भारत की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 16 मई 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत एजेंसी ने पहली बार देश में ‘जिहादी ड्रग’ कहे जाने वाले कैप्टागन की भारी खेप जब्त की। यह ड्रग सीरिया से भारत के रास्ते सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों को भेजी जाने वाली थी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा: “मोदी सरकार ‘नशा-मुक्त भारत’ के लिए संकल्पित है। हम भारत में प्रवेश करने वाले या हमारे क्षेत्र को पारगमन मार्ग के रूप में उपयोग करने वाले हर ग्राम नशीले पदार्थ पर नकेल कसेंगे।”
ऑपरेशन RAGEPILL: कैसे हुई कार्रवाई?
कैप्टागन (Captagon) असल में फेनेथिलिन (Phenethylline) नामक एम्फेटामिन आधारित सिंथेटिक उत्तेजक ड्रग का व्यापारिक नाम है। यह शरीर में जाकर एम्फेटामिन और थियोफाइलिन में टूटती है, जिससे इसका प्रभाव अकेले एम्फेटामिन से कहीं अधिक तेज और शक्तिशाली होता है।
‘जिहादी ड्रग’ क्यों कहते हैं?
कैप्टागन को ‘जिहादी ड्रग’ या ‘टेरर ड्रग’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि आतंकवादी संगठनों — विशेषकर ISIS, हमास और हिजबुल्लाह — ने इसका अपने लड़ाकों पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है।
- भय दबाता है: लड़ाकों में जान जाने का डर खत्म कर देता है, जिससे वे बिना किसी हिचकिचाहट के आत्मघाती मिशन पर जाते हैं।
- नींद की जरूरत नहीं: कई दिनों तक बिना थकान के लड़ने की क्षमता देता है।
- दर्द का एहसास नहीं: सीरिया के हम्स शहर के एक ड्रग नियंत्रण अधिकारी के अनुसार, “हम उन्हें पीटते थे और उन्हें दर्द नहीं होता था — वे हंसते रहते थे।”
- आक्रामकता बढ़ाता है: हिंसा करने में संकोच नहीं रहता, जिससे जघन्य अपराध आसान हो जाते हैं।
- आतंक का वित्त पोषण: ISIS और हिजबुल्लाह जैसे संगठन इस ड्रग की तस्करी से अरबों डॉलर कमाते हैं जिससे हथियार खरीदे जाते हैं।
7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले के बाद मारे गए आतंकियों की जेबों से कैप्टागन की गोलियां बरामद हुईं — जो इस ड्रग के आतंकी उपयोग की सबसे हालिया पुष्टि है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
कैप्टागन का नियमित सेवन शरीर और मस्तिष्क दोनों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है:
तंत्रिका तंत्र: मतिभ्रम (Hallucinations), दृश्य विकृतियां, मनोविकृति (Psychosis) — दिमागी सर्किटरी में स्थायी बदलाव।
हृदय संबंधी: रक्तचाप और शरीर का तापमान बढ़ना। गंभीर मामलों में दिल का दौरा (Myocardial Infarction) और हृदय की मांसपेशियों में कमजोरी (Cardiomyopathy)।
अन्य अंग: लिवर को नुकसान, दौरे (Seizures), और अंग विफलता के दुर्लभ मामले।
मानसिक: तर्कसंगत सोचने की क्षमता नष्ट हो जाती है। गंभीर लत लगती है जिससे निकलना अत्यंत कठिन है।
अन्य उत्तेजकों से खतरनाक: वैज्ञानिक शोध के अनुसार यह अकेले एम्फेटामिन की तुलना में तेज प्रभाव और अधिक मजबूत नशा देती है।
मध्य-पूर्व में कैप्टागन की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। अरब देशों में हर साल लाखों कैप्टागन टैबलेट जब्त होती हैं जो विश्व के कुल एम्फेटामिन जब्ती का लगभग एक-तिहाई है। सऊदी अरब, जॉर्डन और यूएई इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं।
भारत में ड्रग की स्थिति और चुनौतियां
भारत गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) और गोल्डन ट्राएंगल (म्यांमार-थाईलैंड-लाओस) दोनों प्रमुख ड्रग उत्पादक क्षेत्रों के बीच स्थित है। यह भौगोलिक स्थिति भारत को तस्करों के लिए एक आकर्षक ट्रांजिट रूट बनाती है।
NCB के 2025 के आंकड़े: साल 2025 में NCB ने 1,980 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स जब्त की और 1,000 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया। 2020 से 2024 के बीच बंदरगाहों से ₹11,311 करोड़ मूल्य की ड्रग्स जब्त की गई हैं।
कैप्टागन का मामला एक नई और गंभीर चेतावनी है — अब भारत केवल हेरोइन या कोकीन तस्करी का ट्रांजिट रूट नहीं, बल्कि ‘जिहादी ड्रग’ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला का भी हिस्सा बनाने की कोशिश हो रही है।
- म्यांमार से मणिपुर-असम मार्ग पर हेरोइन तस्करी
- मुंद्रा, न्हावा शेवा जैसे बड़े बंदरगाहों पर कंटेनर-आधारित तस्करी
- विदेशी नागरिकों का नेटवर्क (इस मामले में सीरियाई नागरिक)
- भारत को ‘ट्रांजिट हब’ के रूप में इस्तेमाल करने की बढ़ती साजिशें
ऑपरेशन RAGEPILL महज एक ड्रग जब्ती नहीं है — यह एक संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय आतंक-वित्तपोषण नेटवर्क भारत को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। कैप्टागन जहां एक ओर युवाओं को बर्बाद करने वाला नशा है, वहीं दूसरी ओर यह आतंकी संगठनों की आर्थिक रीढ़ भी है।
भारत की एजेंसियों की सतर्कता, अंतरराष्ट्रीय खुफिया सहयोग और ‘नशा मुक्त भारत’ की प्रतिबद्धता ने इस बार एक बड़ी साजिश को नाकाम किया। लेकिन यह लड़ाई अभी लंबी है।
