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Home»राज्य»उत्तरप्रदेश»अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: आस्था के मंदिर में अविश्वास की दास्तान
उत्तरप्रदेश

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: आस्था के मंदिर में अविश्वास की दास्तान

News DriftBy News DriftJune 17, 2026No Comments6 Mins Read
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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: आस्था के मंदिर में अविश्वास की दास्तान
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अयोध्या राम मंदिर: जनवरी 2024 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की, तो पूरे देश में उत्साह की लहर दौड़ गई थी। करोड़ों श्रद्धालु रोज़ रामलला के दर्शन को आते हैं और मन की श्रद्धा से दानपात्रों में अपना योगदान डालते हैं। लेकिन जून 2026 में जो खुलासा हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया — भक्तों की इसी आस्था और चढ़ावे को लूटा जा रहा था।

कैसे शुरू हुआ पर्दाफाश:
जून 2026 के पहले सप्ताह में अयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्रों से 7 से 8 करोड़ रुपए का चढ़ावा गायब है। विपक्ष ने इसे सनातन समाज की आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। आम आदमी पार्टी और शिवसेना (UBT) ने भी सरकार को घेरा।

शुरुआत में ट्रस्ट ने इन आरोपों को अफवाह करार देते हुए नकार दिया। लेकिन जब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों और ट्रस्ट के सदस्यों ने रिकॉर्ड और लेजर बैलेंस का मिलान किया, तो वसूली गई राशि और बैंक खाते की रकम में बड़ा अंतर सामने आया। बढ़ते जनदबाव और मीडिया की जांच के बाद मामले को नकारना संभव नहीं रहा।

घोटाले की असली रकम कितनी?

शुरुआती अनुमानों के मुताबिक यह घोटाला 200 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। जांच एजेंसियों ने अब तक कई कर्मचारियों से जुड़ी करोड़ों रुपये की नकदी, महंगी गाड़ियां और अन्य संपत्तियों का पता लगाया है। हालांकि शुरुआती आरोप 7-8 करोड़ के थे, लेकिन जैसे-जैसे जांच की परतें खुलती गईं, आंकड़ा और भयावह होता गया।

SIT गठन और कार्रवाई की टाइमलाइन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) 15 जून 2026 को अयोध्या पहुंची। टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से छह घंटे तक पूछताछ की और डिजिटल साक्ष्य खंगाले।

SIT में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत (IAS), आईजी रेंज किरण एस (IPS) और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल हैं। सरकार ने इस टीम को 7 दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का कड़ा निर्देश दिया है।

SIT ने पहले दिन 8 घंटे और दूसरे दिन 11 घंटे तक मंदिर में पूछताछ की। टीम ने चढ़ावा रूम का सीसीटीवी डेटा करीब एक दर्जन पेनड्राइव में लिया है। कुल मिलाकर दो दिनों में SIT ने 19 घंटे की मैराथन जांच की।

कौन हैं मुख्य आरोपी?

पांच गिरफ्तारियां और नकदी की बरामदगी

कार्रवाई से पहले, पांच मुख्य संदिग्धों से करीब दो करोड़ रुपये नकद, एक लग्जरी कार और तीन आईफोन बरामद हुए। गिरफ्तार आरोपियों के नाम हैं — लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करणे और रमाशंकर। आरोपी अवनीश के बैंक खाते से 5 लाख रुपए की संदिग्ध राशि व जेवरात मिले, जबकि रुदौली के मीनापुर में आरोपी लवकुश के घर से 10-12 लाख कैश बरामद हुआ।

रहस्यमयी ‘टिन्नू यादव’ — मामले का केंद्रबिंदु

इस घोटाले में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम सामने आया है। 13 जून 2026 को टिन्नू के पैतृक आवास पर छापेमारी में भारी मात्रा में शुद्ध सोना जब्त किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसकी कथित संपत्तियों में एयरपोर्ट के पास 70 कमरों का हॉस्टल, अयोध्या के तीन रेस्टोरेंट में साझेदारी, लखनऊ में मकान, फॉर्च्यूनर कार और नाका क्षेत्र में दो मंजिला हॉस्टल भवन शामिल हैं। टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव के पास से कथित रूप से 36 लाख रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया है।

टिन्नू का पक्ष

51 वर्षीय टिन्नू ने बताया कि वह 1993 से विश्व हिंदू परिषद और राम जन्मभूमि न्यास से जुड़े रहे हैं। साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उन्हें कारसेवकपुरम से मंदिर परिसर में सेवा कार्य के लिए लगाया गया था। उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि संपत्ति उनकी मेहनत और ऑटो चलाने की कमाई से बनी है

9 संदिग्ध कर्मचारी

अब तक की जांच में 9 ऐसे कर्मचारी मिले हैं जिन्होंने हाल ही में महंगे फोन और गाड़ियां खरीदी हैं, जिससे उन पर संदेह गहरा गया है। SIT ने स्टेट बैंक के कर्मियों से भी उनके कामकाज पर विस्तृत जानकारी ली है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

ट्रस्ट की चुप्पी पर सवाल

अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़ा मामला अब सिर्फ कथित गबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। जो लोग निगरानी के जिम्मेदार थे, उनकी नाक के नीचे यह सब होता रहा और उन्हें भनक तक नहीं लगी — यह प्रश्न सबसे बड़ा है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने माना कि संतों की बात सुनकर यह मामला गंभीर लग रहा है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दूरी बनाते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्यों तक सीमित है। महंत कमल नयन दास ने पूरे सिस्टम पर तीखा हमला बोला — उनका कहना था कि जो कभी साइकिल पर चलते थे, वे आज लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं।

जो सवाल अब भी बेजवाब हैं

इस पूरे मामले में कई सवाल हैं जो जनता के जेहन में हैं और जिनका जवाब SIT की जांच से ही मिल सकता है:

पहला — इतने बड़े गबन के बावजूद ट्रस्ट की ओर से अब तक कोई औपचारिक लिखित पुलिस शिकायत क्यों नहीं दर्ज हुई?

दूसरा — क्या गिरफ्तार 5 कर्मचारी ही असली सूत्रधार हैं, या इनके पीछे कोई बड़ा ‘मास्टरमाइंड’ है?

तीसरा — ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी और ऑडिट व्यवस्था इतने सालों तक कहाँ सोती रही?

चौथा — क्या यह घोटाला केवल कुछ कर्मचारियों की व्यक्तिगत लालच का मामला है, या इसमें कोई संगठित गिरोह शामिल है?

आगे क्या?

SIT की जांच अभी जारी है और पूर्व कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी। CCTV डेटा का गहन विश्लेषण होगा। वित्तीय लेन-देन की फॉरेंसिक जांच से बड़े सुराग मिलने की उम्मीद है। अगर घोटाले की रकम 200 करोड़ से अधिक साबित होती है, तो यह देश के किसी धार्मिक संस्थान में हुए सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक होगा।

निष्कर्ष

राम मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। जो श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई में से भगवान राम को चढ़ावा देता है, उसका यह विश्वास होता है कि उसकी एक-एक पाई सही जगह जाएगी। अगर इस विश्वास के साथ खिलवाड़ हुआ है, तो यह केवल वित्तीय अपराध नहीं — यह आस्था की चोरी है।

SIT की जांच का परिणाम जो भी हो, इस मामले ने एक बड़ा सबक दिया है — धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही उतनी ही ज़रूरी है, जितनी किसी भी सरकारी या निजी संस्था में। भगवान के घर में भी इंसानी निगरानी और ईमानदार प्रशासन की ज़रूरत होती है।

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