अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भवन मानचित्र स्वीकृति के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब राजधानी में व्यावसायिक और सार्वजनिक उपयोग की सभी गैर-आवासीय इमारतों के लिए अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। संबंधित श्रेणी के भवनों का नक्शा तभी स्वीकृत होगा, जब आवेदक फायर विभाग की ओर से जारी फायर एनओसी या निर्धारित अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा।
एलडीए का कहना है कि अब भवन निर्माण की शुरुआत से ही सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि भविष्य में आग जैसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। पहले फायर एनओसी की अनिवार्यता मुख्य रूप से 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों तक सीमित थी, लेकिन संशोधित व्यवस्था में कई अन्य श्रेणियों के भवन भी इसके दायरे में शामिल किए गए हैं।
किन भवनों पर लागू होंगे नियम
नई व्यवस्था के तहत सभा भवन, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, कोचिंग संस्थान, पुस्तकालय, बैंक, सिनेमा हॉल, थिएटर, जिम सहित सार्वजनिक उपयोग वाले अन्य भवनों को भी अग्नि सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना होगा।
छोटे भवनों के लिए भी नई व्यवस्था
एलडीए ने 15 मीटर से कम ऊंचाई अथवा 500 वर्ग मीटर से कम निर्मित क्षेत्र वाले कुछ भवनों के लिए भी सुरक्षा मानकों को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। ऐसे भवनों के स्वामियों को मानचित्र स्वीकृति के समय अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा मानकों के पालन का शपथपत्र देना होगा। इसके बाद तीन महीने के भीतर फायर विभाग से आवश्यक अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त करना भी अनिवार्य होगा। समय सीमा के भीतर प्रमाणपत्र नहीं लेने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
आवेदन के बाद होगा निरीक्षण
फायर एनओसी या अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए भवन स्वामी को फायर विभाग में आवेदन करना होगा। आवेदन मिलने के बाद विभाग की टीम भवन का निरीक्षण करेगी। निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्था मिलने पर ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
एलडीए का मानना है कि नए नियम लागू होने से भवन निर्माण के दौरान ही अग्नि सुरक्षा को प्राथमिकता मिलेगी और भविष्य में आग की घटनाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
