उत्तर प्रदेश में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का काम अब और आसान नहीं रहेगा — कम से कम उनके लिए जो समय पर पंजीकरण नहीं कराते। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 की नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस संशोधन के तहत देर से पंजीकरण कराने पर लगने वाले विलंब शुल्क में भारी बढ़ोतरी की गई है।
मुख्य बात: जन्म के 21 दिन के भीतर पंजीकरण निशुल्क रहेगा। इसके बाद देरी पर शुल्क लगेगा, और एक साल से ज्यादा की देरी पर जिलाधिकारी (DM) या उप-जिलाधिकारी (SDM) से अनुमति भी अनिवार्य होगी।
उल्लेखनीय है कि 30 दिन से एक साल तक की देरी के मामले में जिला रजिस्ट्रार या अपर जिला रजिस्ट्रार के आदेश पर ही रजिस्ट्रार प्रमाण पत्र जारी कर सकेंगे — यानी सीधे स्थानीय रजिस्ट्रार से अब यह काम नहीं होगा। एक साल से अधिक की देरी पर जिलाधिकारी या एसडीएम की लिखित अनुमति लेना भी अनिवार्य हो गया है।
नाम जोड़ने के लिए नए नियम
अगर जन्म के समय बच्चे का पंजीकरण तो हो गया, लेकिन नामकरण नहीं हुआ, तो अब माता-पिता को 12 माह के भीतर रजिस्ट्रार को नाम की सूचना देनी होगी। 12 माह से 15 वर्ष के बीच नाम सहित पंजीकरण कराने पर अर्थदंड देना होगा। यदि पंजीकरण की किसी जानकारी में त्रुटि हो, तो जिला रजिस्ट्रार को आवेदन देकर संशोधन कराया जा सकेगा।
आधार से लिंकिंग और डिजिटल रिकॉर्ड
नए नियमों के तहत जन्म प्रमाण पत्र बनवाते समय माता-पिता का आधार नंबर देना अनिवार्य होगा, और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए मृतक का आधार नंबर जरूरी होगा। सभी रिकॉर्ड CRS (Civil Registration System) पोर्टल पर डिजिटल रूप में दर्ज किए जाएंगे। जन्म एवं मृत्यु के रजिस्टर स्थायी महत्व के अभिलेख होंगे जिन्हें किसी भी परिस्थिति में नष्ट नहीं किया जा सकेगा।
