राजधानी की बहुचर्चित सुशांत गोल्फ सिटी परियोजना के हजारों खरीदारों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने टाउनशिप के अधूरे विकास कार्यों को अपने स्तर पर पूरा कराने और पूरी परियोजना को टेकओवर करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद प्राधिकरण परियोजना के अधूरे कामों को अपने स्तर पर पूरा कराने की तैयारी में है।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक, इस संबंध में पिछले सप्ताह शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। परियोजना में सड़क, पेयजल, सीवर, ड्रेनेज, बिजली, पार्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई काम अभी अधूरे हैं।
यह कदम कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के बाद उठाया गया है। समिति ने 2 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। रिपोर्ट में परियोजना के विकास और जमीन के इस्तेमाल को लेकर अंसल समूह पर कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
करीब 1,694 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च होने का अनुमान
एलडीए के आकलन के अनुसार, सुशांत गोल्फ सिटी के अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराने में करीब 1,693.90 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें सड़क, पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली के उपकेंद्र, पार्क और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास शामिल है।
पॉकेट-1 से पॉकेट-4 तक आधारभूत सुविधाओं के विकास पर करीब 453.10 करोड़ रुपये, जबकि पॉकेट-5 में विकास कार्यों पर करीब 1,126.52 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। रेलवे ओवरब्रिज के बचे हुए कार्यों पर करीब 114.28 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन है।
परियोजना में करीब 50 किलोमीटर सड़कें अभी बनाई जानी बाकी हैं। इसके अलावा पेयजल पाइपलाइन, सीवर लाइन, ड्रेनेज सिस्टम, पार्क और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े काम भी अधूरे बताए गए हैं। बिजली आपूर्ति के लिए जरूरी कई उपकेंद्रों का निर्माण भी अब तक पूरा नहीं हुआ है।
2,211 करोड़ रुपये की देनदारियां भी शामिल
एलडीए के प्रस्ताव में केवल विकास कार्यों का खर्च ही नहीं, बल्कि परियोजना की लंबित देनदारियों को भी शामिल किया गया है। कुल अनुमानित खर्च करीब 2,211 करोड़ रुपये बताया गया है।
प्राधिकरण की योजना परियोजना में बची हुई जमीन का उपयोग और बिक्री कर इन देनदारियों को चुकाने की है। इसके साथ ही उसी प्रक्रिया से अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराने का प्रस्ताव है। हालांकि इसके लिए शासन की मंजूरी के साथ अन्य जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी।
एलडीए के पास बंधक रखे प्लॉट भी बेच दिए गए
जांच के दौरान परियोजना में जमीन और प्लॉट के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, एलडीए ने टाउनशिप की शर्तों के तहत अंसल से करीब 3,000 प्लॉट बंधक रखवाए थे। इसका उद्देश्य यह था कि यदि डेवलपर विकास कार्य पूरे नहीं करता है तो प्राधिकरण इन भूखंडों का इस्तेमाल कर परियोजना के विकास को पूरा करा सके।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन बंधक भूखंडों में से भी कई को बेच दिया गया। इससे परियोजना के विकास और खरीदारों के हितों को लेकर विवाद और बढ़ा।
नगर निगम और ग्राम समाज की जमीन का भी मामला
जांच समिति के सामने परियोजना में नगर निगम और ग्राम समाज की जमीन के इस्तेमाल का मामला भी आया। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 64 हेक्टेयर जमीन ऐसी थी जो नगर निगम और ग्राम समाज से संबंधित थी और उसका भी परियोजना में इस्तेमाल किया गया।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस जमीन को लेकर आगे की कार्रवाई और समाधान के लिए शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है। एलडीए इस जमीन को शासन से नियमानुसार प्राप्त करने की प्रक्रिया में है।
सुशांत गोल्फ सिटी में सब स्टेशन तक नहीं बना
परियोजना में बिजली व्यवस्था को लेकर भी बड़ी कमी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुशांत गोल्फ सिटी में प्रस्तावित बिजली उपकेंद्रों का निर्माण पूरा नहीं हुआ। इसके चलते फिलहाल आसपास की अन्य व्यवस्था से बिजली आपूर्ति की जा रही है।
एलडीए के प्रस्ताव में बिजली के अलावा सड़क, पानी, सीवर और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की बात कही गई है।
एनसीएलटी से भी लेनी होगी अनुमति
परियोजना को टेकओवर करने की प्रक्रिया केवल शासन की मंजूरी तक सीमित नहीं है। एलडीए को इस मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से भी आवश्यक अनुमति लेनी होगी। शासन और एनसीएलटी से मंजूरी मिलने के बाद ही प्राधिकरण परियोजना के विकास कार्यों को औपचारिक रूप से अपने हाथ में लेकर आगे बढ़ा सकेगा।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य परियोजना का विकास पूरा कराना और खरीदारों को राहत दिलाना है। उनके मुताबिक, शासन को इस संबंध में प्रस्ताव भेज दिया गया है।
खरीदारों की समस्या मुख्यमंत्री के सामने भी पहुंची
सुशांत गोल्फ सिटी से जुड़े हजारों खरीदारों की समस्याओं का मुद्दा राजनीतिक स्तर पर भी उठ रहा है। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान अंसल एपीआई से जुड़े विभिन्न मामलों के साथ होमबायर्स की समस्याओं को भी सामने रखा।
विधायक के मुताबिक, अंसल एपीआई की परियोजनाओं से जुड़े हजारों परिवार प्रभावित हैं, जिनमें सुशांत गोल्फ सिटी के 20 हजार से अधिक परिवारभी शामिल हैं।
अब शासन की मंजूरी और एनसीएलटी की प्रक्रिया के बाद एलडीए के टेकओवर का रास्ता साफ होता है या नहीं, इस पर खरीदारों की नजर है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो लंबे समय से अधूरी पड़ी बुनियादी सुविधाओं को पूरा कराने और परियोजना से जुड़ी देनदारियों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।
