकारी बाहर कैसे पहुंची।
नए CEO ने संभाली राम मंदिर परिसर की व्यवस्था
इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि परिसर की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा ने संभाल ली है। कार्यभार ग्रहण करने से पहले उन्होंने रामलला का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव जगदीश आफले और ट्रस्टी मदन मोहन पांडे ने उनका स्वागत किया।
नए CEO ने परिसर के कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और विभिन्न विभागों के प्रमुखों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। बैठक में दर्शन प्रणाली, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
