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Home»राष्ट्रीय»सुप्रीम कोर्ट संशोधन अध्यादेश 2026: राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी, अब SC में जजों की संख्या बढ़कर हुई 38
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सुप्रीम कोर्ट संशोधन अध्यादेश 2026: राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी, अब SC में जजों की संख्या बढ़कर हुई 38

News DriftBy News DriftMay 18, 2026No Comments3 Mins Read
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सुप्रीम कोर्ट संशोधन अध्यादेश 2026: राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी, अब SC में जजों की संख्या बढ़कर हुई 38
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 जारी किया है, जिससे सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है , इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भी शामिल हैं।
यह अध्यादेश 16 मई 2026 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया। इसने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 की धारा 2 में संशोधन करते हुए 33 शब्द को 37 से बदल दिया।

कैसे आया यह फैसला?

  • यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत जारी किया गया है, जो राष्ट्रपति को संसद के सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी करने का अधिकार देता है।
  • 5 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। चूँकि संसद सत्र में नहीं थी, इसलिए सरकार ने अध्यादेश का रास्ता अपनाया।

अभी की स्थिति क्या है?
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की कार्यशील संख्या 32 (CJI सहित) है और इस वर्ष चार जज सेवानिवृत्त होने वाले हैं। अब CJI संजय कांत की अगुआई में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम इन रिक्तियों को भरने के लिए नामों की सिफारिश करेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1950 में स्थापना के समय सुप्रीम कोर्ट में CJI सहित केवल 8 जज थे। इसके बाद 1956 में 11, 1960 में 14, 1977 में 18, 1986 में 26, 2009 में 31 और 2019 में 34 जज किए गए थे। यह वृद्धि 2019 के बाद पहली बार हुई है।

यह क्यों जरूरी था?
31 मार्च 2026 तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या रिकॉर्ड 93,143 तक पहुँच गई थी। इस बढ़ते बोझ को देखते हुए अतिरिक्त पीठों के गठन और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए जजों की संख्या बढ़ाना आवश्यक हो गया था।

‘पर पर्सन’ जजों की स्थिति: भारत में प्रति व्यक्ति जजों का अनुपात
भारत में न्याय मिलने में देरी का सबसे बड़ा कारण जजों की भारी कमी और बढ़ती आबादी है। अगर हम प्रति व्यक्ति जजों की संख्या पर नजर डालें, तो भारत की स्थिति वैश्विक मानकों से काफी पीछे है:

लॉ कमीशन की सिफारिश: भारतीय विधि आयोग ने अपनी 120वीं रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि भारत में प्रति 10 लाख आबादी पर कम से कम 50 जज होने चाहिए।

वर्तमान जमीनी हकीकत: तमाम प्रयासों के बावजूद भारत में वर्तमान में प्रति 10 लाख की आबादी पर केवल 21 से 22 जज ही उपलब्ध हैं (इसमें सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और निचली अदालतें सभी शामिल हैं)।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा सरकार को लिखे गए पत्र और ग्रीष्मकालीन अवकाश से ठीक पहले बढ़ती पेंडेंसी को देखते हुए उठाया गया यह कदम बेहद सराहनीय है। जजों की संख्या में इस 4 सीटों की बढ़ोतरी से कॉलेजियम को नए जजों की नियुक्ति करने का मौका मिलेगा, जिससे देश के नागरिकों को ‘सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय’ मिलने की उम्मीद और मजबूत होगी।

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