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Home»स्वास्थ्य»उत्तर प्रदेश में 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान
स्वास्थ्य

उत्तर प्रदेश में 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान

News DriftBy News DriftMay 15, 2026No Comments6 Mins Read
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उत्तर प्रदेश में 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान
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क्षय रोग (Tuberculosis / TB) सदियों से भारत के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती रही है। देश की सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश इस बीमारी के बोझ के मामले में हमेशा से अग्रणी रहा है। लेकिन अब सरकार ने इस चुनौती को सीधे अभियान के रूप में लेने का निर्णय किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “टीबी मुक्त भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश में एक ऐतिहासिक 100 दिवसीय सघन टीबी उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान की पृष्ठभूमि और शुरुआत:

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (PMTBMBA) को भारत के राष्ट्रपति द्वारा 9 सितंबर, 2022 को लॉन्च किया गया था। इस पहल का उद्देश्य सभी पृष्ठभूमि के लोगों को एक ‘जन आंदोलन’ में एक साथ लाना और टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रगति को आगे बढ़ाना है।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, 24 मार्च 2026 को विश्व टीबी दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में एक राष्ट्रीय स्तरीय कार्यक्रम में “टीबी मुक्त भारत अभियान — 100 दिवसीय अभियान”, “टीबी मुक्त भारत ऐप” और “टीबी मुक्त शहरी वार्ड पहल” का शुभारंभ किया।

विश्व टीबी दिवस 2026 का आयोजन टीबी उन्मूलन से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों को वैश्विक लक्ष्यों से पहले हासिल करने की दिशा में भारत के संकल्प को रेखांकित करता है। इस वर्ष का थीम “Yes! We Can End TB!” था, जो नवीनीकृत उत्साह और सामूहिक संकल्प को व्यक्त करता है।

अभियान के मुख्य उद्देश्य

100 दिन के अभियान का उद्देश्य टीबी के छूटे हुए मामलों की जल्द पहचान करना, संक्रमण के प्रसार को रोकना और समुदायों को टीबी मुक्त बनाना है। मिशन टीबी से संबंधित मौतों को रोकने के लिए पात्र संपर्कों और कमज़ोर आबादी को प्रारंभिक उपचार, जोखिम कारकों के प्रबंधन और टीबी निवारक उपचार (TPT) प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करता है।

इसके अतिरिक्त, इन पहलों का लक्ष्य टीबी के मामलों की तेज़ी से पहचान करना, उपचार के प्रति समर्पण को बढ़ावा देना और विशेष रूप से उच्च बोझ वाले क्षेत्रों में टीबी सेवाओं की अंतिम चरण की डिलीवरी को सुदृढ़ करना है।

उत्तर प्रदेश में कार्यान्वयन की रणनीति

अभियान के अंतर्गत प्रदेश के उच्च जोखिम वाले गांवों, शहरी वार्डों, झुग्गी-बस्तियों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में “आयुष्मान आरोग्य शिविरों” के माध्यम से सघन स्क्रीनिंग और जाँच अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान के अंतर्गत उच्च जोखिम वाले समूहों का चिह्नीकरण करते हुए क्षय रोग के लक्षणों की स्क्रीनिंग के पश्चात समस्त उच्च जोखिम वाले समूहों का एक्स-रे कराते हुए लक्षणयुक्त व्यक्तियों की सीबीनॉट जांच कराई जाती है।
अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें जिले के उच्च जोखिम वाले गांवों में घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान कर रही हैं। आधुनिक हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के माध्यम से मौके पर ही ग्रामीणों की जांच की जा रही है। साथ ही सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में गोष्ठियों और नुक्कड़ नाटकों के जरिये लोगों को टीबी के लक्षण, उपचार और निक्षय पोषण योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि की जानकारी दी जा रही है।
जागरूकता के मोर्चे पर, जौनपुर जैसे जिलों में रोडवेज बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर ऑडियो अवेयरनेस क्लिपिंग लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को टीबी के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

अभियान की उपलब्धियाँ और आंकड़े

राष्ट्रीय स्तर पर, दिसंबर 2024 में अभियान के आरंभ से लेकर अब तक 20 करोड़ से अधिक कमजोर व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिससे देश भर में 32.65 लाख टीबी मरीजों की पहचान हुई है। इनमें से करीब 10.9 लाख ऐसे मरीज थे जिनमें जांच के समय कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे।
उत्तर प्रदेश की बात करें तो अकेले पहले महीने में ही लगभग 35 लाख लोगों की स्क्रीनिंग हुई और 9,340 टीबी संक्रमित व्यक्तियों की पहचान हुई, जिनका उपचार तुरंत शुरू कर दिया गया। सबसे अधिक मामले सीतापुर (1,175), सिद्धार्थनगर (900), रामपुर (858), बाराबंकी (800) और रायबरेली (711) में पाए गए।
इसके साथ ही 29,290 निक्षय मित्रों ने 50,705 टीबी मरीजों को गोद लिया और 2,201 पोषण किट वितरित किए गए।
ग्राम पंचायत स्तर पर भी परिणाम उत्साहजनक रहे — जनपद बस्ती में वर्ष 2025 में कुल 278 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया।

राष्ट्रीय प्रगति का परिदृश्य

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत में टीबी की घटनाओं में 21% की कमी आई है और टीबी से होने वाली मृत्यु दर में 25% की गिरावट दर्ज की गई है। उपचार कवरेज अब 92% तक पहुँच गई है।

निक्षय मित्र योजना: सामुदायिक भागीदारी

इस कार्यक्रम के तहत दान करने वाले को निक्षय-मित्र कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति, गैर-सरकारी संगठन, सहकारी समितियाँ, कॉर्पोरेट, राजनीतिक दल और अन्य शामिल हैं। निक्षय-मित्र कम से कम एक टीबी मरीज को गोद ले सकता है और कम से कम छह महीने तक उसके उपचार में सहयोग करता है।

तकनीकी नवाचार

जनपदों में तीन सीबी-नॉट मशीन तथा सात ट्रूनॉट मशीन के साथ सभी सीएचसी पर एक्स-रे की भी सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा “टीबी मुक्त भारत ऐप” और “टीबी मुक्त शहरी वार्ड पहल” जैसी डिजिटल पहलें भी शुरू की गई हैं, जो रियल-टाइम डेटा ट्रैकिंग और केस मॉनिटरिंग में सहायक हैं।

चुनौतियाँ और आगे की राह

उत्तर प्रदेश की विशाल जनसंख्या, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुँच, पोषण की कमी और जागरूकता की कमी अभी भी बड़ी चुनौतियाँ हैं। लेकिन जहाँ नियमित कार्यक्रम गतिविधियाँ सभी जिलों में जारी रहेंगी, वहीं अभियान उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में विशेष हस्तक्षेप पर ध्यान केंद्रित करेगा — जिसमें मामलों की पहचान बढ़ाना, पोषण सहायता का विस्तार और शीघ्र निदान के लिए सामुदायिक जागरूकता शामिल है।

निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। घर-घर स्क्रीनिंग, आधुनिक तकनीक, निक्षय मित्र योजना और सरकारी तंत्र का समन्वय — ये सभी मिलकर “टीबी मुक्त भारत” के स्वप्न को साकार करने की दिशा में मजबूत कदम हैं। यदि इसी गति और संकल्प से अभियान जारी रहा, तो उत्तर प्रदेश न केवल देश में मिसाल कायम करेगा, बल्कि वैश्विक टीबी उन्मूलन लक्ष्यों को भी समय से पहले हासिल करने में योगदान देगा।

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