कफ सीरप: देश में कफ सीरप के बढ़ते दुरुपयोग, नशे के रूप में इसके इस्तेमाल और गुणवत्ता से जुड़े वैश्विक विवादों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बेहद कड़ा और बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब देश में किसी भी मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर की वैध पर्ची के कफ सीरप नहीं बेची जा सकेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
कफ सीरप अब ‘शेड्यूल एच’ (Schedule H) के दायरे में
स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सभी प्रकार के कफ सीरप को अब सख्त निगरानी वाली दवाओं की श्रेणी में डाल दिया गया है।
नए नियम के मुख्य बिंदु:
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बिना पर्ची बिक्री पर पूर्ण रोक: अब कोई भी व्यक्ति मेडिकल स्टोर पर जाकर सीधे (Over-The-Counter) खांसी की दवा नहीं खरीद सकेगा। दवा खरीदने के लिए रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर (डॉक्टर) की पर्ची दिखाना अनिवार्य होगा।
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मेडिकल स्टोरों के लिए रिकॉर्ड रखना जरूरी: फार्मासिस्टों को अब कफ सीरप बेचने पर डॉक्टर की पर्ची का रिकॉर्ड, मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम और बेची गई कफ सीरप का बैच नंबर अपने रजिस्टर में दर्ज करना होगा।
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सख्त चेकिंग: राज्य के औषधि निरीक्षकों (Drug Inspectors) को निर्देश दिया गया है कि वे मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण करें। यदि कोई बिना पर्ची के कफ सीरप बेचता पाया गया, तो उसका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।
नोटिफिकेशन में क्या कहा गया है?
नोटिफिकेशन के मुताबिक, केंद्र सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 12 और 33 के तहत मिली शक्तियों का का इस्तेमाल करते हुए ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन किया है. नोटिफिकेशन में लिखा है, “इन नियमों को ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 कहा जाएगा. ये ऑफिशियल गजट में इनके पब्लिश होने की तारीख से लागू होंगे.”
सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह सख्त कदम?
इस ऐतिहासिक और कड़े फैसले के पीछे दो मुख्य और बेहद संवेदनशील कारण हैं:
1. नशे के रूप में कफ सीरप का खतरनाक चलन
भारत के कई राज्यों (विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब) में कोडीन (Codeine) आधारित कफ सीरप का इस्तेमाल युवाओं और स्कूली बच्चों द्वारा नशे के विकल्प के रूप में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। चूंकि यह दवा आसानी से और सस्ते में मेडिकल स्टोर पर मिल जाती थी, इसलिए इसे ‘सस्ता नशा’ बना लिया गया था। स्वास्थ्य मंत्रालय लंबे समय से इस अवैध लत की चेन को तोड़ने की योजना बना रहा था।
2. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि और मौतों का मामला
पिछले कुछ वर्षों में भारत में बनी कफ सीरप की गुणवत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विवाद हुआ था। गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून जैसे देशों में भारतीय कफ सीरप में कथित तौर पर ‘डायथिलीन ग्लाइकोल’ (Diethylene Glycol) और ‘एथिलीन ग्लाइकोल’ की मिलावट के कारण कई बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। हालांकि सरकार ने उन कंपनियों पर कार्रवाई की थी, लेकिन कफ सीरप की अनियंत्रित घरेलू बिक्री और मैन्युफैक्चरिंग को लेकर वैश्विक स्तर पर भारत की ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ की छवि पर आंच आ रही थी।
आम जनता और मेडिकल स्टोर्स पर क्या होगा असर?
आम नागरिकों के लिए चुनौती:
इस नियम के बाद अब आम जनता को सामान्य खांसी होने पर भी पहले डॉक्टर के पास जाना होगा, जिससे उनका ओपीडी (OPD) का खर्च और समय बढ़ेगा। हालांकि, डॉक्टरों का मानना है कि यह नियम लोगों को ‘सेल्फ-मेडिकेशन’ (खुद से दवा लेने की खतरनाक आदत) से बचाएगा, क्योंकि कई बार लोग सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी का अंतर जाने बिना गलत कफ सीरप पी लेते हैं, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है।
फार्मासिस्ट एसोसिएशन का रुख:
केमिस्ट और ड्रगिस्ट एसोसिएशंस ने इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि वे सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं, लेकिन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जहां डॉक्टरों की कमी है, वहां अचानक इस नियम को पूरी तरह लागू करने से आम मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
