FSSAI: अगली बार जब आप किसी पैकेटबंद खाने पर ‘No Added Sugar’, ‘100% Natural’ या ‘Heart Pro’ लिखा देखें — एक पल रुकिए। क्योंकि देश की शीर्ष खाद्य सुरक्षा संस्था FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) ने खुलासा किया है कि ये चमकदार दावे अक्सर झूठ के सिवा कुछ नहीं होते।
19 जून 2026 को FSSAI ने एक साथ 14 से अधिक नामी फूड ब्रांड्स को कारण बताओ नोटिस थमाया है। इनमें बच्चों का पसंदीदा किंडर जॉय, रसोई में इस्तेमाल होने वाला सफोला तेल, जूस ब्रांड Pluckk, प्रीमियम ड्रिंक Raw Pressery और रेस्तरां चेन बीकानेरवाला तक शामिल हैं।
किस पर क्या आरोप? जानिए पूरी लिस्ट
1. Pluckk मैंगो जूस — ‘No Added Sugar’ वाला सबसे बड़ा धोखा
Pluckk के मैंगो फ्रूट जूस पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘No Added Sugar’ लिखा है। लेकिन जब FSSAI ने सामग्री सूची जांची, तो पाया कि इसमें 51% आम का गूदा और 49% गन्ने का रस है। गन्ने का रस प्राकृतिक रूप से सुक्रोज (चीनी) का मुख्य स्रोत है। यानी बोतल में चीनी भरी है और पैकेट पर लिखा है ‘No Added Sugar’।
यह वैसे ही है जैसे कोई कहे “हमने खाने में नमक नहीं मिलाया” — पर उसने समंदर का पानी जरूर डाल दिया।
2. Ferrero India का किंडर जॉय — ‘दूध से भरपूर’ का झूठा दावा
लाखों भारतीय बच्चों की पसंद किंडर जॉय के पैकेट पर ‘Rich in Milk Solids’ का दावा है। FSSAI का कहना है कि उत्पाद की वास्तविक सामग्री सूची इस दावे को साबित नहीं करती — दूध के ठोस पदार्थ न तो प्रमुख मात्रा में हैं, न ही उनकी हिस्सेदारी इतनी है कि ‘समृद्ध’ कहा जा सके। माता-पिता इसे पोषण से भरपूर समझकर देते हैं — और कंपनी इसी भरोसे का फायदा उठा रही है।
3. Marico का सफोला टोटल हार्ट प्रो — दिल की बात झूठी
सफोला टोटल हार्ट प्रो मल्टी सोर्स कुकिंग ऑयल पर ‘Heart Pro’ ब्रांडिंग और दिल की तस्वीर छपी है। FSSAI के अनुसार यह दावा उपभोक्ताओं में यह भ्रम पैदा करता है कि इस तेल के उपयोग से दिल की बीमारी नहीं होगी — जबकि मौजूदा नियमों के तहत ऐसा दावा करने के लिए कड़े वैज्ञानिक प्रमाण चाहिए।
इसके अलावा ‘Good Fats Balance’ और ‘Losorb for Less Oil Absorption’ जैसे दावों के लिए भी वैज्ञानिक प्रमाण मांगे गए हैं।
4. ‘Natural Paneer’ (Bella) — ‘नेचुरल’ शब्द पर आपत्ति
Bella के पनीर पर ‘Natural’ शब्द छपा है। FSSAI का तर्क है कि पनीर एक Composite Food (मिश्रित प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ) है — इसलिए इसे ‘Natural’ नहीं कहा जा सकता। यह नाम उपभोक्ता को यह सोचने पर मजबूर करता है कि वह सीधा खेत से आया शुद्ध उत्पाद है।
5. MasterChow रेमन नूडल्स — ‘100% Natural’ और ‘Freshly Made’ पर सवाल
MasterChow के रेमन नूडल्स पर लिखे ‘100% Natural’ और ‘Freshly Made’ दावों के लिए FSSAI ने सबूत मांगे हैं। पैकेट में बंद नूडल्स को ‘Freshly Made’ कहना एक सरासर विरोधाभास है।
6. Raw Pressery अल्फांसो मैंगो ड्रिंक — ‘प्राकृतिक शर्करा’ के नाम पर धोखा
Raw Pressery के अल्फांसो मैंगो ड्रिंक पर लिखा है ‘Contains Naturally Occurring Sugars’ — लेकिन उत्पाद में Fructose एक अलग से मिलाई गई शर्करा के रूप में मौजूद है। यानी Added Sugar है पर ‘Natural’ की आड़ में छिपाया गया है। इसके अलावा, उत्पाद की श्रेणी (Product Category) का लेबल पर उल्लेख तक नहीं।
7. Gaur Healthy Food — Silken Tofu पर ‘100% Veg’ और ‘Rich in Vitamins’ असत्यापित
Silken Tofu पर किए गए ‘100% Veg’ और ‘Rich in Vitamins’ के दावे वैज्ञानिक रूप से असत्यापित पाए गए।
8. बीकानेरवाला — रसोई में खाना खाते पकड़ा गर्मचारी
देश की सबसे बड़ी मिठाई-नमकीन श्रृंखलाओं में से एक बीकानेरवाला को एक ग्राहक की सोशल मीडिया शिकायत के बाद नोटिस मिला। आरोप है कि एक कर्मचारी ऑपरेशनल घंटों के दौरान सर्विस/किचन एरिया में ही खाना खा रहा था। FSSAI ने कंपनी से जांच विवरण, कर्मचारी हाइजीन SOPs और Action Taken Report मांगी है।
9. Param Dairy — IRCTC को दही-रबड़ी में फफूंद का आरोप
Param Dairy Limited को IRCTC कैटरिंग सेवाओं के जरिए सप्लाई किए जा रहे दही और रबड़ी में फफूंद (Fungal Contamination) की शिकायत के बाद नोटिस भेजा गया। यह उन यात्रियों के लिए गंभीर खतरा है जो ट्रेन में कैटरिंग का भरोसा करते हैं।
10-14. अन्य उत्पाद
- Medizen Labs (Medizen Atock PWR Whey XL): ‘Pure & Healthy’, ‘100% Authentic’, ‘Easy Digest’, ‘Rapid Recovery’ जैसे दावों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण मांगे गए।
- Incipro Gold Powder Vanilla: हेल्थ क्लेम्स पर सवाल।
- Korean Ginseng Supplement: प्रदर्शन-संबंधी दावे असत्यापित।
- Nexa Industries — Alkaline Nutrient Water: गैर-अनुमत सामग्री और लेबलिंग उल्लंघन।
- Orville Mountain Bawarchi — Buransh Squash: भ्रामक ब्रांडिंग।
भारत में फूड इंस्पेक्शन की बदहाल तस्वीर
यह नोटिस अकेली घटना नहीं है — यह एक गहरी बीमारी का लक्षण है।
खाली पड़े हैं हजारों पद
FSSAI के CEO ने जून 2026 में ही 50वीं CAC बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से खाली पड़े फूड सेफ्टी पदों को भरने और प्रवर्तन को मजबूत करने की अपील की। यानी नियम बनाने वाली संस्था खुद स्वीकार कर रही है कि जमीन पर लागू करने वाले लोग ही नहीं हैं।
अदालतें कर रही हैं वो काम जो नियामक को करना था
2025 में राजस्थान हाई कोर्ट को FSSAI को जेनेटिकली मॉडिफाइड खाद्य पदार्थों के लिए कड़े मानक बनाने के निर्देश देने पड़े। जब न्यायपालिका को एक नियामक संस्था को आदेश देने की जरूरत पड़े, तो यह सिस्टम की विफलता की सबसे बड़ी निशानी है।
दूध में मिलावट — सालों से एक ही कहानी
FSSAI के अपने राष्ट्रीय दूध सर्वेक्षण बार-बार यही दिखाते आए हैं कि बड़ी संख्या में दूध के नमूने डिटर्जेंट, यूरिया और सिंथेटिक पदार्थों से दूषित पाए जाते हैं। 2019 में अकेले अहमदाबाद में 61% दूध के नमूने क्वालिटी टेस्ट में फेल हुए। लेकिन हर साल वही जांच, वही रिपोर्ट, वही नतीजे — और जमीन पर कुछ नहीं बदलता।
मैकडॉनल्ड्स जैसी बड़ी कंपनी भी नहीं बची
2026 की शुरुआत में जयपुर के एक मैकडॉनल्ड्स आउटलेट को सड़े टमाटर और बार-बार गर्म किए गए असुरक्षित खाने के तेल के लिए चेतावनी दी गई। अगर वैश्विक कंपनी की कॉर्पोरेट कंप्लायंस प्रणाली भी फेल हो सकती है, तो छोटे ढाबों और रेस्टोरेंट का क्या हाल होगा?
एक्सपायर्ड खजूर पर नई तारीख — UP में हुआ खुलासा
2026 की फरवरी में उत्तर प्रदेश के कानपुर में खाद्य विभाग ने 50 लाख रुपये से अधिक के 10,000 किलो खजूर जब्त किए — जो 2022 में एक्सपायर हो चुके थे और जिन पर 2026 की नई एक्सपायरी तारीख के स्टिकर लगाए जा रहे थे।
उपभोक्ता क्या करें? — एक सतर्क खरीदार की गाइड
1. सामग्री सूची (Ingredient List) पढ़ें, न कि सिर्फ पैकेट का सामने वाला हिस्सा। बड़े-बड़े दावे सामने होते हैं, सच्चाई पीछे लिखी होती है।
2. ‘Natural’, ‘Organic’, ‘No Added Sugar’ जैसे शब्दों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। जब तक FSSAI-प्रमाणित न हो, ये सिर्फ मार्केटिंग के शब्द हैं।
3. सामग्री में चीनी के अलग-अलग नाम पहचानें: Glucose, Fructose, Sucrose, Maltose, Cane Juice, Corn Syrup — ये सब चीनी के ही रूप हैं।
4. FSSAI का ‘Eat Right India’ ऐप डाउनलोड करें। इससे आप किसी भी खाद्य पदार्थ के बारे में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
5. हेल्थ क्लेम्स पर सवाल पूछें। ‘Boosts Immunity’, ‘Heart Healthy’, ‘Builds Muscle’ — इन दावों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण होना चाहिए।
FSSAI की चेतावनी और आगे की कार्रवाई
FSSAI ने सभी संबंधित फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे भ्रामक लेबल और विज्ञापनों में तत्काल सुधार करें। अगर ऐसा नहीं किया गया तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत:
- भारी जुर्माना
- उत्पाद पर प्रतिबंध
- लाइसेंस रद्द
जैसी कार्रवाइयां हो सकती हैं।
निष्कर्ष: भरोसे की लड़ाई
एक आम भारतीय उपभोक्ता जब किसी ब्रांड पर भरोसा करता है, तो वह सिर्फ एक उत्पाद नहीं खरीदता — वह एक वादे पर भरोसा करता है। जब किंडर जॉय पर ‘Rich in Milk Solids’ लिखा होता है, तो एक माँ यह सोचकर देती है कि बच्चे को कुछ पोषण मिलेगा। जब सफोला पर ‘Heart Pro’ लिखा होता है, तो एक मधुमेह रोगी उसे सुरक्षित समझता है।
FSSAI की यह कार्रवाई एक जरूरी शुरुआत है — लेकिन नोटिस भेजना काफी नहीं। जरूरत है कड़ी जवाबदेही की, खाली पड़े फूड इंस्पेक्टर के पदों को भरने की, और हर उल्लंघन पर ठोस दंड की।
क्योंकि जब तक पकड़े जाने का डर नहीं होगा, झूठ के पैकेट बिकते रहेंगे।
