लखनऊ में मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने वाले नामी प्राइवेट स्कूलों पर जिला प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कसा है। जिलाधिकारी (DM) विशाख जी की अध्यक्षता में हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में नियमों का उल्लंघन करने वाले 8 प्रमुख स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
इन स्कूलों को 1 जून 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है। यदि स्कूल तय समय तक संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उन पर 5 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
नए शैक्षिक सत्र (2026-27) की शुरुआत के साथ ही लखनऊ के कई नामी स्कूलों द्वारा 5% से लेकर 30% तक फीस बढ़ाए जाने के खिलाफ अभिभावकों ने लगातार प्रदर्शन और शिकायतें दर्ज कराई थीं।
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28 शिकायतें दर्ज: समिति को कुल 20 निजी स्कूलों के खिलाफ 28 शिकायतें मिली थीं।
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जांच में 8 स्कूल दोषी: जिला प्रशासन की संयुक्त जांच टीम (जिसमें SDM, ACM और सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल शामिल थे) ने जांच की, जिसमें से 8 स्कूलों के खिलाफ मनमानी फीस बढ़ोतरी और नियमों के उल्लंघन के आरोप सही पाए गए।
UP शुल्क विनियमन अधिनियम का उल्लंघन: ‘उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018’ (और संशोधन 2020) के तहत कोई भी स्कूल सालाना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) + 5% से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकता (जो इस सत्र के लिए करीब 7.55% बैठती है)। इससे ज्यादा बढ़ोतरी के लिए जिला समिति की अनुमति अनिवार्य है।
इन 8 स्कूलों पर गिरी गाज (कार्रवाई के दायरे में आए स्कूल)
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) राकेश कुमार की ओर से जिन स्कूलों को नोटिस भेजा गया है, उनमें ये नाम शामिल हैं:
सेठ एमआर जयपुरिया (गोयल कैंपस, अयोध्या रोड)
एलन हाउस पब्लिक स्कूल, लखनऊ
ब्राइट वे इंटर कॉलेज (सेक्टर-एच, जानकीपुरम) – यहाँ 5% से 25% तक की अवैध बढ़ोतरी पाई गई थी।
सेंट डोमिनिक इंटर कॉलेज, लखनऊ
सीलवती आइडियल पब्लिक स्कूल (रामनगर)
आश्रम एकेडमी (कृष्णानगर)
हुकुम सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज (इंदिरा नगर)
केजे मॉडर्न पब्लिक स्कूल, लखनऊ
2 स्कूलों ने मानी गलती, करेंगे फीस एडजस्ट
राहत की बात यह है कि जांच के दौरान ही 2 स्कूलों ने अपनी गलती लिखित में स्वीकार कर ली है। उन्होंने जिला प्रशासन को आश्वासन दिया है कि अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त फीस को अगले महीने (जून/जुलाई) की फीस में समायोजित कर दिया जाएगा।सख्त निर्देश: सिर्फ फीस ही नहीं, किताबों-यूनिफॉर्म पर भी नजर
जिलाधिकारी विशाख जी ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अभिभावक-हितैषी बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके तहत कुछ और सख्त गाइडलाइंस भी लागू की गई हैं:
कोई जबरदस्ती नहीं: स्कूल किसी भी अभिभावक को किसी खास दुकान या वेंडर से ही किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।
यूनिफॉर्म का नियम: कोई भी स्कूल 5 लगातार शैक्षिक सत्रों से पहले अपनी ड्रेस/यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर सकता।
वेबसाइट पर हो पूरी जानकारी: सभी स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर विस्तृत फीस स्ट्रक्चर प्रदर्शित करना अनिवार्य है।यदि 1 जून तक इन स्कूलों ने अपनी बढ़ी हुई फीस को लेकर कोई वैध और कानूनी स्पष्टीकरण नहीं दिया, तो ₹5 लाख का अर्थदंड लगाने के साथ-साथ स्कूलों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश भी की जा सकती है।
